धीरे-धीरे बोलो,कोई सुन न ले
क्योंकि प्यार की बातें
धीरे-धीरे ही कही जाती हैं।
कौन सुनेगा हमें?
पड़ोसी सुन सकता है,
कितनी बातें होती हैं प्यार में
लम्बी चुप्पी होती है,
एहसासों के घोंसले होते हैं
जहाँ प्यार, चिड़िया की तरह बैठता है।
कौन पड़ोसी सुनेगा?
चीन,पाकिस्तान और कौन!
**महेश रौतेला