इंतज़ार
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पलकें भारी हो गई आँखे थक गई यार l
न इंतज़ार ख़त्म हुआ और न रुकी अश्कों धार ll
बहती धारा में कंकड़ फेक फेक करते रहे इंतज़ार l
न धारा रुकी कभी न किनारा बन सका इक बार ll
मिला न सुकूँ दर्दे नुमाइश करने से भी कभी l
चर्चाएँ सरे राह रही हर दिन पर वो न मिल सका ll
दुआएँ की मंनते भी माँगी कई बार छोड़ दिया घरवार l
न मुलाकात उससे हो सकी न ख़ुद से मिल सके यार ll
- Rj Krishna