? Jay siyaram?
☝️बालस्तावत् क्रीडासक्त तरुणस्तावत् तरुणीसक्तः। वृद्धस्तावच्चिन्तासक्त परे ब्रह्मणि कोऽपि न सक्तः॥☝️
- भावार्थ :
बचपन में खेल में रूचि होती है , युवावस्था में युवा स्त्री के प्रति आकर्षण होता है, वृद्धावस्था में चिंताओं से घिरे रहते हैं पर प्रभु से कोई प्रेम नहीं करता है ।