खुदगर्ज
क्या कहूं; सचमे, बड़ा कमिना है यह इंसान ;
खुद गर्जी के लिए, संकट में डालता है किसी मासूम की जान
उसके गर्ज़ की, ख़ुदपरस्ती की कोई सीमा नहीं
नज़र अंदाज़ करता है उस गायकों, जिसने दिया है उसे दूध दही ।
देखते नहीं वोह काम या विश्वास; सिर्फ चाहिए उन्हें अंजाम ।
बदल जाता है उसका व्यवहार, जब हो जाता है पूरा उनका काम;
काम अपना पूरा होने पर, बन जाते हैं यह बेपरवाह और अनजान
तुझ से भी यही व्यवहार करता है यह, तुझे तो है पता ऐ भगवान ।
Armin Dutia Motashaw