क्या में इतनी बुरी हु?
की सबको मैं ही गलत लगती हु!
क्या में इतनी ना समझ हु?
की सब मुझे ही समझाते हैं!
क्या में इतनी उलझी हुई हु?
की सब मुझे ही सुलझा रहे हैं!
क्या में इतनी लापरवाह हु?
की सब मुझे ही परवाह करना सीखा रहे हैं!
क्या में इतनी नालायक हु?
की सब मुझे ही लायक बनाना चाहते हैं!
क्या में इतनी बिगड़ी हुई हु?
की सब मुझे ही सुधार ने में लगे हैं!
क्या मेरी गलतियां इतनी बड़ी हैं?
की सब मुझे ही सुना ने में लगे हैं!
बताना "मां" क्या में सच में इतनी बुरी हु?
की अब तुझे ही बोझ लगने लगी हु मैं.....
-KR