अजीब सी दास्तां होती है दोस्ती की,
मिलने से ज़्यादा लड़ना अच्छा लगता है
मनाने वाले भी होते है कुछ,
और कुछ को चिढाना अच्छा लगता है
दोस्तो के मुंह से कुछ सुनने के लिए,
कभी झुक जाना अच्छा लगता है
सफ़र ट्रेन का हो या ज़िंदगी का,
दोस्तो में बैठ कर मुस्कुराना अच्छा लगता है
दोस्त मिले तो लगता है मिल गई दुनिया,
बाक़ी सब कुछ भूल जाना अच्छा लगता है
दुआ है की हम हमेशा एक साथ रहे,
यारो तुम्हारे साथ जीना अच्छा लगता है
?????