मैं गुलमोहर हूँ
हमेशा की तरह आज फिर एक बार तुमने मुझसे अपने प्यार का इज़हार किया और हमेशा की तरह मैंने मुस्कुराकर केवल तुम्हारा शुक्रिया अदा किया।
सिर्फ इसलिए कि मुझे तुमसे प्यार नहीं है मैं कोई वादा नहीं करती, ऐसा कोई वादा जो में निभा ना सकूँ.. या यह कहूँ की कोई फरेब नहीं चाहती मैं।
लेकिन यह भी सच है कि मुझे परवाह है उस प्यार की जो तुम्हें है मुझसे।
तुम इस बात से तो हमेशा ही निष्फिक्र रहना की मैं किसी और को ना चाहने लगूँ।
कहीं किसी और के प्रेम में ना बंध जाऊं।
नहीं, ऐसा कभी नहीं होगा।
तुम्हारी एकतरफा मोहब्बत में कुछ वफ़ा मैं भी निभाऊंगी। अगर प्यार करना ही होगा तो तुम्हें ही चाहूंगी।
लेकिन इस सब से परे एक सच यह भी है कि मेरी नज़र में तुम सर्वोपरि हो, तुम खास हो, और हमेशा रहोगे। तुम्हारी परवाह मुझे भी उतनी ही है, जितनी तुम्हें मेरी है। मुझे भी तुम्हारा ख़्याल हर वक़्त होता है।
तुम क्या पहनते हो, तुम क्या खाते हो, तुम ठीक हो या नहीं, तुम्हारी हर ज़रूरत.. इस सब का पूरा हिसाब रखती हूँ और हमेशा रखूँगी।
अगर ये मोहब्बत है तो.. हाँ शायद मुझे भी तुमसे मोहब्बत है।
लेकिन मेरी ये मोहब्बत तुमसे किसी बंधन की उम्मीद नहीं करती है। तुम पर हक़ जताने के लिए मुझे किसी वज़ह की ज़रूरत नहीं है।
सच बताऊं तो तुम्हें चाहने के लिए मुझे तुम्हारी ज़रूरत नहीं है।
तुम खुश रहो, फिर चाहे किसी के भी साथ रहो।
तुम जब भी लड़खड़ाओ, कोई हाथ तुम्हें थाम ले.. फिर चाहे वो मेरा हाथ हो या किसी और का।
मैं तुम्हारी ज़िन्दगी का गुलाब नहीं.. गुलमोहर हूँ..
जितनी तेज धूप उतना गहरा रंग..
#रूपकीबातें