लगता है कि रास नहीं आई उन्हें
बातें या खयालात हमारे कोई।
दिल से जवाब दिया था तब पर लगता है कि
उनपर दिमागी सोच हावी है कोई।
बढाली है दुरियां शायद उन्होंने तभी तो
पयगाम आया नहीं है उनका कोई।
खुद पर आजाएगी सजा कहीं इस डर से
तो नहीं भागा है यहां कोई।
केहते थे सुनाओ जो दिल में लिए फिरती हो बात
मरने की बात आई तो जागा है कोई।
यूं ही केहते रहते है सब दोस्ती करोगी हमसे
नीभाना पड जाएं तो मजबुर हैं हर कोई।
मसीहा....