राह में रुकावटें आयीं तो बहुत मगर,
अड़े डटे खड़े रहे छोडी ना हमने डगर,,
मुकाम है विशेष एक हमने आज पा लिया,
साथ खड़ा ये जहाँ रुका नही अभी सफर।।
कसम एक आने पर यहाँ जो तब खायी थी,
कार्य पुर्ण प्रतिशत में देने की बारी आयी थी,,
कर्ज़ नहीं ये किसी पर फर्ज़ यहि है हमारा,
निश्छल मुस्कान में जीवनी अपनी पायी थी।।
प्रयास आगे जीवन में रहेगा यहि सदा,
निष्ठा और ईमानदारी छोडे ना यदा कदा,,
भविष्य नन्ही कोपलों का है हमारे हाथ ही,
शायद हो पाए मेरे शिक्षकों का ऋण अदा।।