#शायरी
आज क्या लिखू ये बैठे -बैठे सोच रही हूँ ।
हर दिल को छुए बो जज्बात खोज रही हूँ ।
कभी घायल तो कभी व्यस्त है दिल।
दिलो के लिये फुरसतिया लम्हे खोज रही हूँ ।
आई है रात बडे दिनो बाद पूनम वाली।
इस पूनम की रोशनी में सितारे खोज रही हूँ ।
गर्म है ये मौसम हवा भी ये गुमसुम है ।
शान्त मौसम में फिज़ा को खोज रही हूँ ।
✍ RJ Krishna koli ✍