क्या बताएँ के जाँ गई कैसे,
फिर से दोहराएँ वो घड़ी कैसे ।
किसने रास्ते में चाँद को रखा था,
मोझ को ठोकर लगी कैसे ।
वक़्त पे पाँव कब रखा हमने,
ज़िन्दगी मुँह के बल गिरी कैसे ।
आँख तो भर आई थी पानी से,
तेरी तस्वीर जल गयी कैसे ।
हम तो अब याद भी नहीं करते,
आप को हिचकी लग गई कैसे ।
❤️?