English Quote in Poem by Swati Grover

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#Kavyotsav2  

श्राद्ध  का  खाना 

घर  गई  तो  रसोई 
चार तरह के व्यंजन से भरी पड़ी थी
मुझे पता है
मेरी माँ से इतनी मशक्कत नहीं होती
उनकी उम्र इसकी अनुमति नहीं देती
पूछा, "मैंने यह क्या कमाल है?"
यह कोई कमाल नहीं श्राद्ध का खाना है
आज कुछ नहीं पका बस यहीं खाना है
दादी तो मेरी यह सब मानती नहीं थी
नानी तो कहती थी कोई दिखावा नहीं करना
सेवा भी नहीं की तो श्राद्ध भी नहीं करना
मुझे लकवाग्रस्त, असहाय वो नज़र आती है
इन पकवानों को देख मेरी आँख भर आती है
श्राद्ध करने से दिन के बोझ कम होते है
दिल के नहीं
कोई जीवित है तो उसका दिल न दुखे
उसका मान-सम्मान होना चाहिए
जिन्हें हमसे प्यार होता है
उस लाठी का भी तो ख़्याल होना चाहिए
आसपास के बूढ़ो की चार बातें सुन लेती हो
इसलिए नहीं कि मेरे अंदर उच्च संस्कार हैं 
"संस्कार" भारी शब्द हैं यह सिर्फ़
नारी की ज़िम्मेदारी नहीं हैं
बल्कि यह एहतराम इसीलिए है
एक मुद्दत से घर में कोई बुज़ुर्ग नहीं हैं
मैंने सोच लिया हैं 
मुझे नहीं खाना
न मुझसे खाया जाना 
यह श्राद्ध का खाना..........

स्वाति ग्रोवर

English Poem by Swati Grover : 111168627
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