#KAVYOTSAV -2
हम बड़े होते जाते हैं,
माँ-बाप बूढ़े होते जाते हैं.
हमारी दुनिया बड़ी होती जाती है
उनकी दुनिया सिमटती जाती है .
एक दिन ऐसा भी आ जाता है
जब वो उंगली, जो हर भीड़ में
हमारी सुरक्षा की चाभी थी
कांपने लगती है .....
वो कंधे जो हमारी
हर ख़ुशी हर दुःख का
भार उठा लेते थे, झुक जाते हैं
अपना बोझ भी उठाने में असमर्थ
अगर बच्चों को बड़ा होते देखना
सबसे बड़ा सुख है
तो माँ-बाप को बूढ़ा होते देखना
सबसे बड़ी पीड़ा.
हमारे जीवन को गति देने वालों का-
गतिहीन होना,
शिथिल होना,
कुछ भूल जाना,
कुछ अजीब सा याद आना.
वो पूछते हैं, डॉक्टर ने क्या कहा,
हम कहते हैं
एकदम अच्छे हो जाओगे जल्दी
दूसरी तरफ देखते हुए पनीली आँखों से
पता नहीं बूढ़ी आँखों में ..
अब झूठ पढने का सामर्थ्य है या नहीं
वो छोड़ देते थे,अपनी ज़िन्दगी जीना
जीने लगते थे,
हमारे आंसू, हमारी खुशियाँ
हमारे दर्द, हमारी चोटें
खो देते थे अपने को
हमारी ख्वाहिशों में
हम ऐसा नहीं कर पाते
हम अपनी बड़ी दुनिया के कारोबार निभाते हैं
पति-पत्नी , बच्चे, नौकरी -व्यवसाय
रिश्तेदारियां- दोस्तियाँ
इनके साथ साथ
बूढ़े होते माँ-बाप
जो कभी हमारी पूरी दुनिया थे,