हमें ना घूर कर देखो,
जरा सा दूर से देखो।
दिखेंगे हम तुम्हे फिर भी,
जरा सा भूल कर देखो।।
मिला ना वक्त हमको भी,
मिला ना वक्त तुमको भी।
मिलेगा वक्त दोनों को,
समय का मूल तो देखो।।
ना तपती धूप है तुमको,
न तपती धूप है मुझको।
तपेगी धुप दोनों को,
जमी को छू के तो देखो।।
गिरे पतझड़ के पत्तो को,
उठाने कोन जायेगा।
गिरे हम तुम अगर सोचो,
बचाने कौन आयेगा।।
ना सर्दी है ना गर्मी है,
हमें तो भ्रम है अबतक बस।
डर अगर हम गए इनसे,
तो कमाने कौन जायेगा।।
*Ankit kumar*