जानते हैं !
सबसे बुरा वक्त कब होता है!
जब अंधेरे से नहीं रोशनी में जी घबराए।
जब अकेलेपन में नहीं लोगों से मन कतराए।
जब उंगलियों के पोरों पर अजीब सी चुभन होती रहे।
जब ,माथे की खाल दिन - भर सिलवटे बोती रहे।
जब थोड़ा सा मुस्कुराने के लिए ख़ूब सारी कोशिश करनी पड़े।
जब ज़रा सा छुपाने के लिए बहुत ज़्यादा खुलना पड़े।
जब ,रात भर जागते - जागते भी सुबह की दूरी तय ना हो पाए।
जब दिन उदासी में लिपटा हुआ यूँ ही बीत जाए।
जब आईने में दिखता अपना ही चेहरा अजनबी सा लगने लगे।
जब ख़ुद की ही ख़ामोशी ख़ुद को ही चुभने लगे।
सबसे बुरा वक़्त बस इन्हीं लम्हों के इर्द - गिर्द सांस लेता है