औरत जिस्म से बहुत आगे हैं
अमृता और साहिर में जो एक तार था वह बरसों तक जुडा रहा, लेकिन क्या बात रही दोनों को एक साथ रहना नसीब नहीं हो सका ?यह सवाल अक्सर मन को कुदेरता है..जवाब मिला यदि अमृता को साहिर मिल गए होते तो आज अमृता अमृता न होती और साहिर साहिर न होते...कुदरत के राज हमें पता हमें पता नहीं होते, किस बात के पीछे क्या भेद छुपा है यह भेद हमें मालूम नहीं होता इस लिए ज़िन्दगी की बहुत सी घटनाओं को हम जीवन भर स्वीकार नहीं कर पाते.
बहुत बार प्रेम की अतृप्ति जीवन को वह दिशा दे देती है जो तृप्ति नहीं दे पाती. यह भी जीवन का सत्य है कि जहाँ थोड़ी सी तृप्ति या सकून मिलता है वह वही रुक जाता है. यह सिर्फ प्यास है जो आगे की यात्रा के लिए उकसाती है. अमृता को साहिर मिल गए होते तो बहुत संभव था दोनों की यात्रा रुक जाती | यह वह अतृप्ति ही थी जो साहिर के गीतों में ढलती रही और अमृता के लफ़्ज़ों में उतरती रही.
मातृभारती पर इस कहानी 'आधी नज्म का पूरा गीत - 11' पढ़ें
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