तुम जो गये मेरी जान भी ले गये
मुझमें कुछ भी रहा ना बाकी।
मैं दर्द से ऐसे तड़प रही
जैसे शदियों की मीन हूँ प्यासी।।
रंग रूप मेरा सूना हो गया
आँखों में छाई कैसी उदासी।
चहक रही थी महक रही थी
अब हो गयी मैं अधमरा सी।।
मैं कुल की थी लाज शरम
मुझ पर ही इज्जत टिकी सी।
तू बेदर्दी बदनाम कर दिया
अब और रहा ना कुछ बाकी।।