क्याें ए जले हुए दिल को मैं
नमक छीडक तुली है ए दुनिया......
क्यों दिल को बहुत मुश्किल
से शुकुन मिला था......
वो भी छीनने मे क्यों लगी है ए दुनिया.....
पता है दिल तो कीसी के पीछे दीवाना था....
वो तो मेरा अतीत था न जाने मुजे क्यों
रु लाने मैं तुली है ए दुनिया......
मेरे सपने थी अजीब तुमको पाने कां , नशा छा गया था दिल को तेरा पर हम तेरी याद मैं बहुत रोए थे, पर हम लाचार थे हम को क्यों लाचारी का फायदा उठा ने मे लगी है ए दुनिया.......
तेरी बातों मे कुछ खाश था , तेरे प्यार को हम हम भुला नहीं पाये, पर बहुत मुश्किल से हम खुद को संभाला है पर हम को क्यों नहीं खुद को संभलने देती है ए दुनिया........
हम सोच रहे थे की हम अकेले रहे हम खुश रहे तो हम को क्यों न् अकेला छोड देती है ए दुनिया......
"प्यार का सफर"भी सुहाना होता है, जिंदगी को जीने सी वजह बनाता है,तो हमको ए यादो पर क्यों न जीने देती है ए दुनिया......
शैमी ओझा.....