कोई लहर ऐसी उतर गई
मेरी बेकिनारा सी लहर में।
कि मेरी रगों को डुबो दिया
किसी तैरते हुए जहर में।।
मेरी आरजू थी कि सुख मिले
मगर आँसुओं भरे दुख मिले।।
मैं अकेली अपनी ही जात में
मैं उदास ही अपने शहर में।।
जाने क्यूं जाने ना
मेरा दिल माने ना।
छोटी सी जिन्दगी
दिल लगी जाने ना।।
ऐ जिन्दगी तू ही बता
तुझे क्या कहूँ ऐ हमनवा।
मिली है इत्तेफाक से जरा सी जिन्दगी।
लम्हों के इन्तजार में जरा सी जिन्दगी।।