न आये हो, न आओगे..
न फ़ोन पे बुलाओगे
न शाम की करारी चाय..
लबों से यूँ पिलाओगे
न आये हो, न आओगे..
न दिन ढले सताओगे
न रात की नशीली बाय
से नींद में जगाओगे
गए तुम गए हो क्यूँ...
रात बाकी है
गए तुम गए हो क्यूँ...
साथ बाकी है
गए तुम गए,
हम थम गए,
हर बात बाकी है
गए क्यूँ, तो जियें क्यूँ