चुमना चाहना अब कहां बंदीशे देखे ?
खुनका खोलना, हम कहां दायरे देखे?
मौसमे हुंफ की,अब न धुप साये देखे?
दांतका चुभना, हम कहां दाखले देखे?
ताप पे जोश हे,अब कहां रिवाजे देखे?
तु समा जाय या हम कहीं घुल के देखे?
रोक ले ये लम्हे,अब कहां सबेरे देखे?
और मुहोब्बते,तूम कहां आशियें देखें?