दिल मेरा भी धड़क रहा
पर धड़कनों में कोई आवाज नहीं
मेरी भी चल रही सांसे
पर तेरी सासों सा एहसास नहीं
जाने क्या सौदा किया
जन्म ने मेरी जिन्दगी से
की तड़पे खाके तू दो पेट
और मेरे खाने को निवाला नहीं
की नींद ना आए तुझे बिस्तरों पे
और मेरे सपनों को चादर भी नहीं
फाड़े वस्त्र तू दिखावट के लिए
और तन ढकने को मेरे कफ़न भी नहीं
रोए तू दिल टूटने पर
और यहा दर्द के सिवाय कोई सहारा नहीं
की जाने क्या सौदा किया
जन्म ने मेरी जिन्दगी से
केहता जिसे तू सड़क है
बन गया मेरा घर वही
जानवर भी तेरे घर का निरामय होगा
और हमारा सेहत से कोई वास्ता ही नहीं
की दौड़ रहा तू बीमारियों से बचने को
और यहा तो मौत को भी हम गवारा नहीं
आस्था की बेजान मुरत को फूल चडाता
और जीवित सासों को भीख भी नहीं
की जाने क्या सौदा किया
जन्म ने मेरी जिन्दगी से
की तुम्हारे शराब की कीमत हुई
हमारे खून से ज्यादा कहीं
ना कोई धर्म ना जात
ना मजहब ना कोई समाज
जो भीख दे मुट्ठी भर हमें
वही इश्वर हमारा और खुदा वही
की जाने क्या सौदा किया
जन्म ने मेरी जिन्दगी से
की हूँ तो मैं तुझ जैसा ही पर
दुनिया में तेरी शायद मैं इन्सां नहीं
जिन्दा तो हूं मैं पर
अंदर मेरे जीवन नहीं