तुम थे, मैं थी,और शाम सुहानी थी।
तुम थे, मैं थी, और शाम सुहानी थी।
हवाएं थीं मद्धम मद्धम, फिजाएं थीं महकी महकी,
नजारे थे सारे जवां, नींद खुली तो जाना वो एक ख्वाब था।
हम तेरे साथ यूं ही खोये ही रहते, काश उम्र भर हम सोये ही रहते।
क्या समा, क्या आसमा, क्या रुत मस्तानी थी।
तुम थे, मैं थी, और शाम सुहानी थी।
हवाएं थीं मद्धम मद्धम, फिजाएं थीं महकी महकी,
नजारे थे सारे जवां, फिर नींद खुली तो जाना, वो एक ख्वाब था।