Hindi Quote in Story by kavita jayant Srivastava

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 पुराना सिंदूर 


किटी पार्टी में जाने के लिए नहा कर महकती हुई शीला जी को देख सब्जी काटती हुई नई नवेली बहू ने आश्चर्य से देखा ..अरे मम्मी जी! आपने बाल धुल लिए ..आपने तो कहा था पूर्णिमा की तिथि पर बाल नही धोये जाते ..? 

शीला को याद आया पिछले ही महीने उसने बहू के मायके में पूजा थी और उसने ईर्ष्यावश उसे बाल नही धुलने दिए थे ..ताकि या तो वो जा ही न सके, और अगर जाए भी तो वहां उसका मन खुश और तन सुंदर न लगे ..! बेचारी तेल पड़े बालों के कारण बुझे मन से ही गयी थी , इस कृत्य में शीला को जाने क्यों असीम आनंद आया था.. 

बहू ने भोलेपन से पुनः पूछा 'आपने बताया नही मम्मी जी ?

शीला कुछ अचकचा कर बोली , ''अरे वो , तो मैने तुम्हारे लिए कहा था ,क्योंकि वो पूर्णिमा की तिथि नई नवेली शादी शुदा दुल्हन के लिए हानि करती बेटा..! सिंदूर की हानि होती न ! अभी तुम्हारी मांग में नया नया सिंदूर जो पड़ा था..तुम्हारे सिंदूर का अभी बहुत महत्व है बेटा , इसलिए तुम्हे मैने मना किया था ,बाल धोने को ..! 

''तो क्या शादी पुरानी हो जाने पर सिंदूर का कोई महत्व नही होता मम्मी जी ? 

इस बार शीला अपने मनगढ़ंत नियमो की प्रासंगिकता पर चुप ही रह गयी ..।

-कविता जयन्त

Hindi Story by kavita jayant Srivastava : 111063061
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