इधर-उधर मत झांको मन
अपने अन्दर रह जाओ मन,
हिमगिरि को तुम देखो मन
चारदिवारी मत रखो मन।
पुराने विद्यालय हो आओ मन
खेतों मे कुछ बो आओ मन,
प्यार पिपासा रख लो मन
बचपन सा कुछ ले आओ मन।
सत्य बराबर छाँटो मन
पथ के कांटे काटो मन,
सुख-दुख की बातें कह जाओ मन
लिया उधार चुका आओ मन।
**महेश रौतेला