#kavyotsav
गज़ल (यार)
दिल लगता नहीं.........कहीं और दिल लगाने से,
मेरा यार जब आता नहीं..................बुलाने से,
मुझे याद है लम्हें सभी.......जो तेरे संग गुज़ारे थे,
वो शामें सुहानी सी.....वो दिन और रात सुहाने से,
तक़दीर मे लिखा था विसाल-ए-यार.......लेकिन,
क्यों मिले नहीं दो दिल..........तो फ़िर मिलाने से,
करता था कोशिशें हज़ार दफ़ा.....मैं उसे मनाने की,
रूठ जाता था जो हर दफ़ा किसी न किसी बहाने से,
न मै कभी आजिज़ हुआ..........उसका ग़म लेकर,
न वो अजिज़ हुआ कभी,मेरा दर्द-ए-दिल बढ़ाने से,
दिल बहलाने के हर असबाब है मयस्सर मुझको,
पर बहलता नहीं ये दिल.........और के बहलाने से,
दिल की तख़्ती पर लिखा था नाम एक बरसों पहले,
अब मिटता नहीं क्यों नाम वो मिटाने से,
उस बज़्म मे बयां.......मै हाल-ए-दिल क्या करूं,
जहां सुनता नहीं कोई बात गर किसी के सुनाने से,
न है ये क़ायदा न कोई फ़ायदा...रसमे मुहब्बत का,
अगर वो है नहीं मेरा....फ़िर हक़ उस पर जताने से,
जो दिल मे बेकसी है बेकली है बे-इत्मिनानी है,
किसी का क़र्ज़ है गोया जिसे मैं रहा चुकाने से,
सुस्त-ए-गाम हैं मुसाफ़िरान........राह-ए-शोक़ पर,
कतरा रहें हैं..........इस रह-ग़ुज़र से ग़ुज़र जाने से,
तन्हाई मे भी मुस्कुराने पर,लोग मेरे सवाल करते हैं,
डर लगता है मुझको अब तन्हाई मे भी मुस्कुराने से,
ज़रा ठहरो के अभी मसरूफ़ हूं मैं,
अभी फ़ुरसत नहीं......अधूरे ख़्वाबों को जलाने से,
बुरा कहते है तो कहने दो,दुनिया की किसे परवाह,
मुझे लेना नहीं देना नहीं...अब कुछ और ज़माने से,
एक बात उनसे कहने को बाक़ी रह गई,
एक बात अधूरी रह गई...............मेरी बताने से,
जो मरता था उसके वासते......वो मर गया 'सादिक़:,
अब रहा न कोई फ़ायदा...........और उन्के आने से।
©Sadique