#FRIENDSHIPSTORY
खामोश दोस्ती
-मधु शर्मा कटिहा
दोस्ती शब्द से विश्वास ही उठ गया होता निशि का, यदि शैरी न होता। कितना भरोसा कर उसने रजत को घर बुलाया था, जब रात में अचानक मम्मी बेहोश हो गईं थीं और पापा उन्हें लेकर हॉस्पिटल गए थे। वह भयानक रात.....दरिंदगी पर उतरे रजत का हाथ निशि के मुँह को कसकर दबोचे था। तड़पती निशि का मौन रुदन सुन शैरी दौड़ता आया और झपटकर भगा दिया उस हैवान को ! आज शैरी को फ्रेंडशिप बैंड बांधकर लिपट गई निशि उससे। अपना पंजा बढ़ाकर शैरी ने भी साथ निभाने का वादा किया। खामोश खूबसूरत पल....दोस्ती क्या लफ़्ज़ों की मोहताज है?