इंसान के जन्म के साथ ही,
मृत्यु 'निश्चित' है।
मरते नहीं है तो 'अच्छे विचार',
विचार 'जीवित' रहते है।
जो अच्छे विचारों के बीज बोते हैं,
वह 'वटवृक्ष की माफिक' फैलते हैं।
श्री कृष्ण, महात्मा बुद्ध, महावीर स्वामी, गांधीजी, आचार्य रजनीश (ओशो),
यह सब अभी जीवित नहीं है।
किन्तु उनके विचार जीवित है,
वह विचारों में 'अमर' है।
उनके नाम को उनके विचार ही अमरत्व प्रदान करके गए हैं।
उनके विरोधी भी जाहिर में उनके,
विचारों को मान दे,
उनकी प्रतिभाओं को 'नमन' करे।
तब हमें मान लेना चाहिए कि अच्छे विचारों से बना व्यक्तित्व कभी मरता नहीं है।
'श्रीं राम से हे राम' तक का सफर ,
सत्य,अहिंसा के पथ पर चल कर महान बनना कोई छोटी बात नहीं है।