शीर्षक: शिव भी तुम,कृष्ण भी तुम,मेरे लिए प्रेम भी तुम,ईश्वर भी तुम।
तुम रत्नों में कोहिनूर हो,धातुओं में सोना।
मणियों में हीरा हो, फूलों में कमल का खिलना।
पक्षियों में सारस हो,पर्वतों में हिमालय।
नदियों में नेह की गंगा हो, सागरों में विष्णु के क्षीरालय।
तुम ही हो आकाश में चंद्रमा,अग्नि में ज्वाला।
वातावरण में प्राणवायु , ऋतुओं में वसंत की माला।
रंगों में केसरिया हो, रागों में भैरवी
शब्दों में मौन हो और भावों में प्रेम के रवि।
मेरे आँखों के काजल हो तुम्ही
रातों में प्रीत पूर्णिमा।
शहरों में काशी हो
घाटों में दशाश्वमेध की छीमा।
समयों में संध्या हो , आवाज़ों में बांसुरी।
हर स्पर्श में आगोश हो और ख़ामोशी में सुकून पूरी।
तुम ही मेरे अर्ध शरीर के ईश्वर हो शिव और तुम ही मेरे कृष्ण कन्हैया
तुम्हारे जैसा फिर ईश्वर ने दूजा जीव कहां बनाया।
@softrebel
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