🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
बदलते दौर में चेहरे भी अक्सर
बदल जाते हैं,
मगर जो रूह का रिश्ता हो
मंज़र नहीं बदलते,
पुराने घर की मिट्टी को ज़रा
खुरच के तो देखो,
दीवारें बदल जाती हैं, पर दर
नहीं बदलते,
वो जिनके हाथ में सच की ज़रा
सी कतरनें भी हों,
हज़ार आंधियां आएं वो लश्कर
नहीं बदलते,
कलेजा चाहिए, दुनिया से
टकराने के लिए वरना,
डरे हुए परिंदे अपने ही पर नहीं
बदलते,
इबादत भी यहाँ, अब तो
तिजारत बन के रह गई,
नसीब बदल जाता है, पर ये
मंज़र नहीं बदलते,
मैं तेरी रूह में, गर ज़हर बन के
ही उतर जाता,
तो मर जाते मगर हम दोनों
यक़ीनन नहीं बदलते…🔥
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♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
#LoVeAaShiQ_SinGh ☜
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