Quotes by महेश रौतेला in Bitesapp read free

महेश रौतेला

महेश रौतेला Matrubharti Verified

@maheshrautela
(907.1k)

सज जाना है
बचपन से बुढ़ापे तक
सजना ही तो है।
मानवता में बह जाना है
शुद्ध होने के लिए
चलना है।
पहाड़ लांघना है,
धमकी की धुँध से
बाहर आना है।
डर साँप का हो
या बाघ का
आदमी से बड़ा है।
टूटी पगडण्डियों को ठीक कर
आलोक से
रास्ते लम्बे पार करने हैं।

*** महेश रौतेला

Read More

तनावों को लेकर
यहाँ-वहाँ जाता हूँ,
जैसे सड़क जाती है
दुर्घटनाओं को लेकर,
पृथ्वी घूमती है
भूकम्पों को लेकर,
ब्रह्मांड बनता है
विस्फोटों को लेकर।
इस सब के मध्य शान्ति से
पैदा होता है,
शिखर पुरुष
एक मनुष्य धीरे-धीरे।

*** महेश रौतेला

Read More

हर ओर आदमी का होना
छलता है हमें,
जब जनसंख्या पचास करोड़ थी
तब जेब कटी थी,
जब सौ करोड़ हुई
तब भी कटी थी,
हर ओर आदमी का होना
छलता है हमें।

*** महेश रौतेला

Read More

मैं हूँ या नहीं
तुम हो या नहीं
कैसे पता लगेगा?
चलो कुछ प्यार कर लें
या कुछ सच बो दें,
उस स्थान पर फिर मिल लें
जहाँ हम मिला करते थे।
कुछ शब्द तुम कहो
कुछ शब्द मैं कहूँ,
इस मौन के बीच
मैं तुम्हें ढूंढूं।
चलो ईश्वर को ले चलें दूर
आज के युद्धों के बीच
नहीं हाँकना है उन्हें रथ।
मैं हूँ या नहीं
ईश्वर तुम हो या नहीं
कैसे पता लगेगा?

*** महेश रौतेला

Read More

मैं हूँ या नहीं
तुम हो या नहीं
कैसे पता लगेगा?----

उजाला ले आये भगवान-
उन शिखरों पर
जो गगन को छूते हैं,
उन घाटियों में
जहाँ नदियां बहती हैं,
उन वृक्षों में
जिनपर फूल खिलते हैं,
उन प्राणों पर
जो करुणा में जीते हैं,
उस रामायण में
जहाँ रावण मारा गया था,
उस महाभारत में
जहाँ गीता बोध हुआ था।

*** महेश रौतेला

Read More

मैं कुछ नहीं कहूँगा तुमसे
प्यार के बारे में
क्योंकि वह शब्दों में नहीं,
आत्मा में है,
कर्म में दुबका पड़ा है।
मैं नहीं कहूँगा तुमसे
साथ चलने को
सूक्ष्म-अँधेरी रात में।
नहीं कहूँगा
छाँव बैठने को
एकान्त में आने को
क्योंकि हमें साथ-साथ उत्पन्न होना है।
नहीं कहूँगा तुम्हें
सच बोलने को,
क्योंकि यह तुम्हारा पुण्य है।
आओ, गुनगुना लें
जीवन के चमत्कार को,
एकात्म होकर।
****

*** महेश रौतेला

Read More

प्यार करते-करते
डूबने लगा था,
पगडण्डियां जिधर थीं
उधर हैं,
उजाला जिधर था
उधर है।
प्यार करते-करते
ठिठक गया था,
राधा-कृष्ण के प्यार सा
बिखर गया था।
चला बहुत था
दुनिया के महाभारत में
खड़ा था,
जो मौन थे
वे भी मर रहे थे।
प्यार के बाद
दुख बहुत थे।

*** महेश रौतेला

Read More

राह खत्म होनी थी
हो गयी,
साथ छूटना था
छूट गया।
मन विचलित होना था
हो गया,
एक जीत के बाद
एक हार होनी थी
हो गयी।
एक पुण्य के बाद
एक पाप होना था
हो गया,
आस्था को टूटना था
टूट गयी।
धरती को धसना था
धस गयी,
फूल को खिलना था
खिल गया।

****
* महेश रौतेला

Read More

दे दे स्वर वीणावादिनी दे दे
भारत की भाषा, भारत में कर दे,
जन-जन के मन में भर दे
स्वच्छ-स्वस्थ राष्ट्र को कर दे।
सहस्र युगों को हमें दिखा दे
वीणा के स्वर सर्वत्र बहा दे,
पग-पग पवित्र पुष्प बिछा दे
जिह्वा से मधु रस बरसा दे।
संग प्यार का प्यारा दे दे
उच्च शिखर की खुशियां दे दे,
स्वच्छ-स्वतंत्र गरिमा दे दे
भारत की भाषा, भारत में रख दे।
रुग्ण मन को शौर्य सुना दे
शुष्क सुरों में प्राण जगा दे,
भारत से प्रिय बातें कर दे
भारत की बातें, भारत में भर दे।
****


*** महेश रौतेला

Read More