Quotes by महेश रौतेला in Bitesapp read free

महेश रौतेला

महेश रौतेला Matrubharti Verified

@maheshrautela
(539.8k)

तुम इस देश को
दलदल मत कर देना,
इस सुनहरी काया को
भद्दा मत कर देना।

*** महेश रौतेला

वृक्षों से क्या कहूँ
वे उगेंगे
फूलेंगे, फलेंगे
नियति सुदृढ़ हमारी बना
हवा में हँसने लगेंगे।
उनका शोक गीत
सुन सकेंगे
जब कटकर वे गिरेंगे।
वृक्षों से क्या कहूँ
वे आसमान को देख,
ठंडी छाया दे
हमें देख गुनगुनाने लगेंगे।

*** महेश रौतेला

Read More

तुम्हारे जाने के बाद-
सारी दुनिया बन्द हो गयी
इतना प्यार कहाँ छुपा था!
श्रवण में शब्द नहीं
इतना अहसास कहाँ बन्द था!

** महेश रौतेला

Read More

हमारी बाँहें खुली रह गयीं
तुम आये नहीं,
ऐसे ही जिये और बीत गये,
बाहें अब अनजान सी हो गयीं।

*** महेश रौतेला

मैं छोटी सी कविता
पलभर चली,
क्षणभर खिली
हर परिचय में मिली।
सुगन्ध सी फैली
धरा में मिली,
टूटे सपनों की धात्री
देशों में घुली मिली।
चेहरा दैदीप्यमान
साथी संग हँसी,
छुआ जब मन को
सिहर कर मुस्करायी।
मैं छोटी सी कविता
वसंत संग लौटी,
गरज के बरसी
क्षणभर में बिखर गयी।
पता बताने लौटी
खर-पतवार उखाड़,
प्रिय संग बैठी
नित नये रूप में खड़ी,
छोटी सी कविता हूँ।
***

** महेश रौतेला

Read More

बहुत समय से मैं
भगवान की तरफ हूँ,
आँधी हो,तूफान हो
युद्ध हो,महायुद्ध हो,
अमीरी हो,गरीबी हो
मैं भगवान की तरफ रहता हूँ।
बाढ़ हो,सूखा होः
गर्मी हो, ठंड हो या वसंत हो
मेरी आशा-आकांक्षा उनमें रहती है।
गीता पढ़ता हूँ
लोक,परलोक की बातें समझ लेता हूँ,
"जो पहले ही मारे जा चुके हैं
उन्हें मारने का निमित्त मात्र बन
भगवान की ओर रहता हूँ।"
संशय से बाहर आने के लिए
कर्म बन जाता हूँ,
शायद भगवान ऐसा ही चाहते हैं।
****

*** महेश रौतेला

Read More

इसी प्यार के कारण
हम फिर-फिर मिलते हैं,
इसी प्यार के कारण
हम फिर-फिर लड़ते हैं।
इसी प्यार के कारण
आँसू नित बहते हैं,
इसी प्यार के कारण सब
राधे-राधे कहते हैं।
इसी प्यार की अगुवाई में
दुनिया नित चलती है,
इसी प्यार की परछाई में
राधा अब तक बैठी है।
***
*** महेश रौतेला

Read More

मैंने चाहा
तृणभर परिचय,
इस धरा का,इस ब्रह्मांड का।
सपना चाहा
तृणभर सुन्दर
इस देश का, इस मनुष्य का।
प्यार चाहा
अतिशय व्यापक
इस लोक का, फिर परलोक का।


*** महेश रौतेला

Read More

भीगे नयनों की बातें हैं
जो दुनिया में रहती हैं,
कुछ हाथ पकड़ कर आती हैं
कुछ पैर छू कर जाती हैं।


*** महेश रौतेला

Read More

थोड़ा ही चले थे साथ-साथ
शेष प्यार में चले,
थोड़ा ही रहे थे साथ-साथ
शेष प्यार में रहे।
थोड़ा मिले थे साथ-साथ
शेष मीलों अकेले चले,
थोड़ा गाये थे साथ-साथ
शेष मन ही मन गुनगुनाये।
थोड़ी हुई थी भेंट
शेष अलग-अलग चले थे,
थोड़ा बैठे थे साथ-साथ
शेष दूर-दूर रहे थे।

*** महेश रौतेला

Read More