अध्याय:14
जन्माष्टमी का भव्य कार्यक्रम समाप्त हो चुका था और श्रद्धालु अपने घर लौट चुके थे।
अब आगे...........................!!
दिल्ली ,
होटल रूम की बालकनी में दो कुर्सियां रखी थी, दूर आसमान में तारे टिमटिमा रहे थे।
एक कुर्सी पर आनंद और दूसरी पर अनिरुद्ध;दोनो के हाथों में गरमा गरम कॉफी के कप थे।
अनिरुद्ध की नजरे बिना झपके आसमान पर टिकी हुई थी ,जैसे उन चमकते सितारों में वो किसी अपने को ढूंढ रहा हो....!!
आनंद ने कॉफी की एक शिप ली और कुछ देर उसे देखता रहा..!!
आनंद: अनी...!!
अनिरुद्ध:(आसमान में नजरे खड़ाए हुए) हम्म् ।
आनद: क्या हुआ??
अनिरुद्ध: कुछ नही..!!
आनंद:(कुछ देर उसके चेहरे को पढ़ता रहा फिर धीमी आवाज में) मासी मां को याद कर रहे हो..??
अनिरुद्ध:(धीरे से आसमान से नजरे हटाकर सामने की और झुकाकर) हम्म.....अब उनकी यादों के सिवा और रह भी क्या गया है।
(कुछ पल के लिए उसकी आवाज खामोश हो गई..)
( फिर होठों पर दर्द भरी मुस्कान ला कर) अजीब बात है न, नंदू जो इंसान मेरी कामयाबी के लिए सबसे ज्यादा दुआ करता था,आज मेरी हर कामयाबी में वही मेरे साथ नही है ।
(बालकनी में एक बार फिर सन्नाटा छा गया...!!)
पुरानी यादों को याद कर आनंद की आंखों के कोने भीग गए।।। पर तुरंत अपना चेहरा घुमा कर आंखो के कोने को साफ करता है...!!
खुद को संभाल कर वो फिर अनिरुद्ध की तरफ मुड़ा..!!
अनिरुद्ध की नजरे अभी भी जमीन पर टिकी थी...!!
आनंद:(अनिरुद्ध के कंधे पर हाथ रख कर) मासी मां हमेशा हमारे साथ है अनी ,उनकी याद में , आशीर्वाद में (आसमान में चमकते हुए तारे की ओर इशारा करते हुए) वो देखो..!!
अनिरुद्ध:(आसमान की ओर देखते हुए) हम्म...!!
बालकनी में कुछ देर शांति रही...............! फिर माहौल को हल्का करने के लिए आनंद ने बात बदल दी..!!
आनंद: वैसे ,मुझे तो लगा था कि आसमान में चमकते तारो को देख कर किसी और को याद कर रहे होगे .!!!
अनिरुद्ध: (आइब्रोज सिकोड़कर)किसे??
आनंद:अरे वही,जो कुत्ते के बच्चे को बचाने के चक्कर में तेरी कार के आगे आ गई थी..!!(उसके होठों पर शरारती मुस्कान थी)........जिसके बारे में तू बता रहा था..!!
अनिरुद्ध आंखे सिकोड़ते हुए आनंद को गुस्से में देखा..!!
आनंद:वैसे उस लड़की ने ऐसा क्या कह दिया जो अनिरुद्ध सिंह महेश्वरी इतना चिढ़ गए..... हम्म??
(अनिरुद्ध आनंद को अभी भी घूरे जा रहा था)बता ना...यार
अनिरुद्ध ने झुंझला कर पूरी कहानी सुना दी...जैसे ही बात खत्म हुई एक पल की खामोशी छा गई और अगले ही पल बाल्कनी में आनंद का जोर का ठहाका गूंज उठा.....
हा हा हा हा.....!!!
आनंद:(हस्ते हुए) बिगड़ा हुआ नवाबजादा.....
अनिरुद्ध (तीखी नजरो से देखते हुए) तुझे बड़ी हंसी आ रही है।
आनंद:(हंसी रोकते हुए) हां.... मतलब.... सॉरी यार..लेकिन सोच ... द ग्रेट बिजनेस टायकून अनिरुद्ध सिंह महेश्वरी और बिगड़ा हुआ नवाबजादा....(हस्ते हुए) टाइटल बढ़िया है..!!
अनिरुद्ध उसे तीखी नजरो से घूरता है..!!
आनंद: यार ,अब तो मेरी उस लड़की से मिलने का बड़ा मन हो रहा है....such a daring girl....!!
अनिरुद्ध:(कॉफी का कप हल्का सा उठाकर आनंद की तरफ देखते हुए) सोच , अगर ये हॉट कॉफी मैं तेरे मुंह पर फेंक दूं ......तो कैसा लगेगा??
(आनंद की हसी एकदम गायब हो गई..!!)...न न ...मेरा भाई इतना निर्दयी नही है(मासूम चेहरा बनाकर)तू ऐसा नही करेगा।
अनिरुद्ध:(सपाट लहज़े में).... मैं कर सकता हूं..!!
आनंद ने दो मिनट उसकी आंखों में देखा फिर कुर्सी से उठकर(ठीक है...फिर मैं चलता हूं..!!)
दरवाजे तक पहुंचते पहुंचते वह पलटा और मुस्कुराते हुए बोला....वैसे.......गुड नाईट मिस्टर बिगड़े हुए नवाबजादे ..!!
अनिरुद्ध:(चेतावनी भरी आवाज में)नंदू..!!
यह सुनकर आनंद हंसता हुआ अपने रूम की तरफ बढ़ गया। !!
अनिरुद्ध:(आंखे बंद करके,हल्के फ्रस्ट्रेशन में) how dare she talk to me like that....I hope,I never see you again
(वो अपनी चेयर से उठा और रूम में आ गया)
(गुस्से में सही...पर श्रद्धा की याद ने उसे उसकी पुरानी यादों से कुछ पल के लिए निकाल दिया था)
अगली सुबह.....
महेश्वरी मेंशन, लखनऊ.!!
राजेश्वरी जी बगीचे के छोटे छोटे पौधो को पानी दे रही थी....आज उनके चेहरे पर अलग ही चमक थी।
उसी समय पीछे से किसी के कदमों की आहट हुई।।
रजत जी: मां
राजेश्वरी जी:(पीछे मुड़कर) अरे ...!! रजत,आओ!!
रजत जी उनके पास आते हैं....
रजत जी:( मुस्कुराते हुए) आज तो आप बहुत खुश लग रही हैं ,कोई खास बात है??
राजेश्वरी जी हल्की मुस्कान के साथ पास रखी कुर्सी पर बैठ गई रजत जी भी उन्ही के बगल बैठ गए..!!
राजेश्वरी जी:(गहरी सांस लेकर).... हम्म... खुश तो हूं!
रजत जी:(मुस्कान के साथ)लगता है...पोते की सक्सेस का असर है...आखिर उसे इतना बड़ा अवार्ड जो मिला है।
राजेश्वरी जी हल्का सा हस पड़ी।
राजेश्वरी जी: उसकी खुशी तो है ही....लेकिन हमारी खुशी सिर्फ वही नही है..!!
रजत जी: तो क्या बात है मां...??
राजेश्वरी जी की आंखों में कल रात की यादें उतर आई ।
राजेश्वरी जी:कल जन्माष्टमी के कार्यक्रम में एक मंदिर गए थे.... वहां एक लडकी मिली (कुछ पल के लिए वो चुप हो गई) इतनी प्यारी...इतनी मासूम...उसे देख कर एक पल के लिए ऐसा लगा जैसे...जैसे हमारी देविका ही हमारे सामने खड़ी हो..!!(इस वक्त उनकी आंखों में ममता झलक रही थी)
लेकिन "देविका".....ये नाम सुनते ही रजत जी की मुस्कान एक पल में गायब हो गई..!!उनकी आंखे अनायास ही जमीन की ओर टिक गई और चेहरे पर वर्षो पुराना अपराध बोध फिर लौट आया....
राजेश्वरी जी ने बेटे की आंखों में उतरती उदासी पढ़ ली...!!
राजेश्वरी जी:(रजत जी के कंधे पर धीरे से हाथ रखते हुए) कब तक खुद को उसका गुनहगार मानते रहोगे रजत....!!
रजत जी:(धीमी आवाज में) क्योंकि गलती मेरी ही थी मां...!!
राजेश्वरी जी..:(दृढ़ स्वर में) नही.....गलती तुम्हारी नही थी..!! हम आज भी कहते हैं कि जो कुछ भी हुआ ,उसके पीछे सिर्फ ओर सिर्फ वसुंधरा ही थी..!!
रजत जी:(बात काटते हुए) मां प्लीज...वसुंधरा को कुछ मत कहिए....उसके साथ भी मैने गलत किया था..!!
राजेश्वरी जी:(गहरी नजर से रजत को देखते हुए)तुम आज भी वही भूल कर रहे हो रजत....कुछ सच ऐसे होते हैं। जो दिखाई नही देते...लेकिन एक दिन जरूर सामने आते हैं..!!
रजत जी:(बात बदलते हुए)छोड़िए मां...... मैं तो आपको एक अच्छी खबर देने आया था....मैने अनी की अचीवमेंट के लिए एक ग्रैंड पार्टी रखने का फैसला किया है...जिसमे बड़े बड़े लोगो को इनवाइट कर रहा हूं.....आखिरी हमारे अनी ने हमारा नाम रोशन किया है।।
राजेश्वरी जी:(मुस्कुराते हुए)...बहुत अच्छा किया...लेकिन कब आ रहे हैं दोनो???
रजत जी...अभी पता नही मां...ऑफिस जाके उन्हे कॉल करता हूं..!!(अपने हाथ की घड़ी देखते हुए) ठीक है ।। मैं चलता हूं मां... ऑफिस के लिए लेट हो रहा है....!!
राजेश्वरी जी: ठीक है बेटा ...अपना ध्यान रखना.!!
रजत जी: जी
रजत जी राजेश्वरी जी के पैर छूते हैं और वहां से चले जाते हैं..!!
उनके जाते ही.... राजेश्वरी जी की मुस्कान धीरे धीरे फीकी पड़ गई...
राजेश्वरी जी:(आसमान की ओर देखते हुए और मन ही मन बुदबुदाई)....हम पूरी सच्चाई भले न जानते हो लेकिन..... इतना विश्वास आज भी है कि हमारी परिवार की जिंदगी में जो तूफान आया था उसकी जड़ कहीं न कहीं वसुंधरा ही थी...!!(राजेश्वरी जी कुछ सोचने लगती हैं)
शाम का समय....
केशवनगर सोसाइटी.....श्रद्धा का घर.....
श्रद्धा अपने रूम में अपने बेड पर बैठी थी उसके आगे एक पिलो के उपर लैपटॉप खुला हुआ था...और वो काफी देर से उसी लैपटॉप में व्यस्त थी...!!
तभी रूम में ....पार्थ आता है....!!!
पार्थ:(श्रद्धा को देखकर) दिदू....!!
श्रद्धा:(स्क्रीन में ही नजरे गड़ाए हुए) हम्म...क्या है..??
पार्थ:(श्रद्धा के बिल्कुल पास खड़ा होके) लैपटॉप दो ना.... कार्टून देखना है..!!
श्रद्धा:(उसकी ओर देखते हुए) अच्छा....?? होम वर्क कंप्लीट??
पार्थ एक पल के लिए अटक गया...
पार्थ: वो....वो .... दिदू...
श्रद्धा: हम्म....बोलो..!!
पार्थ: हो जायेगा....थोड़ा सा ही बचा है(उसने हाथ से थोड़ा सा का इशारा किया)
श्रद्धा: अच्छा....थोड़ा सा?? पहले होमवर्क कंप्लीट करो....फिर कार्टून देखना..!!
पार्थ:(मासूम चेहरा बनाकर)... दिदू प्लीज ...!!
श्रद्धा:(आंखे दिखाते हुए)... पार्थ..!!
पार्थ: अच्छा लैपटॉप न सही....फोन ही दे दो..!!
श्रद्धा: मां को बुलाऊं ..!!
पार्थ:(मुंह फुलाकर)...ठीक है ...जा रहा हूं..
वो जाने को पलटा ही था की कमरे में प्रीति आती हुई दिखती है....प्रीति:क्या चल रहा है??
प्रीति:(पार्थ का फूला हुआ मुंह देखकर) और जनाब....ये गुब्बारे जैसा मुंह क्यों फूला रखा है..??
पार्थ:(शिकायत करते हुए) देखो ना दीदी.....
दीदू...फोन नही दे रही..!!
श्रद्धा: क्योंकि...अभी साहब का होमवर्क कंप्लीट नही हुआ है..!!
प्रीति:(हंसते हुए अपना फोन आगे करते हुए)..लो मेरा फोन ले लो...
श्रद्धा...अरे..!!
प्रीति: लेकिन बस 15 मिनट...!!
पार्थ:(खुश होकर ...फोन लेकर)...ओके दीदी...थैंक यू..!!
पार्थ ने श्रद्धा को शरारत में जीभ दिखा कर भाग गया..!!
श्रद्धा: पार्थ...(लेकिन तब तक पार्थ जा चुका था)...प्रीति हस देती है..!!
श्रद्धा: क्या है ये..??
प्रीति: अरे जाने दे ना...बस 15 मिनट की तो बात है...वैसे भी हर वक्त पढ़ाई की टेंशन नही लेनी चाहिए..!! मैं भी पढ़ाई की टेंशन कभी नही लेती थी...पर हर साल पास हो जाती थी..!!
श्रद्धा:(मुस्कुराते हुए)...कैसे होती थी...वो मुझे अच्छे से पता है...
प्रीति :हां...थोड़े नंबर ही तो कम होते थे बस..
श्रद्धा:(हंसते हुए)थोड़े???
प्रीति:(उसे घूर कर देखती है).. हां...ठीक है.. ठीक है...अब छोड़ (बिस्तर से पिलो उठाकर अपने उपर रखकर बेड पर बैठते हुए)...कर क्या रही है...??
श्रद्धा:(लैपटॉप स्क्रीन को उसकी ओर करते हुए)...कुछ कंपनियों में जॉब के लिए अप्लाई कर रही थी..!!!
प्रीति:ओह... अच्छा!!
श्रद्धा: हम्म...अब देखो कहा लेके जाती है किस्मत ..!!
प्रीति:मुझे पूरा विश्वास है की तुझे अच्छी कंपनी में ही जॉब मिलेगी।
श्रद्धा उसकी बात सुनकर मुस्कुरा देती है..!!
प्रीति: हो गया न तेरा...
श्रद्धा: हां
प्रीति: तो चल ना यहीं पास में घूम कर आते हैं...घर पर बैठे बैठे बोर हो रही हूं..!!
श्रद्धा:अच्छा ठीक है एक मिनट रुक...
श्रद्धा लैपटॉप बंद करती है और उठकर उसे मेज पर रखती...
श्रद्धा: चलो...
प्रीति: चलो....
दोनो रूम से बाहर निकल जाती हैं..!!!
आज के लिए बस इतना ही ...आगे जानने के लिए पढ़ते रहिए
आशिकी.....अब तुम ही हो।
राधे राधे 😊🙏....!!