Aashiqui - 9 in Hindi Drama by vaishnavi Shukla books and stories PDF | आशिकी.....अब तुम ही हो। - 9

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आशिकी.....अब तुम ही हो। - 9

अब तक आपने पढ़ा...

की श्रद्धा एक कुत्ते के बच्चे को बचाने के लिए अनिरुद्ध की कार के आगे आ जाती है जिसकी वजह से उन दोनो के बीच बहस हो जाती है।

अब आगे....

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अध्याय:9

श्रद्धा: आप मुझे stupid कैसे बोल सकते हैं..!मैने जो किया इंसानियत के नाते किया।।

अनिरुद्ध उसकी तरफ देखता और हल्का सा हसता है।

अनिरुद्ध:(श्रद्धा से)इंसानियत और स्टूपिडी में केवल एक thin line होती है।

अनिरुद्ध की यह बात सुनकर अपनी बड़ी बड़ी आंखों से घूरती है। उसके लिए अब पानी सिर से ऊपर जा चुका था।

श्रद्धा:(थोड़ी तेज आवाज में) अरे...! अजीब इंसान है आप , एक तो खुद इतनी तेज स्पीड में कार चला रहे थे ..और उपर से मुझे बेवकूफ बोल रहे हैं।...(थोड़ी देर रुक कर) अगर इतना ही शौक़ है गाड़ी उड़ाने का तो हवाई जहाज क्यों नही खरीद लेते ...कम से कम लोग तो सुरक्षित रहेंगे।

अनिरुद्ध श्रद्धा की तेज आवाज सुनकर गुस्से में घूरता है...(दांत भीचते हुए) आवाज नीची रखो ..तुम नही जानती .. मैं कौन हूं...!!!

श्रद्धा:(उसी लहजे में)अरे होंगे किसी अमीर पिताजी की बिगड़ी हुई संतान...!!जिसकी नजरों में किसी की जान की कोई कीमत नहीं ।

(एक नजर अनिरुद्ध को घूरकर फिर अपनी गोद में लिए कुत्ते के बच्चे को देखती है और उसका सिर सहलाने लगती है।)

अनिरुद्ध गुस्से में अपनी मुट्ठियां भीचता है। तभी उसकी नजर श्रद्धा की चोट पर जाती है।

अनिरुद्ध लंबी सांस छोड़ कर अपने वॉलेट से कुछ पैसे निकालता है।

अनिरुद्ध:(श्रद्धा से) I don't have time to listen your nonsense...(पैसे उसके सामने करते हुए)..ये  लो ...अपनी चोट का इलाज करवा लेना...!!

(श्रद्धा पहले पैसों को देखती है फिर अनिरुद्ध को )

(अनिरुद्ध पैसे श्रद्धा के हाथ में पकड़ाता है और अपनी कार की ओर बढ़ जाता है ।)

श्रद्धा:(गुस्से में) सुनिए मिस्टर..बिगड़े हुए नवाबजादे..!!

(अनिरुद्ध यह सुनकर पीछे मुड़ता है।)

श्रद्धा:(उसके पास आकर) ये लीजिए अपने पैसे..!(पैसे उसके हाथ में देते हुए) और अपनी अमीरी में अंधी हुई आंखो का इलाज करवा लीजिएगा ताकि सामने से आ रहे लोग आपको साफ साफ दिखाई दे।

अनिरुद्ध: व्हाट???

श्रद्धा: हे कान्हा जी..!!(लगभग चिढ़ाते हुए) आंखो के साथ साथ कान भी खराब है.. च् च् च्..!!

अनिरुद्ध:(गुस्से में) यू ...!!!

(फिर गुस्से को किसी तरह कंट्रोल करता हुआ कार की ओर बढ़ जाता है।)

(कार की डोर पर आकर ) अनिरुद्ध:(गुस्से में) Pray to your GOD that we never meet again.

(और कार में बैठ जाता है।)

श्रद्धा:मुझे भी कोई शौक नही है...आप जैसे अकडू इंसान से दुबारा मिलने का..!!(अनिरुद्ध गुस्से में अपनी कार आगे बढ़ा देता हैं।)

तभी श्रद्धा का फोन बजता है... श्रद्धा पप्पी को संभालते हुए बैग से फोन निकालती है।

श्रद्धा:हेलो प्रीति..!!

प्रीति: कहा रह गई यार..!!

श्रद्धा: अरे यार...!!छोटी सी प्रॉब्लम हो गई थी यहां।

प्रीति:(हल्का चौक कर) प्रॉब्लम??(थोड़े फिक्र से) क्या हुआ?? तू ठीक तो है न...!!

श्रद्धा: हां हां मैं ठीक हूं..!!मुझे कुछ नही हुआ...!

प्रीति: तो क्या प्रॉब्लम हो गई ??

श्रद्धा:तुझे सामने से बताऊंगी!

प्रीति: ठीक है जल्दी आ ... यहां सजावट का सारा सामान आ गया है।

श्रद्धा: हम्म...ठीक है!(फोन रख देती है।)

श्रद्धा:(उस छोटे से पप्पी से) चलो...तुम्हे किसी safe जगह पर छोड़ देती हूं..!!

(और श्रद्धा छोटे से पप्पी का सिर सहलाते हुए मार्केट की ओर बढ़ जाती है।)

कुछ देर बाद .... अनिरुद्ध वहा पहुंचता है जहा दिल्ली जाने के लिए चॉपर रेडी था। दरवाजा खुलता है और अनिरुद्ध बाहर आता है। वही थोड़ी दूरी पर आनंद खड़ा था जो जेब में हाथ डाले ,उसी का इंतजार कर रहा था!!

आनंद:(हल्के शिकायत भरे लहजे में) लेट होना था... तो मुझे इतनी जल्दी क्यों बुलाया ?? कम से कम मैं अपनी नींद तो पूरी कर लेता!!

अनिरूद्ध बिना बोले उसे घूरता है।

आनंद:(उसे देख कर मन में) लगता है गुस्से में है ।।।वो तो हमेशा रहता है...!!आनंद बेटा तू कुछ न ही बोल तो ही अच्छा है वरना आज पक्का पिटेगा,!!

आनंद:(हल्का हस्ते हुए) it's ok...!!हो जाता है कभी कभी लेट..!! अभी चलते है!!

अनिरूद्ध बिना जवाब दिए आगे बढ़ जाता है और पीछे पीछे आनंद भी चल देता है।

दोनो चॉपर के अंदर बैठते है।। चॉपर धीरे धीरे जमीन से ऊपर उठता है और दिल्ली की ओर बढ़ जाता है।

इधर : मंदिर का दृश्य, चारों तरफ फूलों की खुशबू फैली हुई थी , कुछ लोग सजावट के काम में लगे हुए थे।

तभी श्रद्धा मंदिर पहुंचती है और देखती है मंदिर में कार्यक्रम की तैयारियां शुरू हो चुकी है।

तभी पीछे से प्रीति को आवाज आती है।

प्रीति:(थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए) कहा रह गई थी यार...!! कब से इंतजार कर रही हूं ।

अचानक से रुक जाती उसकी नजर श्रद्धा के हाथ पर लगी चोट पर जाती है।

प्रीति:(श्रद्धा के पास आकर फिक्र भरे लहजे में) ये क्या है???ये चोट कैसे लगी तुझे???

श्रद्धा: अरे कुछ नही यार...!!!छोटी सी चोट है ...बस।

प्रीति:(भौंहे चढ़ाते हुए) छोटी सी??? पर लगी कैसे???

श्रद्धा धीरे धीरे पूरी बात बताती हैं की कैसे एक छोटे से कुत्ते के बच्चे को बचाते हुए उसे  चोट लगीं और फिर कार वाले आदमी से उसकी बहस हो गई ।

प्रीति:(गुस्से में) अच्छा...तो ये थी तेरी "छोटी सी प्रॉब्लम" जिसकी बात तू फोन पर कर रही थी। तूने तो उसे ऐसे ही छोड़ दिया । मैं होती ना.... उसका मुंह ही तोड़ देती ..!! उसकी वजह से तुझे चोट लग गई।

(श्रद्धा उसकी बात सुनकर हस देती है)

श्रद्धा:(हंसते हुए) शांत हो जाओ ...देवी जी..!! कुछ नही हुआ है मुझे !! चल अब.....काम भी तो शुरू करना है..!!

प्रीति गहरी सांस लेती है और सिर हिलाती है।।

प्रीति: हम्म ,चल!!

(दोनो फिर से सजावट और बाकी तैयारियों में लग जाती है।)

कुछ देर बाद....

चॉपर धीरे धीरे दिल्ली की जमीन पर उतरता है । तेज हवा के साथ उसके ब्लेड्स घूमते है।और फिर सब शांत हो जाता है।

अनिरुद्ध और आनंद बाहर निकलते है उनके सामने पहले ही एक luxurious car खड़ी थी।

दोनो बिना समय गवाए अंदर बैठ जाते है। जैसे ही दरवाजा बंद होता है, ड्राइवर तुरंत कार आगे बढ़ा देता है।

कार के अंदर...!!

आनंद हल्के से अनिरुद्ध की तरफ देखता है...उसके चेहरे पर curiosity साफ झलक रही थी।

आनंद: Ani...एक बात पूछूं???

अनिरुद्ध उसकी तरफ देखता है__ठंडी , सीधी नजर।

आनंद:(थोड़ा संभलते हुए) अरे यार....बस ये पूछ रहा था कि...तू late कैसे हो गया ???

(अनिरुद्ध की आंखो में हल्का गुस्सा उभर  आता है।)

अनिरुद्ध: (दबी हुई झुंझलाहट में) उस स्टूपिड लड़की की वजह से...(आनंद एकदम से चौंक जाता है।)

आनंद:लड़की???तुझे कोई लड़की मिली थी क्या???

अनिरुद्ध: हम्म , एक स्टूपिड लड़की...!!एक कुत्ते को बचाने के लिए मेरी कार के सामने आ गई थी।

आनंद:(हल्की सी फिक्र में) क्या??वो लड़की ठीक तो है न..!!

अनिरुद्ध उसे घूर कर देखता है।

आनंद : अरे मतलब..उसे कुछ हुआ तो नही ?? वरना मामला बड़ा हो जाता ना..!!(मन में) हास..! बच गया..!!

अनिरुद्ध:(थोड़ा शांत लेकिन सख्त) नही... ठीक है। बस हल्की चोट आई थी।

आनंद:तो उसका इलाज कराया!!??

(अब अनिरुद्ध का गुस्सा फिर से बढ़ जाता है।)

अनिरुद्ध:(तेज आवाज में)..पैसे दिए  थे मैने...!!लेकिन पता नही किस बात का attitude था उसमें ...मुझे.... अनिरुद्ध सिंह महेश्वरी को ....सुना के चलीं गई।(दांत भींच कर ) कभी फिर मिली न...छोड़ूंगा नही उसे!!

(आनंद कुछ सेकंड उसे देखता है फिर हल्का सा हंस देता है..!!)

आनंद:(मुस्कुराते हुए) अच्छा...!! तुझे सुना के चली गई ? तब तो कुछ खास बात है उस लड़की में।

(अनिरुद्ध उसे खतरनाक नजर से घूरता है।)

आनंद:(तुरंत बात पलटता है।) अरे...मेरा मतलब __ऐसे कैसे सुना  गई तुझे??

(फिर धीरे से, शरारती अंदाज में) वैसे दिखती कैसी थी??

अनिरूद्ध:(गुस्से में) एक और बकवास की ना तो... इसी चलती कार से नीचे फेंक दूंगा।

आनंद:(जल्दी से) अरे भाई.!! गुस्सा क्यों होता है, मैं तो ऐसे  ही पूछ रहा था..!!

अनिरुद्ध:(ठंडे लहजे में) Now..sut your mouth !!

(आनंद तुरंत चुप हो जाता है।)

अनिरुद्ध गुस्से में अपना चेहरा दूसरी तरफ मोड़कर बाहर देखने लगता है! पर आनंद की बात सोचकर उसके दिमाग में वही दृश्य घूम जाता है..!!

श्रद्धा,जमीन पर बैठी , अपने हाथो में उस छोटे से कुत्ते से बच्चे को संभाले हुए धीरे धीरे उसके सिर पर हाथ फेर रही थी और हल्के से मुस्कुरा रही थी ..!! उसकी वो सच्ची , मासूम मुस्कान.....

एक पल के लिए अनिरुद्ध का गुस्सा जैसे थम सा जाता है..!!उसकी आंखो की सख्ती नरम पड़ती जाती है।

फिर अचानक.......!!!

वो खुद को झटकता है...!!!

अनिरूद्ध:(मन में ही थोड़ी चिढ़ के साथ) क्या  बकवास है ये..!!!

वो अपनी आंखे बंद कर लेता है....और सीट से सिर टिकाकर बैठ जाता है।

कार अपनी रफ्तार से आगे बढ़ती रहती है।

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आज बस इतना ही ...आगे जानने के लिए पढ़ते रहिए .....

आशिकी.....अब तुम ही हो!!

राधे राधे😊🙏