🔥🌸🌸 हुक्म और हसरत 🌸🌸🔥
#ArSia 🖤🌸
और तभी...
एक धीमी मगर गूँजती हुई आवाज़ पीछे से आई—
"मैं यहीं हूँ…" 🖤
अर्जुन।
वो हमेशा की तरह शांत खड़ा था। सफ़ेद शर्ट के कॉलर हल्के-से मुड़े हुए थे, कलाई पर घड़ी, चेहरे पर वही सुकून... और होंठों पर एक छोटी-सी मुस्कान।✨
सिया 🌸 की साँस जैसे थम गई।
उसने अर्जुन 🖤 की तरफ़ बस एक पल देखा...
फिर दो कदम पीछे हटी...
और अगले ही पल भागती हुई वहाँ से निकल गई।
उसके कदमों की आहट धीरे-धीरे गलियारे में खो गई...
मगर उसकी धड़कनों का शोर अब भी अर्जुन के कानों तक पहुँच रहा था। 💓
अर्जुन वहीं खड़ा मुस्कुरा रहा था।
शायद पहली बार...
किसी की घबराहट उसे इतनी प्यारी लगी थी। 🤍
"अर्जुन भाई... ये क्या था?" 😳
रोशनी ✨ ने माथे पर शिकन लाते हुए पूछा।
अर्जुन ने उसकी तरफ देखा, कंधे उचकाए और हमेशा की तरह ठंडे स्वर में बोला—
"कुछ भी नहीं, रोशनी।"
बस इतना कहकर वह वहाँ से चला गया।
पीछे छोड़ गया—
एक भागती हुई राजकुमारी... 🌸
एक उलझी हुई बहन... ✨
और एक ऐसा राज़...
जो अब दिलों में छिपे रहना नहीं चाहता था। ❤️🩹
━━━━━━━━━━━━━━
कुछ दिन तक सिया 🌸 जानबूझकर अर्जुन 🖤 से बचती रही।
हालाँकि अगले दिन अर्जुन ने कुछ भी अजीब नहीं किया...
जैसे उस दिन हुआ ही कुछ न हो।
धीरे-धीरे सब सामान्य होने लगा।
लेकिन...
सिर्फ़ ऊपर से।
अंदर ही अंदर दोनों के दिलों में कुछ बदल चुका था। 💙
फ्लोरेंस का मंच अब भी सिया की यादों में ताज़ा था।
कभी वही मंच उसका सबसे बड़ा डर था...
लेकिन आज वही उसकी सबसे बड़ी ताक़त बन चुका था।
अब हर सुर उसे यह एहसास दिलाता था कि—
"मैं सिर्फ़ राजकुमारी नहीं हूँ..."
"मैं एक कलाकार हूँ..."
"और अब मैं अपने सुरों को कभी मरने नहीं दूँगी।" ❤️
राजा साहब से उसने अब तक पियानो की बात नहीं की थी...
लेकिन अब उसके भीतर डर की जगह आत्मविश्वास ने ले ली थी।
रात को जब पूरा महल शांत हो जाता...वह अपने कमरे में बैठकर पियानो बजाती।
हर धुन के साथ जैसे उसके भीतर के डर पिघलते चले जाते।
और...
दरवाज़े के ठीक बाहर...
अर्जुन 🖤 बिना कुछ कहे खड़ा रहता।
वह हर सुर को उतनी ही शांति से सुनता...
जैसे सिया पियानो नहीं...
अपने टूटे हुए डर को सुरों में बदल रही हो।
उसके चेहरे पर अनजाने में एक हल्की मुस्कान आ जाती...
जिसे शायद वह खुद भी महसूस नहीं कर पाता।
━━━━━━━━━━━━━━
उसी समय...
अर्जुन अपने कमरे में था...
जब मीरा अंदर आई।
उसने बिना कुछ कहे एक फाइल उसकी ओर बढ़ा दी।
"Vikrant Malhotra — Behind The Mask."
अर्जुन ने फाइल खोली।
अंदर एक-एक कर कई राज़ सामने आने लगे—
• फर्ज़ी कंपनियों के नाम।
• काले धन का निवेश।
• विदेशी ट्रांसफर की ईमेल रिकॉर्डिंग।
• और एक ऐसी तस्वीर...
जिसमें विक्रांत, सिया के पिता के बिज़नेस राइवल्स के साथ बैठा था।
अर्जुन की मुट्ठियाँ अनायास कस गईं।
उसकी आँखों की ठंडक अब और गहरी हो चुकी थी।
उसने फाइल बंद की।
और बेहद धीमी आवाज़ में कहा—
"अब खेल मैं खेलूँगा..."
"...लेकिन अपने नियमों से।" 🖤🔥
━━━━━━━━━━━━━━
जयगढ़ से लगभग 300 किलोमीटर दूर...
एक गुप्त ठिकाना।
कमरे में हल्की रोशनी थी।
सामने बैठा वही रहस्यमयी आदमी अपने iPad पर लगातार सिया 🌸 की तस्वीरें देख रहा था।
इस बार उसका चेहरा पहले से थोड़ा साफ़ दिखाई दे रहा था।
महँगा सूट...
गोरा रंग...
तेज़ निगाहें...
और उम्र...
सिया से लगभग दोगुनी।
उसने स्क्रीन पर उँगली फेरते हुए धीमे से मुस्कुराया।
उसका सहायक चुपचाप उसके सामने खड़ा था।
कुछ पल बाद उसने बिना नज़र हटाए कहा—
"वक्त आ गया है..."
सहायक ने सिर झुका दिया।
वह आदमी धीरे से उठा...
खिड़की के पास जाकर बाहर देखने लगा।
फिर बोला—
"अब खेल अगले दौर में जाएगा..."
"इस बार राजकुमारी खुद चलकर वहाँ पहुँचेगी..."
"...जहाँ मैं चाहता हूँ।" 😈🔥
उसकी आँखों में एक खतरनाक चमक उभर आई।
कमरे में फिर से सन्नाटा छा गया।
************************************
उसी रात...
महल के पीछे बनी शांत बालकनी में अर्जुन 🖤 अकेला खड़ा था।
रात की ठंडी हवा उसके चेहरे को छू रही थी।
तभी पीछे से हल्के कदमों की आहट हुई।
सिया 🌸 हाथ में दो गर्म कॉफ़ी के मग लिए उसकी ओर बढ़ी।
उसने बिना कुछ कहे एक मग अर्जुन की तरफ बढ़ा दिया।
अर्जुन ने उसकी ओर देखा...फिर कॉफ़ी ले ली।
कुछ पल दोनों के बीच सिर्फ़ ख़ामोशी थी।
हवा चल रही थी...
और दूर कहीं झींगुरों की आवाज़ सुनाई दे रही थी।
सिया ने चुपके से अर्जुन को देखा।
"तुम्हें देखकर... ऐसा लगा जैसे कोई सपना पूरा हो गया।"
ये शब्द उसके होंठों तक नहीं आए...
बस उसके दिल में ही रह गए।
अर्जुन जैसे उसकी खामोशी भी पढ़ लेना सीख चुका था।
वह धीमे से बोला—
"और तुम्हें देखकर..."
वह कुछ पल रुका।
"...लगता है जैसे फिर से सबकुछ खोने से डरने लगा हूँ।"
सिया ने हैरानी से उसकी ओर देखा। 👀
उसने तुरंत अपनी नज़रें आसमान की तरफ फेर लीं।
उसका दिल फिर वही अजीब-सी धड़कन महसूस करने लगा। 💓
इस बार अर्जुन ने उसे गहराई से देखा।
उसके होंठ कुछ कहना चाहते थे...
मगर आदत के मुताबिक़ ख़ामोश रह गए।
मन ही मन बस एक ही बात गूँजी—
"काश... मैं सिर्फ़ तुम्हारा अंगरक्षक न होता..." 🖤
उसने नज़रें झुका लीं।
कभी-कभी ख़ामोशी...
इकरार से भी ज़्यादा बोल जाती है। 🤍
---
इधर...
रोशनी ✨ कई दिनों से सोच रही थी कि आरव को महल बुलाए।
उसकी मासूमियत...सरलता...और आँखों की सच्चाई...
कुछ तो था उसमें...जो बाकी सबसे अलग था।
कॉलेज के बाद उसने मुस्कुराकर कहा—
"कल मेरे घर आना... कुछ खास है।" 😊
आरव ने बिना ज़्यादा पूछे हामी भर दी।
अगले दिन...
जैसे ही आरव महल के मुख्य द्वार पर पहुँचा...
उसने सामने फैली राजसी भव्यता को देखा।
ऊँची-ऊँची दीवारें...शानदार फव्वारे...
सुरक्षा गार्ड्स...
और भीतर तक जाती लंबी सड़क।
अनजाने में उसने एक गहरी साँस ली।
उसे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था...
कि इस महल के भीतर सिर्फ़ रोशनी ही नहीं...
बल्कि उसका अतीत भी उसका इंतज़ार कर रहा था।
तभी सामने से रोशनी ✨ आई।
लेकिन आज...
वो कॉलेज वाली रोशनी नहीं थी।
राजसी परिधान...शाही आभा...
और चेहरे पर वही मासूम मुस्कान।
आरव कुछ पल उसे देखता ही रह गया।
"तुम... राजकुमारी हो?" 😳
रोशनी हल्का-सा मुस्कुराई।
"मैंने कभी बताया नहीं..."
"क्योंकि मैं तुम्हारे लिए 'राजकुमारी' नहीं बनना चाहती थी..."
"मैं सिर्फ़ रोशनी रहना चाहती थी।" ❤️
आरव की मुस्कान और गहरी हो गई।
---
महल के विशाल हॉल में...
सिया लाल साड़ी में मेहमानों से बातें कर रही थी।
रोशनी आरव को लेकर उसके पास पहुँची।
"दीदी... ये हैं आरव। मेरे दोस्त।"
सिया मुस्कुराई। 🌸
उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया।
"स्वागत है, आरव।"
आरव ने भी मुस्कुराकर हाथ मिलाया।
"आपका फ्लोरेंस वाला पियानो परफॉर्मेंस देखा था..."
"सच कहूँ... बहुत खूबसूरत था।"
सिया हैरानी से उसे देखने लगी।
"तुम्हें कैसे पता?"
रोशनी धीरे से बोली—
"दीदी... मैंने बताया था।" 😊
सिया मुस्कुरा दी।
"धन्यवाद..."
"शायद मेरी सबसे सच्ची मुस्कान वहीं निकलती है।" 🤍
उसी समय...
हॉल का माहौल जैसे अचानक बदल गया।
अर्जुन 🖤 अंदर आया।
ब्लैक शर्ट...गहरी आँखें...
और वही सख़्त चाल।
सिया ने उसकी ओर देखते हुए कहा—
"आरव... ये हैं अर्जुन। हमारे सिक्योरिटी हेड।"
"हाय... मैं आरव।"
आरव ने हाथ आगे बढ़ाया।
अर्जुन ने भी हाथ मिलाया।
लेकिन...उनकी पकड़ सामान्य थी...
उनकी निगाहें नहीं। 👀
एक पल के लिए ऐसा लगा...
जैसे दोनों एक-दूसरे को पहचान चुके हों।
मगर अगले ही पल...
दोनों के चेहरे बिल्कुल सामान्य हो गए।
"तुम दोनों एक-दूसरे को जानते हो?"
सिया ने उत्सुकता से पूछा।
"नहीं।"
दोनों ने एक साथ जवाब दिया।
कमरे में एक पल के लिए अजीब-सी ख़ामोशी छा गई।
झूठ...
लेकिन क्यों?
आरव ने धीरे से अर्जुन की तरफ देखा।
"क्या हम पहले मिल चुके हैं?"
अर्जुन की आवाज़ हमेशा की तरह शांत थी।
"शायद नहीं।"
सिया दोनों को बारी-बारी से देखती रही।
उसे साफ़ महसूस हो रहा था...
कि दोनों कुछ छिपा रहे हैं।
लेकिन क्या...?
---
उसी समय...
महल के हर कैमरे की लाइव फीड...
किसी अज्ञात जगह पर बैठे एक शख्स के लैपटॉप तक पहुँच रही थी।
उसने स्क्रीन पर उँगलियाँ फेरीं।
उसके होंठों पर संतुष्टि भरी मुस्कान उभरी।
"सब कुछ अब सही जगह पर है..."
"अब सिर्फ़ एक चाल बाकी है।" 😈
स्क्रीन पर ज़ूम करते हुए उसकी उँगलियाँ सिया 🌸 और अर्जुन 🖤 की तस्वीर पर ठहर गईं।
धीरे-से उसने फुसफुसाया—
"Target Locked." 🔥
---
उधर...
महल की लाइब्रेरी में विक्रांत बैठा था।
सामने अर्जुन 🖤 आकर रुका।
दोनों की निगाहें टकराईं।
हवा जैसे अचानक भारी हो गई।
विक्रांत मुस्कुराया।
"राजकुमार बनकर आए हो..."
"...लेकिन घाव देकर जाओगे।"
अर्जुन की आँखों में वही ठंडापन था।
"और तुम क्या हो?"
विक्रांत हँसा।
"एक बॉडीगार्ड... या कुछ और?"
अर्जुन उसके बिल्कुल करीब आया।
उसने विक्रांत के कंधे पर हाथ रखा।
आवाज़ धीमी थी...
लेकिन शब्द किसी चेतावनी से कम नहीं।
"याद रखना, विक्रांत..."
"शिकार बनने से पहले शिकारी भी एक बार ज़रूर मुड़कर देखता है..."
"और जब मैं मुड़ता हूँ..."
"...कोई बचता नहीं।" 🔥🖤
पहली बार...
विक्रांत की मुस्कान फीकी पड़ गई।
******************
रात गहरा चुकी थी...
महल की बालकनी में सिया 🌸 अकेली बैठी थी।
ठंडी हवा उसके खुले बालों को बार-बार छू रही थी।
कुछ ही देर में अर्जुन 🖤 भी वहाँ आकर चुपचाप खड़ा हो गया।
दोनों कुछ देर तक बिना कुछ कहे सामने फैले अँधेरे को देखते रहे।
आख़िरकार सिया ने ही ख़ामोशी तोड़ी—
"आज... तुम आरव से कुछ अजीब तरह से मिले।"
वह धीरे से उसकी ओर मुड़ी।
"क्या तुम उसे जानते हो?"
अर्जुन कुछ पल चुप रहा।
फिर बेहद शांत आवाज़ में बोला—
"कभी-कभी... अजनबी ही सबसे ज़्यादा जानकार होते हैं।"
सिया हल्का-सा मुस्कुराई।
"और कभी-कभी..."
"...सबसे अपने ही सबसे दूर निकल जाते हैं।"
अर्जुन ने उसकी ओर देखा...
लेकिन कुछ नहीं बोला।
उसकी आँखों में जैसे कोई पुराना ज़ख्म फिर से जाग उठा था।
कोई अधूरा रिश्ता...
कोई दबा हुआ सच...
शायद कोई टूटा हुआ भा.....
उसी पल...
पूरे महल में अचानक अजीब-सा सन्नाटा छा गया।
अगले ही क्षण—
पूरी हवेली की लाइटें एक साथ गुल हो गईं।
चारों तरफ़ अँधेरा फैल गया।
कहीं दूर किसी की घबराई हुई आवाज़ सुनाई दी।
महल में हलचल मच गई।
तभी...
सीढ़ियों के पास से किसी परछाई को तेज़ी से भागते हुए अर्जुन ने देख लिया।
उसने बिना एक पल गंवाए अपनी पिस्टल निकाल ली।
"यहीं रहना!"
बस इतना कहकर वह बिजली की रफ़्तार से उस परछाई के पीछे दौड़ पड़ा।
सिया का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा।
पूरा महल अँधेरे में डूब चुका था।
कुछ पल के लिए ऐसा लगा जैसे समय ही ठहर गया हो।
"दीदी..." रोशनी ✨ घबराकर सिया 🌸 के पास आ गई।
महल के कर्मचारी इधर-उधर भागने लगे।
तभी अर्जुन 🖤 ने तेज़ आवाज़ में कहा—
"कोई अपनी जगह से नहीं हिले!" 🔥
उसकी आवाज़ पूरे महल में गूँज उठी।
"गार्ड्स! सभी एंट्रेंस और एग्ज़िट तुरंत सील करो। कोई भी महल से बाहर या अंदर नहीं जाएगा!"
"जी, सर!" सभी सुरक्षा कर्मी एक साथ बोले।
अर्जुन ने अपनी टॉर्च जलाई।
उसकी तेज़ नज़रें महल के हर कोने को बारीकी से परख रही थीं।
अचानक...
सीढ़ियों के मोड़ पर किसी साये की हल्की-सी झलक दिखाई दी।
"कौन है वहाँ?"
कोई जवाब नहीं आया।
बस तेज़ी से भागते कदमों की आवाज़ सुनाई दी।
अर्जुन बिना देर किए उसी दिशा में दौड़ पड़ा।
सिया का दिल घबराहट से भर उठा।
"अर्जुन..." उसने अनजाने में फुसफुसाया। 🥺❤️
---
उधर...
महल के पिछले हिस्से में अर्जुन हर कमरे की जाँच कर रहा था।
एक-एक खिड़की...
हर दरवाज़ा...
हर रास्ता...
सब कुछ सामान्य दिख रहा था।
लेकिन...कुछ तो ग़लत था।
उसकी अनुभवी नज़र बार-बार उसी एहसास पर लौट रही थी।
वह इलेक्ट्रिकल कंट्रोल रूम तक पहुँचा।
मुख्य स्विच ऑन था।
बकअप जनरेटर भी ठीक चल रहा था।
फिर...पूरे महल की बिजली एक साथ कैसे चली गई? ⚠️
अर्जुन ने स्विच बोर्ड पर हाथ फेरा।
उसे एक बहुत पतली-सी खरोंच दिखाई दी।
जैसे किसी ने जानबूझकर उसके साथ छेड़छाड़ की हो।
उसकी आँखें सिकुड़ गईं। 👀
"ये हादसा नहीं था..."
"...किसी ने जानबूझकर किया है।" 🔥
उसी समय उसका वायरलेस बज उठा।
"सर! बिजली वापस आ गई है।"
"मैं आता हूँ।"
अर्जुन ने एक आख़िरी बार पूरे कमरे पर नज़र डाली...
फिर वापस महल की ओर बढ़ गया।
उसे क्या पता था...
कि जिस समय उसकी नज़रें अँधेरे में उस परछाई का पीछा कर रही थीं...
उसी समय...
महल के मुख्य द्वार से एक नया कर्मचारी अंदर दाख़िल हो चुका था।
सिर झुकाए...हाथ में स्टाफ़ का छोटा-सा बैग...चेहरे पर मासूमियत...और आँखों में छिपा एक ख़तरनाक मक़सद।
आकाश। 😈
उसने चुपचाप बाकी कर्मचारियों के साथ कदम मिला दिए।
न किसी ने उससे सवाल किया...
न उसने किसी की तरफ़ देखा,यही तो उसकी सबसे बड़ी ताक़त थी—
भीड़ में रहकर भी अनदेखा रह जाना।
---
कुछ ही देर बाद बिजली वापस आ गई।
महल में धीरे-धीरे सब सामान्य होने लगा।
रानी माँ 👑 सिया 🌸 के पास आईं और उसके चेहरे को दोनों हाथों में थाम लिया।
"तुम ठीक हो ना, बेटा?" 🥺
सिया ने मुस्कुराने की कोशिश की।
"जी, माँ साहिबा... मैं बिल्कुल ठीक हूँ।"
राजा साहब भी उनके पास आ गए।
उनकी नज़र पूरे हॉल का जायज़ा ले रही थी।
"सिक्योरिटी पहले से दोगुनी कर दी जाए।"
"आज जो हुआ... दोबारा नहीं होना चाहिए।"
"जी, राजा साहब।" गार्ड्स ने सिर झुका दिया।
रोशनी ✨ ने धीरे से आरव की तरफ़ देखा।
"डर गए थे?" 😊
आरव हल्का-सा मुस्कुराया।
"सच कहूँ... थोड़ी देर के लिए लगा था जैसे किसी फिल्म में आ गया हूँ।"
रोशनी हँस पड़ी। 😂
"हमारे महल में आपका स्वागत है, मिस्टर।"
तभी राजा साहब की नज़र आरव पर पड़ी।
"तो तुम हो आरव?"
"जी... प्रणाम।" 🙏
आरव ने आदर से झुककर प्रणाम किया।
राजा साहब मुस्कुराए।
"रोशनी ने तुम्हारे बारे में बहुत बताया है।"
रानी माँ ने भी स्नेह से कहा—
"घर जैसा समझो बेटा।"
आरव ने विनम्रता से मुस्कुराकर कहा—
"धन्यवाद, रानी माँ।"
सिया भी मुस्कुरा उठी। 🌸
उसी समय...
अर्जुन 🖤 वापस अंदर आया।
उसकी शर्ट की बाँहों पर धूल लगी थी।
चेहरा पहले से भी ज़्यादा गंभीर था।
सिया तुरंत उसकी ओर बढ़ी।
"सब ठीक है?" 🥺
अर्जुन ने हल्के से सिर हिलाया।
"जिसे ढूँढ़ रहा था... वो नहीं मिला।"
कुछ पल रुककर उसने पूरे हॉल पर एक नज़र डाली।
फिर धीमे स्वर में बोला—
"लेकिन इतना तय है..."
"महल में जो हुआ..."
"...वो कोई हादसा नहीं था।"
पूरा हॉल एक पल के लिए खामोश हो गया। 🤍
किसी ने कुछ नहीं कहा...
लेकिन सबके मन में एक ही सवाल था—
अगर दुश्मन बाहर नहीं था...
तो क्या वो महल के अंदर पहुँच चुका था? 👀🔥
━━━━━━━━━━━━━━
महल से कई किलोमीटर दूर...
एक ब्लैक कार सड़क किनारे खड़ी थी।
अंदर वही रहस्यमयी आदमी बैठा था।
उसके हाथ में टैबलेट था, जिस पर महल की लाइव फीड चल रही थी।
उसने स्क्रीन से नज़र हटाए बिना कहा—
"अब वक्त आ गया है..."
उसका सहायक तुरंत बोला—
"सर... नया स्टाफ मेंबर तैयार है।"
उस आदमी के होंठों पर हल्की मुस्कान उभरी।
"नाम?"
"आकाश..."
"किचन असिस्टेंट।"
वह धीमे से हँसा।
"उसे महल के अंदर भेज दो..."
"और कह दो..."
"राजकुमारी की हर आदत..."
"हर कमजोरी..."
"हर राज़..."
"...मुझे चाहिए।" 😈🔥
━━━━━━━━━━━━━━
"जब दो अनजान लोग एक जैसे सच छिपा रहे हों..."
"...तो राज़ सिर्फ़ रहस्य नहीं रहता..."
"...वो सबसे बड़ा ख़तरा बन जाता है।" 🔥
उस रात...
महल में शायद ही किसी ने सुकून की नींद ली हो।
क्योंकि अब किसी को नहीं पता था—
दुश्मन महल के बाहर था...
या... महल के भीतर।
━━━━━━━━━━━━━━
❓ पाठकों से सवाल — अगला अध्याय पढ़ने से पहले ज़रा सोचिए...
1️⃣ क्या अर्जुन 🖤 और आरव के बीच कोई पुराना रिश्ता है?
2️⃣ क्या आरव की मासूमियत सच है... या सिर्फ़ एक परत? 🤔
3️⃣ आखिर वो रहस्यमयी आदमी कौन है जो सिया 🌸 की हर हरकत पर नज़र रखे हुए है? 👁️
4️⃣ क्या महल के अंदर कोई गद्दार छिपा है? 🕵️
और सबसे बड़ा सवाल...
🔥 क्या अर्जुन सिर्फ़ सिया की हिफ़ाज़त कर पाएगा... या इस बार उसे खुद को भी बचाना होगा? 🖤
जारी रहेगा...
━━━━━━━━━━━━━━
© Diksha | सभी अधिकार सुरक्षित। ✍️❤️
🌸 मेरे प्यारे ParaHearts, 🌸
अगर आपको "हुक्म और हसरत – अध्याय 16" पसंद आया हो, तो कृपया इसे ⭐ रेटिंग देना और अपना रिव्यू ज़रूर लिखना। आपके हर शब्द से मुझे और बेहतर लिखने की प्रेरणा मिलती है।
यह अध्याय काफ़ी लंबा है और इसे लिखने में बहुत समय, मेहनत और दिल लगा है। इसलिए आपका एक Like , Comment , Rating और Share मेरे लिए बहुत मायने रखता है।
अगर आपने अभी तक मुझे Follow नहीं किया है, तो ज़रूर Follow करें, ताकि "हुक्म और हसरत" के हर नए अध्याय की सूचना आपको सबसे पहले मिल सके। ✨
मिलते हैं अगले अध्याय में...
जहाँ कुछ राज़ खुलेंगे, कुछ नए सवाल जन्म लेंगे, और अर्जुन 🖤 व सिया 🌸 की कहानी एक और रोमांचक मोड़ लेगी। 🔥
ढेर सारा प्यार, ❤️
आपकी अपनी,
Diksha ✍️🌸
━━━━━━━━━━━━━━