Dungeons - 11 in Hindi Horror Stories by Neeraj Sharma books and stories PDF | काल कोठरी - 11

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काल कोठरी - 11

      (काल कोठरी ) -------11 वी किश्त 

                     लोगों से जुड़ना, उन्हें कुछ समझना, भावना मे वेह कर कुछ होता है... कया उट पटाग सा भय। गेदा राम ने अजीत से मिल कर चाये पी। फिर गेंदा राम ने बताया ----" सर, वो लड़की थी जा पता नहीं उसमे कोई शक्ति थी... अब भी डर लगता है सोच कर। " अजीत ने कहा"---- पहले किस ने देखा गेंदा राम याद करो..." सर जानता हूँ ---- ये आपने ड्राइवर थे.. नाम भूल सा गया। " शायद -----जोर देने पर "दीपक था " अजीत पाल चुप कर गया।

         " गेंदा राम कुछ याद करो.... " अजीत पाल ने कहा। 

"सर याद कया करू... वो बहुत मनहूस था --- वो पल " गेदा राम ने खुशक होठो से कहा।

" हाँ वो डायन कह रही थी... आज भी वो इ स यू मे मजूद है... पर कहे तो दिखा नहीं सकता.. कयो कमजोर हूँ दिल से सर " अजीत पाल रुक गया.. समय जैसे ठहरे हुए था। मेरी ड्यूटी लगी हुई है... सधारण कपड़े मे " मै सी. बी आयी... से हूँ। ब्राँच बम्बे है... " 

चौकीदार गेदा राम थोड़ा रुक कर गंभीर सास लेता बोला ----" सर बात बोलू... ये केस यही खत्म करो.. पर छोटा आदमी कह नहीं सकता मै ये ----" अजीत पाल फिर चुप सा कर गया। " हाँ गेंदा राम पीने के शौकीन लगते हो... "अजीत पाल ने अगला पैतरा खेला। 

"नहीं सर " झूठ बोल लू, ठीक है। अजीत पाल उसकी ये आवाज सुन कर हसने को रोक नहीं सका।

"आप हसे साहब " गेंदा राम घबरा गया।

"डरो मत गेंदा राम ---- पीते हो न।" 

"हाँ सर पर ड्यूटी दौरान तो कभी नहीं ----" अजीत पाल हसते हुए एक बार फिर हसा... मतलब वो उनसे घुलना मिलना चाहता था। 

"आज शाम समझ लो ---- मेरी खातिर --- संडे।"  अजीत पाल ने हसते मुस्कराते कहा।

"-----एक बात बोलू साहब ---- ये पचीदा मामला है, इसे यही रहने दे बस... जयादा सुनेगे.. कुछ घटित होगा... देख लेना " गेदा राम ने धड़कते दिल से कहा।

"ओह ---हो --- वही मै बम्बे ब्राँच से केस सॉल्ब करने आया हूँ... गेंदा राम ज़ी.. हाँ तुम जाओ अभी एक विस्की और आमलेट बना कर लेते आओ..." अजीत पाल ने मुस्कराते हुए पैसे उसके हाथ मे देते कहा।

"---सर लगता है ड्यूटी मेरी खत्म होने को है।" फिर जोर से हसा अजीत पाल।

"नहीं गेंदा ज़ी --- आप की प्रमोशन करा के जाऊगा.. घबराओ नहीं। केस सॉल्ब करना है... आज तुम मेरे साथ ही हो " अजीत पाल ने निश्चित कहा।

गेंदा राम थोड़ा निश्चित हो गया था.... लडके को लेने भेज दिया था। " हाँ एक बात समझ नहीं आयी..इ सी का बिल कौन भरता है, गेंदा राम। " अजीत पाल ने रुक कर पूछा।

"उस पेशंट का साहब... वो आगे से काफ़ी बेटर है, डॉ जान बुझ कर उनसे कोई बात नहीं करता..." गेंदा राम ने सच्चाई बताई।

"बहुत खूब ----इंट्रेस्टिंग व्यू है... बहुत दिलचस्प रिपोर्ट है... हाँ गेंदा राम लड़का तुमाहरा है... आ गया.." 

"दो पेग बनाओ एक तुम बनाओ आपने लिए, दूसरा मेरे लिए थोड़ा मोटा। अंडो का आमलेट इधर इतना बड़ा बनता है। " अजीत पाल ने हैरत से कहा। वो ऐसी बात जान बुझ कर करता था। कि गेंदा राम मेरे से घुल मिल जाये। काल कोठरी कि किश्ते सब चल पड़ेगी अब, ठीक नहीं था थोड़ा मै........

       नीरज शर्मा 

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