धीरे धीरे ऐसे ही चार साल बीत गए। इन चार सालों में राजन और त्रिशा के जीवन में बहुत कुछ बदला। जैसे त्रिशा अब अपनी बेटी के लिए जीने मारने लगी थी और राजन की आदत दिन पर दिन उसका जीवन दुखमय बना रही थी।
इन्हीं चार साल में गुनगुन की पढ़ाई शुरु होने से पहले राजन ने थोड़े बहुत पैसे जोड़ कर अपनी फैमली के लिए एक छोटा सा घर ले लिया क्योंकि वह जानता था कि आगे उसके सामने बहुत सा खर्चा आने वाला है और वह अपने परिवार का एकलौता कमाने वाला है। इसलिए अपनी परिवार के भविष्य के लिए उसने रहने की जगह का प्रबंध किया जो कि उनका खुद का घर था।
साथ के साथ अपनी आय को बढ़ाने के लिए उसने अपने दोस्त के साथ मिलकर अपना खुद का काम भी शुरु करने का विचार बनाया है ताकि वह आगे अपनी आमदनी को बढ़ाया जा सके क्योंकि नौकरी में तो सैलरी बढ़ने का कुछ नहीं पता।
राजन के ऊपर घर खर्च और सभी की जिम्मेदारियों के बोझ धीरे धीरे बढ़ने की वजह से दिन पर दिन उसका गुस्सा भी बढ़ता जा रहा है और साथ ही में उसका तनाव भी बढ़ता जा रहा है। कभी कभी तो वह बहुत ज्यादा ही फ्रस्ट्रेट हो जाता है ।
ऑफिस में बॉस की झिकझिक और साथ के साथ ऑफिस का काम्पिटिशन। घर पर मां के इलाज और दवाई का टेंशन, गुनगुन की पढ़ाई शुरु कराने का टेंशन, घर की रोज की जरुरत के सामान का टेंशन,ऊपर से गाड़ी कि किस्त का टेंशन, घर के लिए जो बैंक लोन लिया उसकी ई एम आई का टेंशन, जो लाईफ इंश्योरेंस लिया है उसकी किस्त भरने की टेंशन, और घर के लिए ही ऑफिस से जो एडवांस ले लिया उसकी टेंशन। और इन सबका का गुस्सा और चिड़चिड़ापन कही न कही घूम फिर कर त्रिशा पर ही उतरता है।
पहले तो वो फिर भी त्रिशा को मनाने आया करता था पर अब राजन ने वो भी छोड़ दिया है क्योंकि उसके हिसाब से इतनी सारी टेंशनों के साथ भला इंसान प्यार भरी बातें कैसे करे। ऐसे में तो बस तनाव और बिपी बढ़ता है। और अपने तनाव को दूर करने का उसके पास बस एक ही साधन है और वो है शराब। जिसके नशे में वह अपने ऊपर का सारा प्रेशर और अपनी सारी टेंशन भूल जाता है और उसका दिमाग थोड़ी देर के लिए ही सही पर सभी टेंशन मुक्त हो जाता है।
हांलांकि वह पक्का शराबी नहीं था पहले वो कभी कभी दोस्तों के साथ पी लेता था पर अब धीरे धीरे यह उसकी रोज की आदत बनता जा रहा है और दिन पर दिन उसकी शराब पीने की मात्रा भी बढ़ती जा रही है।
वैसे तो उसे इस शराब से उसे कोई परेशानी नहीं है। क्योंकि पहले शराब और फिर घर पर त्रिशा इन दोनों के जरिए वह अपनी फ्रस्ट्रेशन उतार लेता है जिससे उसका दिमाग हल्का हो जाता है। बुरा तो बस उसे अगले दिन त्रिशा के लिए लगता है जब वह होश में आने के बाद अपने कारनामे का सुबूत त्रिशा के जिस्म पर देखता है।
जिसके लिए उसे बहुत बुरा लगता है। और वह सच्चे मन से त्रिशा से माफी भी मांगता है और पक्का कर लेता है कि अब से शराब को हाथ तक नहीं लगाएगा और त्रिशा पर जोर जबरदस्ती नहीं दिखाएगा और ना ही उस पर हाथ उठाएगा।
पर कहते है ना कि एक बार शराब को पकड़ लेने के बाद शराब किसी को कहां छोड़ती है। वही हाल राजन का भी हो चुका है। और कहीं ना कहीं राजन और त्रिशा ने इस बात को और उसकी इस आदत को स्वीकार कर भी लिया था। उन दोनों को पता चल चुका है कि यही उनका जीवन है।
खैर राजन ने अपने कंपनी के एक दोस्त के साथ मिलकर एक नया स्टार्ट अप शुरु किया जिसके लिए वह दिन रात मेहनत भी कर रहा है। उसे इसके लिए लोगो की, पैसों की और एक छोटे से ऑफिस के साथ साथ और भी बहुत सी चीजों कि जरुरत थी। जिसके लिए वह दिन रात मेहनत करने में लगा था।
वह अपनी नौकरी इस समय नहीं छोड़ सकता था क्योंकि अभी तो वहीं उसके और उसके परिवार की जरुरतों को पूरा करने के लिए एकमात्र साधन थी। इसलिए उसपर काम का लोड़ बहुत ज्यादा था। ऊपर से उसकी आदत थी सभी की जिम्मेदारी खुद उठाने की।
घर हो, बैंक हो, बाहर का काम हो या फिर मम्मी का अस्पताल का काम और अभी यह गुनगुन के स्कूल के लिए भाग दौड़ सभी कुछ उसने अपने ऊपर ले रखे है और इसीलिए उस पर मानसिक तनाव बहुत अधिक है। जिसका असर अब तो उसकी सेहत और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिखने लगा है।
अब वह दिन भर हर समय बस टेंशन में या गुस्से में रहता है। और रात के समय शराब के नशे में। त्रिशा चाहती है उसका कुछ बोझ कम करना पर उसने बाहर की दुनिया देखी ही नहीं कभी। कभी दुकान पर वह एक बिस्कुट का पैकेट तो लेने गई नहीं है तो उसे ना का खरीददारी का पता है और ना ही मोल भाव करना उसे आता है। रही बात बैंक और अस्पताल के कामों की या स्कूल के भाग दौड़ की या फिर राजन के ही आॅफिस के काम या फिर नई कंपनी के काम की तो इनमें कुछ भी ऐसा नहीं था जो वो अकेले कर सकती हो क्योंकि आज तक कभी उसने यह सब किया ही नहीं था तो वह पक्की तरह से जानती है कि उसके बस की यह सब चीजें है नहीं।
खैर वो बस कुछ गिनी चुनी चीजें ही कर सकती है जैसे की घर के काम, साफ सफाई, खाना बनाना बर्तन धोना, और मम्मी जी का ख्याल रखना। इनके अलावा उसके बस का और कुछ नहीं है। हां बस वह राजन की भड़ास अपने ऊपर उतरवा कर उसे शांत करवा सकती है। इसके आलावा और तो कुछ भी नहीं।