आगे...!
दादी मां का फोन रखकर श्रुति कुछ देर उस खाली सड़क को घूरती रही और सिट से टिककर आंखें मूंद लीं।
एक छोटी सी लड़की जिसने वाइट टॉप और घुटने तक की स्कर्ट पहनी थी।वो बहुत क्यूट दिख रही थी। एक लड़के के पिछे पिछे दौड़ रही थी और बार बार उसका हाथ पकड़ने की कोशिश कर रही थी मगर वो लड़का तेज़ी से आगे बढ़ रहा था ।उसकी स्पीड मैच करने के लिए वो लड़की तेज़ी से दौड़ने लगती है और आखिर में उसका हाथ पकड़ लेती है।
उस लड़की के हाथ पकड़ते ही लड़का चिढ़कर उसे देखता है और जैसे ही कुछ बोलने को होता है वो लड़की अचानक से जोर से रोने लगी।वो लड़का उसको रोता देख घबरा गया और उसके पास घुटनों पर बैठ गया और उसके छोटे से चेहरे को अपने हाथ में भरकर बोला- डॉल वाइ आर यु क्राइंग।।
वो लड़की रोते हुए- आप गंदे हो...आप बार-बार मुझे छोड़कर चले जाते हो। आपने कहा था कि आप कल पूरा दिन मेरे साथ रहकर खेलोगे मगर आप मुझसे मिलने भी नहीं आए, और आज भी मुझसे मिलने नहीं आए। मैं आपसे बहुत गुस्सा हुं। मैं आपसे बात नहीं करुंगी कहकर वो भाग गई।
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अचानक उसके फ़ोन का चिंग बजता है और श्रुति ख्यालों से बाहर आती है और अद्वैत का फोन देखते ही जल्दी से गाड़ी क्लब की ओर बढ़ा देती है।
जब वो क्लब की पार्कींग में पहुंची तो वहां पहले ही अद्वैत और राशि खड़े होकर झगड़ रहे थे। उसने देखा की अद्वैत ने राशि का हाथ पकड़ रखा था और राशि उसका हाथ हटाना चाह रही थी।
वो धीरे से न में गर्दन हिलाते हुए बोली- दोनों के दोनों पागल हैं। कार पार्क करके वो उनकी ओर आने लगी तब जाकर अद्वैत ने राशि का छोड़ा। राशि ने उससे मुंह बनाकर देखा और अपने हाथ को सहलाने लगी।
श्रुति के आते ही राशि ने खुद को नॉर्मल किया। अद्वैत श्रुति को डांटते हुए कहा- रैबिट इतनी देर कैसे हो गई?
श्रुति- वो दादी का फोन आया तो उनसे बात करने लगी थी।
फिर उन दोनों को देख कर-'आप दोनों अंदर क्यों नहीं गए थे?
राशि जल्दी से से- तुम्हारे बिना मैं अकेली अंदर नहीं जाना चाहती थी और अब तुम आ गई हो तो चलो ऐसा कहकर उसे अपने साथ खिंच लिया और आगे बढ़ गई।
अद्वैत भी हल्के से मुस्कुरा कर अपने हाथ को देखा और दोनों के पिछे हो लिया। वो तीनों जाकर वि . आई . पी एरिया में बैठ गए। वहां से पूरे क्लब का नजारा दिख रहा था। वहां ज्यादा शोर नहीं हो रहा था क्योंकि एरिया थोड़ा दूर था मगर उनके कानों सबके मस्ती करने की आवाज़ आ रही थी।
श्रुति एक नज़र दोनों को देखी और बोली- मैं तो चली डांस फ्लोर पर कहकर वो बिना कुछ सुने डांस फ्लोर के दूसरे ओर बने बार कांटर पर बैठ गई और सिंपल जूस ऑडर किया। बारटेंडर ने उसे हैरानी से देखा तो श्रुति ने बिना कुछ कहे उसके तरफ़ कुछ गुलाबी नोट बढ़ाकर कहा- नो अल्कोहल!!
बार टेंडर ने अपने साथी को वहां खड़ा किया और वहा से चला गया। कुछ देर बाद वो वापस आया और उसके तरफ़ वो गल्स बढ़ा दिया। श्रुति ने मुस्करा कर उसे थैंक यू कहा और सामने सबको डांस करते हुए देख अपने हाथ में पकड़ी ग्लास से जूस पीने लगी।
वहीं स्टेज के दूसरी तरफ,
राशि और अद्वैत चुपचाप बैठे हुए थे। दोनों को ही ऐसे शोर शराबे वाली जगह पसंद नहीं थी। राशि ने एक बार अद्वैत को देखा जो अपने फ़ोन में बिजी था और बिना देखे ही हाथ बढ़ाकर टेबल पर रखा गलास उठाकर पिने लगी। उस ड्रिंक बहुत अच्छी फलों की महक आ रही थी।वो एक सांस में पूरी ग्लास गटक गई।
फिर उसने वापस अद्वैत को देखा और बोली- मिस्टर मल्लिक हम हमारी दी के पास जा रहे हैं। अद्वैत ने कुछ नहीं कहा तो राशि चुपचाप उठकर चली गई।
उसके जाने के कुछ देर बाद अद्वैत ने दोनों कानों से इयर बर्ड निकालते हुए फोन लॉक कर पैकेट में रखते हुए बोला- मिस कपूर हमें रैबिट के पास..... कहते हुए उसने बगल में देखा तो कोई नहीं था।वो जल्दी से उठकर स्टेज की तरफ़ बढ़ गया।
यहां राशि श्रुति को ढूंढने स्टेज पर आई तो उसे अपना सर घुमता हुआ महसूस हुआ। उसने अपना सर पकड़ लिया।अगले ही पल उसके आंखें बंद होने लगी।बस वो जब गिरने ही वाली थी किसी ने उसे पकड़ कर अपने बाहों में थाम लिया। उसने मुश्किल से आंखें खोलकर देखा तो वो अद्वैत था। उसने आराम से उसके सिने पर अपना सर टिका दिया।
एक गहरी सांस लेकर अद्वैत ने उसे गोद में उठाया और स्टेज पर एक सरसरी सी निगाह डाली। वहां श्रुति नहीं थी।वो राशि को गोद में उठाकर बाहर निकल गया। बाहर आकर उसने राशि को सिट पर बिठाकर सिट- बेल्ट लगाया और अपना फोन निकालकर जैसे ही श्रुति को कॉल करना चाहा। उसकी नज़र एक मैसेज पर गई जो आधे घंटे पहले आया था- आदि मैं डांस करते हुए थक गई हूं मैं घर जा रही हूं। राशि का ध्यान रखना।
श्रुति
श्रुति आराम से जूस पिते हुए सब देख रही थी खुद में बड़बड़ाई- पागल हैं दोनों।।
वो अभी बैठी ही थी कि एक लडका उसके पास आकर बोली- हे ब्यूटीफुल,,, विल यू डांस विथ मी?
श्रुति मुस्करा कर- तारिफ के लिए शुक्रिया मगर मुझे डांस नहीं आता कहकर वो सिट से उतरी और वहां से बाहर निकल गई।
बाहर आकर उसने किसी को फ़ोन किया कुछ ही देर में एक आदमी उसकी कार वहां लेकर आया। उसके तरफ़ कुछ पैसे बढ़ाते हुए श्रुति बोली- आदि ने गाड़ी देखी तो नहीं?
वो आदमी पैसे लेकर- नहीं मैडम आपने जैसा कहा था हमने गाड़ी पिछे पार्क कर दी थी।श्रुति बिना कुछ कहे अपनी कार लेकर निकल गई।।
यहां कार में राशि अद्वैत को बहुत परेशान कर रही थी। कभी हाथ - चलाती कभी पैर। कभी रोने लगती तो कभी हंसने। इरिटेट होकर अद्वैत ने उसे डांटते हुए कहा- जब सम्भलती नहीं तो पी क्यों? चुप करके बैठो।
राशि मुंह फुलाकर बैठ गई और दो मिनट बाद उसने वापस उधम मचाना स्टार्ट कर दिया। अद्वैत ने अपना सर पकड़ लिया। राशि ने रेडियो ऑन किया और वहां चल रहे गाने को गाने लगी-
दिल ये हवा में उड़ने लगे हैं
हुआ पराया जी।
आधे हैं जागे आधे हैं सोए
कहां ले आया जी?
जब से तुम मिल गए
रास्ते खिल गए
खुद से मिलने लगे
हम संवरने लगे!!!
अद्वैत गाना बंद कर देता है तो राशि घूरकर उसको देखती है और उसके बाजू पर अपना सर टिका कर आंखें बंद कर लेती है।
To be continued.....