Devil, You Are Mine - 6 in Hindi Love Stories by Miss Anonymous books and stories PDF | Devil, You Are Mine - 6

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Devil, You Are Mine - 6

आगे..!
   जल्दी जल्दी सिढिया चढ़ते हुए श्रुति टेरिस पर चली गई। वहां पहुंच कर उसने एक गहरी लंबी सांस ली और वहां बने स्वीमिंगपूल में पैर डालकर बैठ गई और आसमान की ओर देखने लगी जिसका रंग सिंदूरी हो गया था। घर लौटते हुए चिड़ियों को देखकर उसके होंठ धिरे से कुछ बुदबुदाए और उसकी आंखों से एक आंसू की बूंदें बहकर उसके गालों पर आ गई और वहां से होते हुए पानी में समा गई।

श्रुति का कमरा,
          राशि चेंजिंग रूम में चेंज कर रही थी मगर उससे ड्रेस का चेन जोो की बैक साइड था।वह लग नहीं रहा था।वो अभी उसे लगाने की कोशिश ही कर रही थी की अचानक लाइट कुछ बार ब्लिंक करके बन्द हो गया। राशि झुंझला उठी। उसी वक्त उसे कमरे में किसी के आने का एहसास हुआ।

दरवाजा खोलकर अद्वैत श्रुति के कमरे में आया तभी अचानक लाइट कुछ बार ब्लिंक करके बन्द हो गए। अद्वैत ने पहले ही देख लिया था की कमरे में कोई नहीं है।वो मुडकर जाने लगा तभी उसे गेट खुलने की आवाज़ आई। उसने उस तरफ देखा तो खिड़कि से आती बेहद हल्की रोशनी में उसे एक परछाई दिखाई दी।

वो उसके तरफ़ बढ़ा की उसे बता दें की आर्यन उनके साथ नहीं जाएगा। उस परछाई के थोड़े पास पहुंच कर जैसे ही वो कुछ बोलने को हुआ। राशि बोली- श्रुति ये देख तूने कैसी ड्रेस दी है मुझे...इसका चेन लग ही नहीं रहा। अब तुम आ गई हो तुम ही लगा दो कहकर अपनी पीठ अद्वैत की ओर कर दी।

अद्वैत ने जैसे ही राशि की बात सुनी वो सख्ते में आ गया। उसने कुछ बोलने के लिए अपना मुंह खोलना चाहा तभी राशि बोली- श्रु तुम लगा रही हो या हम उतारे कपड़े...कहते हुए उसने अपने हाथ ड्रैस की स्ट्रैप पर रखा और उसे हल्का सा निचे करने की एक्टींग की।

अद्वैत जो की उसकी बात सुनकर बुरी तरह से डर गया था।उसे हलचल करता देख झट से पकड़ कर अपने पास खींच लिया। राशि ने जैसे ही महसूस किया कि ये श्रुति नहीं है वो लगभग चिख पड़ी मगर तभी अद्वैत ने उसका मुंह बंद करके कहा- चुप हो जाइए वरना सब हमें ग़लत समझेंगे।

राशि को इशारा करती उससे पहले ही अद्वैत के हाथ अपने खुले पीठ पर महसूस करके उसके रोंगटे खड़े हो गए। उसने जोर से आंखें मिंच ली और अपने ड्रेस को मुठ्ठी में भिंच लिया। उसका दिल तेज- तेज़ धड़क रहा था। अद्वैत ने उसके मुंह से हाथ हटा दिया था मगर उसकी आवाज मानों जम गई थी।

अद्वैत जो की उसकी ड्रेस की चेन ढुंढने की कोशिश कर रहा था उसकी भी हालत कुछ वैसी ही थी। जैसे ही उसने उसकी छोटी सी चेन को ढुंढा उसने एक राहत की सांस ली और उसके ड्रेस को दोनों सिरों से पास लाकर उसकी चेन लगा दी और फूर्ती से वहां से निकल गया।

राशि ने जब चेन बंद होते हुए महसूस किया तो उसके मन में एक तसल्ली हुई। वो पिछे मुड़ी तो अद्वैत वहां नहीं था। उसने बेड पर हाथ टटोल कर अपना फोन ढुंढा और फ्लैश लाइट जलाकर बेड पर रखे श्रुति की ड्रेस और एसेसरीज को उठाकर एक प्यारी सी मुस्कराहट लिए अपने कमरे में चली गई।

रात आठ बजे,
          श्रुति एक क्रीम कलर का कॉकटेल वनपिस ड्रेस पहने सिढियों से निचे उतरी और आखरी की तीसरी सिढी पर बैठकर अपने हाथ में लिए उचे ब्लैक हील को पहनने लगी। सैंडल पहन कर वो खड़ी हुई और हॉल के बैठी दोनों औरतों को देखकर अपने कमर पर हाथ रख पोज देते हुए बोली- So ladies how am I looking?


मिसेज मलिक ने उसे अंगुठे और कानी अंगुली को जोड़कर बहुत अच्छा का इशारा किया। वहीं मिसेज कपूर उसके तरफ़ बढ़ते हुए बोली- हमें तो पता ही नहीं था कि हमारी बेटी इतनी खूबसूरत है।

अपनी मां की बात सुनकर श्रुति को थोड़ा अजीब लगा क्योंकि वो कभी उसकी तारीफ नहीं करती थी। वो उनसे कुछ कहती तभी वो उसे इग्नोर कर उसके पीछे सिढियो की ऊपर की ओर बढ़ गई।

श्रुति ने पिछे मुडकर देखा तो सिढि के ऊपर बिल्कुल उसकी ही तरह राशि खड़ी थी और उसे एक चिढ़ाने वाली स्माइल दे रही थी। श्रुति ने अपना माथा रगड़ा और कहा- ये मां बेटी भी ना... मुझे तंग करने का एक मौका नहीं छोड़ते कहते हुए वो आकर मिसेज मलिक के पास बैठ गई।

मिसेज कपूर और राशि निचे आ गई और सोफे पर बैठ गई। कुछ ही देर में अद्वैत भी आ गया और वो तीनों वहां से निकल गए। अद्वैत ने पहले ही परमीशन ले ली थी।

बाहर आते हुए अद्वैत और राशि का अजीब बिहेवियर नोटिस करते हुए श्रुति बोली- ओके गाइज तो तुम दोनों साथ में आओ मैं अपनी कार से आऊंगी।

राशि फट से बोली- दी मैं आपके साथ चलुंगी।

श्रुति उसके गाल खिंचकर- बेटा बच्चों के साथ बड़ों का होना जरूरी है। तुम आदि के साथ आओ...भूल गई सुबह मेरी ड्राइविंग से तुम कितनी डर गई थी और अभी तो सड़क खाली होगी और तब मेरी स्पीड देखकर तुम ठीक नहीं रहोगी इसलिए आदि के साथ आओ कहकर अपनी कार में बैठी और झट से निकल गई।

राशि - हम दूसरी कार में.....

अद्वैत गेट खोलकर- चुपचाप अंदर बैठो...राशि मुंह लटकाकर बैठ गई। अद्वैत भी ड्राविंग सिट पर बैठकर कार स्टार्ट कर देता है।

ऑस्ट्रेलिया,
    दादी मां सोच रही थी की वो अब और यहां नहीं रूक सकती।वो परेशान हो गई थी। अचानक उन्हें कुछ ख्याल आया और उन्होंने क्राईम पार्टनर नाम से सेव नंबर पर कॉल कर दिया।

दूसरी तरफ से कॉल उठते ही एक आवाज- हेलो डार्लिंग.. 

दादी- हेलो- वेलो छोड़ और हमें बचाओ की इस उल्लू के पट्ठे को हम कैसे आज ही इंडिया ले आएं?

दूसरी तरफ़ खामोशी सुनकर दादी बोली- श्रुति कुछ बोल न बेटा।

कार की खिड़की से बाहर देखते हुए श्रुति बोली- दादी मां आप क्यों उस इंसान को फोर्स कर रहीं हैं जिसे किसी से कोई फर्क नहीं पड़ता..?

दादी मां- श्रुति अगर तेरे पास कोई उपाए है तो बता वरना अपना ज्ञान मत दे।

श्रुति- आप उन्हें बोलो की आदी का एक्सिडेंट हो गया है।

दादी मां- मगर वहां आकर उसे सच पता चलेगा तो वो बहुत भड़केगा।

श्रुति- वो सब हम संभाल लेंगे लेकिन पहले वो आए तो वरना कहीं उनकी नजरों में भाई से बड़ी अपने पैसे न हों कहकर फोन काट दिया।

दादी मां फोन को देखकर एक आह भरी और खुद से बोली- आप एक्टींग अच्छी करतीं हैं मगर हम भी अपने समय में एक अदाकारा थें वो अलग बात है बिजनेस संभालने में हमने उसे छोड़ दिया खैर अब जब आपने कह ही दिया है तो आइडिया आज़मा लेते हैं।

To be continued....

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