शाम का वक्त,
कपूर हाउस,
श्रुति अपने बेड पर लेटे फोन चला रही थी तभी किसी ने उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया। श्रुति फोन पर नजर बनाए हुए - अंदर आ जाओ...। कोई गेट खोलकर अंदर आया। श्रुति से सर उठाकर देखा तो अद्वैत था। उसके हाथों में दो कप थे। श्रुति ठीक से बैठकर उसके तरफ़ देखी और बोली - अरे आदि आप आइए ना बैठिए।
अद्वैत उसे एक कप देते हुए वहीं एक तरफ बैठ गया। श्रुति पिल्लों अपने गोद में रखकर बोली - क्या हुआ कोई बात है?
अद्वैत - तो तुमने आगे के बारे में क्या सोचा है? आगे क्या करना है?
श्रुति मुस्कुरा कर - मुझे घूमना है। अद्वैत उसे चपत लगा कर-पागल! हमने करियर की बात की है।।
श्रुति सर सहलाते हुए - मुझे फ़ैशन डिज़ाइनर बनना है और मैंने इसका कोर्स भी कर रखा तो बस अब किसी अच्छी सी कंपनी जोइन करनी है। आप कुछ सजेस्ट करो ना।
अद्वैत सर खुजलाते हुए - मुझे इस बारे में ज्यादा नहीं पता। श्रुति मुस्कुराई और चुपचाप उसे देखी।
दोनों चुपचाप एक दूसरे को देखे और अचानक बोले- मुझे कुछ पूछना है और फिर हंसने लगे। श्रुति कप रखने के लिए टेबल की ओर झुकी और रखकर जैसे ही पिछे होने लगी वहीं बैठे अद्वैत के शर्ट के बटन में उसे बाल फस गए ।
वो कप रखकर पिछे होने लगी तो बाल खिंचे जाने पर दर्द हुआ और उसके होंठों से आह निकल गई। वो जल्दी से उसके बटन से बाल निकालने लगी मगर वो और फस गया। अद्वैत उसे रोककर खुद निकालने लगा। श्रुति ने सर उसके सिने पर रखा ताकि उसके बाल और न खिंचे। वहीं अद्वैत एक हाथ से उसका सर पकड़ दूसरे हाथ से उसके बालों को निकाल रहा था।
ये देखने में कुछ ऐसा था मानों दोनों ने एक-दूसरे को गले लगा रखा है।
उसी वक्त कमरे का दरवाज़ा खोल राशि अंदर आई और दोनों को युं गले लगे देखकर अपनी जगह पर ठहर गई मगर जल्दी होश में आकर गेट वापस बंद करके बाहर निकल गई और तेज़ी से अपने कमरे में चली गई।
यहां अद्वैत ने उसके बाल जैसे ही निकाले श्रुति कूदकर उसे दूर अपने पहले वाली जगह पर बैठ गई और बोली- ठीक है तो आप जो कहने आए थे वो कहिए।
अद्वैत- आज आप दोनों ने इतना अच्छा स्कोर किया है तो चलिए पार्टी करते हैं। श्रुति उसे आंखें बड़ी-बड़ी करके देखी और उसके सर पर हाथ रखकर बोली- आदि आपकी तबियत ठीक है ना? मतलब आप और पार्टी... फिर धीरे से बोली- आज इन दोनों को हो क्या गया है।
श्रुति बोली- एक काम करिए मै और राशि आज नाइट आउट करेंगे तो आप और भाई भी चलो। What say??
अद्वैत सर हिला कर- Okay 👍। फिर वो उठकर चला गया और श्रुति राशि के कमरे की ओर चला गयी
राशि के कमरे का दरवाजा खोलकर श्रुति अंदर गई मगर अंदर कोई नहीं था। तभी श्रुति को पानी गिरने की आवाज़ आई। श्रुति वॉशरूम के गेट के पास गई और खटखटाते हुए बोली- राशि क्या तू अंदर है?
थोड़ी देर बाद राशि की आवाज आई- हां तू रूक हम आते हैं। करीब पांच मिनट बाद दरवाजा खोलकर राशि बाहर आई तो श्रुति ने उसके तरफ़ देखा। राशि की लाल आंखें देखकर श्रुति की आंखें सिकुड़ गई वो जल्दी से उसका हाथ पकड़ कर बोली- तू रो रही थी?
राशि जल्दी से न में सर हिला कर बोली- पागल है क्या? मैं भला क्यों रोने लगी? कहकर मुस्कुराई और अपना सर झुका लेती है।
श्रुति उसका चिन पकड़ कर सर ऊपर करती है तो राशि उसे देखती है। श्रुति- अच्छा तो फिर तुम्हारी आंखें लाल क्यों हैं?
राशि उससे आंखें चुराते हुए- क्योंकि हमारे आंख में कुछ चला गया था।
श्रुति उसके बाल ठीक करके- नहीं बताना तो मत बताइए मगर झूठे बहाने मत बनाइए और फिर उसके कबड की ओर बढ़ गई और उसे खोलकर उसके लिए कपड़े देखने लगी। मगर वहां पर सिर्फ सूट और ट्रेडिशनल वेयर थे।
श्रुति राशि का हाथ पकड़ कर उसे अपने रूम में ले गई और अपने कबड खोलकर उसमें से एक सेक्विन्स एंड नेट वन पिस ड्रेस लाकर उसके हाथ में दी और चेंज करने बोली। राशि चुपचाप उसे लेकर चेंजिंग रूम में चली गई।
श्रुति बड़बड़ाई- क्या आज सबके साथ कुछ ग़लत हुआ है? जीसे देखो वो हमें झटके दिए जा रहे हैं।। फिर अपने लिए भी एक क्रीम कलरकी कोकलेट ड्रेस निकाल कर बेड पर रख दिया और अपने फ़ोन से किसी का नंबर डाइल करने लगी तभी निचे से कुछ शोर सुनाई दिया।
फोन हाथ में लिए वो कोरिडोर में आई और निचे झांका तो उसे कुछ समझ नहीं आया। वो निचे आई तो हॉल में एक छोटा सा लड़का इधर-उधर भाग रहा था और नौकर उसके पिछे भाग रहे थे। वहीं बाकी सब लोग वहां बैठे हंस रहे थे।
श्रुति गुस्से से चिल्लाई- आयुष्मान कपूर...!!
श्रुति की आवाज सुनते ही सब चुप हो गए और वो बच्चा भी अपने जगह पर रूक गया। सब नौकर भी एक तरफ खड़े हो गए। वो बच्चा श्रुति के तरफ डरते हुए देखा तो वो अपने दोनों हाथ कमर पर रखकर उसे ही घूर रही थी।
आयुष्मान उर्फ आयुष उर्फ मान श्रुति के पास धिमे कदमों से आया और उसके सामने खड़ा हो गया और सिर झुकाकर बोला- एम सॉरी बुई मैं भूल गया था। प्लिज मुझे माफ कर दो।
श्रुति नौकर को कुछ इशारा करती है और उस बच्चे से बोली- मैं देख रही हूं मान दिन पर दिन आप बदमाश होते जा रहे हैं। अब बीना देर किए जाइए और कमरे में जाकर फ्रेश होकर आइए। चलिए जाइए।
उसकी बात सुनकर वो छोटा सा बच्चा चुपचाप वहां से चला गया। उसके जाते ही सरस्वती जी ने घूरकर श्रुति से कहा- क्यों ले माहरानी तुझे मेरे पोते से बड़ी जलन होती है।
श्रुति टेढ़ी स्माइल करके- हां सरु ..! बिल्कुल और होभी क्यों न...मेरे ससुराल जाने के बाद यही तो रहेगा यहां।
सरस्वती कपूर- बेटा तू भूल गई...तेरी एक छोटी सी प्यारी सी बहन भी है।
श्रुति मुस्कुराते हुए- माई डियर सरु....शायद आप भूल गई हैं की मैंने कहा था कि अपनी राशि को वहीं लेकर जाऊंगी जहां मैं जाऊंगी मतलब शादी ऐसे घर में करुंगी जहां हम दोनों के लिए हमारे दो हों।
सुधा मलिक फट से बोली- अरे श्रुति बेटा मेरे दो बेटे हैं बताओ किससे शादी करोगी तुम...?
श्रुति मुंह बिगाड़ करा- No Mom बिल्कुल नहीं.... मुझे आपके बेटों से शादी नहीं करनी।
सुधा जी- पर क्यों?
श्रुति- देखिए मॉम आदि अच्छे हैं नो डाउट मगर वो मेरे लिए नहीं है। मेरी नज़र में वो मेरे बेस्ट फ्रेंड और मेंटॉर हैं। मेरे आंखों में वो मेरे गुरू हैं। And for god sake आपलोग गलती से भी ये मत सोचना की मुझे आदि पसंद है।
सुधा जी हार न मानते हुए - तो फिर मेरे बड़े बेटे का क्या?
श्रुति- Naah!! उन विचित्र प्राणी से तो मैं कभी मिली ही नहीं तो पूरी लाइफ कैसे बिताऊंगी और इससे भी बड़ी बात क्या पता उसके साथ सेटल होने के वो मुझे आप सबकी तरह छोड़कर चला जाएगा तब मैं तो टूट जाऊंगी... और श्रुति कपूर की जिंदगी में दर्द और बेबसी की जगह नहीं है कहते हुए वो जल्दी से सिढियां चढ़कर ऊपर भाग गई।
To be continued.....
Please give rating and reviews😄