Mout ki Dastak - 28 in Hindi Horror Stories by kajal jha books and stories PDF | मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 28

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 28

हवेली का अंतिम पहर: आधी रात का सन्नाटा
शहर की भागदौड़ से दूर, घने जंगलों के बीच बसी 'नीलगिरी हवेली' के बारे में कई कहानियाँ मशहूर थीं। गाँव वाले कहते थे कि सूरज ढलने के बाद उस हवेली की दीवारें सांस लेने लगती हैं। आर्यन, जो एक मशहूर घोस्ट-हंटर (भूतिया रहस्यों को सुलझाने वाला) और लेखक था, इन बातों पर यकीन नहीं करता था। उसे अपनी नई किताब के लिए एक ठोस कहानी चाहिए थी, और नीलगिरी हवेली से बेहतर जगह क्या हो सकती थी?
आगमन: एक अशुभ शुरुआत
जब आर्यन अपनी पुरानी जीप से हवेली के पास पहुँचा, तो शाम के छह बज रहे थे। आसमान में खून जैसा लाल रंग फैला था। हवेली के बड़े लोहे के गेट जंग खाए हुए थे और जैसे ही उसने उन्हें धकेला, एक लंबी चीख जैसी आवाज़ गूँजी।
हवेली के अंदर कदम रखते ही आर्यन को महसूस हुआ कि तापमान अचानक गिर गया है। हवा में एक अजीब सी गंध थी—जैसे सदियों पुरानी सड़ी हुई लकड़ी और सूखे गुलाबों की महक। उसने अपना सामान हॉल में रखा और टॉर्च जलाई।
हॉल के बीचों-बीच एक विशाल झूमर लटका था, जो बिना हवा के भी धीरे-धीरे हिल रहा था। दीवार पर एक बड़ी तस्वीर टंगी थी—हवेली के पुराने मालिक, ठाकुर दिग्विजय सिंह की। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जो ऐसा लग रहा था जैसे आर्यन का पीछा कर रही हो।
रात का पहला प्रहर: फुसफुसाहटें
रात के दस बजे आर्यन ने अपनी रिकॉर्डिंग मशीन चालू की और हवेली के ऊपरी हिस्से की ओर बढ़ा। सीढ़ियाँ हर कदम पर चरमरा रही थीं। अचानक, उसे एक कमरे से किसी के गुनगुनाने की आवाज़ आई।
वह आवाज़ एक लोरी जैसी थी, लेकिन बहुत ही धीमी और दर्दभरी। आर्यन ने उस कमरे का दरवाज़ा खोला। कमरा खाली था, बस एक पुरानी धूल भरी 'रॉकिंग चेयर' (झूलने वाली कुर्सी) अपने आप हिल रही थी।
आर्यन के रिकॉर्डर से: "समय 10:22 रात। कमरा नंबर 4। यहाँ कोई नहीं है, लेकिन कुर्सी अपने आप हिल रही है। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (EMF) मीटर की रीडिंग असामान्य रूप से बढ़ रही है। मुझे ऐसा लग रहा है जैसे कोई मेरे ठीक पीछे खड़ा है..."
जैसे ही उसने पीछे मुड़कर देखा, उसे एक काली परछाईं गलियारे के अंत में ओझल होती दिखाई दी।
आधी रात: खूनी इतिहास का खुलासा
आर्यन वापस नीचे आया और हवेली के पुराने पुस्तकालय में गया। वहाँ उसे एक फटी हुई डायरी मिली। वह डायरी ठाकुर की छोटी बेटी, मनोरमा की थी। डायरी पढ़ते ही आर्यन के रोंगटे खड़े हो गए।
डायरी में लिखा था:
"पिताजी ने आज फिर उस कमरे को बंद कर दिया है। वे कहते हैं कि माँ की आत्मा अभी भी यहीं है। लेकिन मुझे पता है कि वे झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने ही माँ को उस दीवार के पीछे चुनवा दिया था क्योंकि माँ इस हवेली को छोड़कर जाना चाहती थीं। अब रात में दीवारें रोती हैं, और मैं भी..."
डायरी का आखिरी पन्ना खून से सना था, जिस पर केवल एक वाक्य लिखा था: "अब तुम्हारी बारी है।"
तीसरा प्रहर: साये का हमला
तभी अचानक पूरे हॉल की मोमबत्तियाँ एक साथ बुझ गईं। सन्नाटा इतना गहरा था कि आर्यन को अपनी धड़कनें सुनाई दे रही थीं। अचानक, हवेली के भारी दरवाज़े अपने आप बंद होने लगे। 'धड़ाम!' की आवाज़ के साथ मुख्य दरवाज़ा बंद हो गया।
आर्यन ने टॉर्च जलाई, लेकिन उसकी रोशनी कमज़ोर पड़ने लगी। उसने देखा कि सीढ़ियों से कोई उतर रहा है। वह कोई इंसान नहीं था। एक सफ़ेद धुंधली आकृति, जिसके बाल ज़मीन को छू रहे थे और आँखें पूरी तरह काली थीं। वह आकृति हवा में तैरते हुए आर्यन की तरफ बढ़ने लगी।
आर्यन चिल्लाया, "तुम क्या चाहती हो?"
जवाब में एक गूँजती हुई आवाज़ आई, जो हवेली की दीवारों से टकरा रही थी: "बलिदान... इस हवेली को ज़िंदा रहने के लिए नया खून चाहिए!"
संघर्ष और पलायन
आर्यन भागकर रसोई की तरफ गया, जहाँ एक छोटा रोशनदान था। लेकिन जैसे ही वह वहाँ पहुँचा, बर्तन अपने आप हवा में उड़ने लगे और उसकी तरफ आने लगे। एक तेज़ चाकू उसके कान के पास से गुज़रकर दीवार में जा धंसा।
उसने देखा कि ज़मीन से काले हाथ निकल रहे थे, जो उसके पैरों को जकड़ने की कोशिश कर रहे थे। आर्यन ने हिम्मत नहीं हारी। उसने अपने बैग से पवित्र जल और एक प्राचीन मंत्रों वाली किताब निकाली (जो वह हमेशा साथ रखता था)।
उसने ज़ोर-ज़ोर से मंत्र पढ़ना शुरू किया। हवेली हिलने लगी, जैसे कोई भूकंप आ गया हो। झूमर टूटकर नीचे गिरा और आग लग गई। आग की लपटों के बीच उसे उन आत्माओं के चेहरे दिखाई दिए जो इस हवेली में कैद थीं। वे सब दर्द से चिल्ला रही थीं।
भोर का सन्नाटा
सूरज की पहली किरण जैसे ही खिड़की से अंदर आई, सब कुछ शांत हो गया। आर्यन बेहोशी की हालत में हवेली के बाहर पड़ा था। जब उसकी आँख खुली, तो सामने सिर्फ जलती हुई हवेली का खंडहर था।
उसने अपने हाथ में देखा—वह डायरी अब भी उसके पास थी। लेकिन जब उसने उसे खोला, तो उसमें आर्यन की अपनी तस्वीर बनी हुई थी और नीचे लिखा था: "तुम वापस आओगे।"
आर्यन अपनी जीप में बैठा और मुड़कर पीछे नहीं देखा। लेकिन जैसे ही उसने अपनी कार के 'रियर व्यू मिरर' में देखा, उसे पीछे वाली सीट पर वही धुंधली आकृति बैठी नज़र आई, जो मुस्कुरा रही थी।
कहानी का सार
नीलगिरी हवेली आज भी वहीं है। लोग कहते हैं कि जो वहां से बचकर निकलता है, वह कभी पूरी तरह 'अकेला' नहीं होता। कुछ साये हमेशा साथ चलते हैं।