Itihaas ke Panno se - 20 in Hindi Anything by S Sinha books and stories PDF | इतिहास के पन्नों से - 20

The Author
Featured Books
  • अंश, कार्तिक, आर्यन - 10

    मल्होत्रा का महलमल्होत्रा का महल…घर कम, ऐलान ज़्यादा था।ऊँचे...

  • VORTX - 3

    — "ब्रह्मांड की दरार: 5वीं सदी का वो खौफनाक सफर"दृश्य 1: भवि...

  • Agent Tara - 5

    फाइनल टेस्ट पास करने के बाद तारा की भूमिका सहयोग फाउंडेशन मे...

  • लिव-इन

    लिव-इन                           कमल चोपड़ा                ...

  • सैदो में बंधी जिंदगी - एपिसोड 4

    गार्ड्स चिल्लाए। अनन्या कमरे से बाहर निकली, दिल धक्-धक्। आर्...

Categories
Share

इतिहास के पन्नों से - 20

                                                                   इतिहास के पन्नों से 2o      


नोट - ‘ वैसे तो इतिहास अनंत है ‘   इस शृंखला में इतिहास की कुछ घटनाओं के बारे में पहले प्रकाशित भागों में  उल्लेख है, अब आगे पढ़ें  -


अमीलिया  एरहार्ट -   अमीलिया एक  मशहूर अमेरिकी विमान चालक और लेखिका थीं  . 1932 में  वे विश्व में सोलो ( अकेले ) नन स्टॉप अटलांटिक महासागर पार करने वाली  सर्वप्रथम महिला पायलट बनीं  . अमीलिया ने एविएशन ( विमानन ) में नए रिकॉर्ड बनाये जिससे अन्य महिला पायलट को प्रेरणा मिली  . अपने उड़ान के अनुभव पर अमीलिया ने पुस्तक भी लिखी थी . विश्व में महिला पायलट के संगठन की स्थापना में उनका अहम योगदान रहा था . महिलाओं पायलट की सहायता के लिए उन्होंने ‘ द नाइंटी  नाइन्स  ‘ ( The Ninety Nines )  नामक संस्था की स्थापना की थी  . 


उन्होंने 1937 में विमान से पूरी दुनिया का चक्कर लगाने की योजना बनायी  . उनकी इस  योजना में उनके सह पायलट और नेविगेटर  फ्रेंड नूनन थे  . 1 जून 1937 को  दोनों ने अपने लगभग 47000 Km उड़ान का अभियान शुरू किया  . 29 जून तक उन्होंने करीब 35 ,000 Km की उड़ान पूरी कर ली थी , इस बीच उन्हें  कुछ जगहों पर रुक कर विमान में ईंधन भरना पड़ा था  . 2 जुलाई को उन्होंने 4200 Km दूर हाव लैंड द्वीप के लिए उड़ान भरी  . इस द्वीप से लगभग 160 Km दूरी पर उन्होंने रेडियो मेसेज दिया था कि उनका ईंधन समाप्त होने वाला है  . इसके तत्काल बाद अमीलिया और फ्रेंड का संपर्क धरती से टूट गया था  . माना  जाता है कि उनका विमान क्रैश कर सागर में जा गिरा था हालांकि आज तक  विमान के पायलट और विमान का कोई भी पता नहीं लग सका है  . 


नालंदा विश्वविद्यालय - बिहार की राजधानी पटना के निकट  नालंदा में विश्व का एक प्राचीन और महानतम विश्वविद्यालय था नालंदा विश्वविद्यालय  . इसकी स्थापना गुप्त वंश के शासक कुमारगुप्त ने 5 वीं सदी में  427 में की थी जो 12 वीं सदी तक दुनिया में प्रसिद्ध था . यह UNESCO का एक मुख्य विश्व धरोहर ( world heritage ) भी है . यह दुनिया का पहला आवासीय विश्वविद्यालय था . यहाँ 90 लाख से ज्यादा  ताड़ पत्र पर हस्त लिखित पुस्तकें  ( पाण्डु लिपियाँ ) थीं . यहाँ भारत के अतिरिक्त  पूर्व , दक्षिण पूर्व और मध्य एशिया  के लगभग 10000  छात्र रह कर पढ़ते थे . नालंदा बौद्ध ज्ञान का दुनिया का सर्वश्रेष्ठ संस्थान था . 


नालंदा के विद्वान शिक्षक चीन , जापान , इंडोनेशिया , कोरिया , श्रीलंका आदि देशों में जा कर पढ़ाते थे .  छठी सदी में नालंदा का नेतृत्व भारत के महान गणित विद्वान् आर्यभट्ट ने किया था . भविष्य में पाल राजवंश के शासन काल ( 8 वीं - 12 वीं सदी के बीच ) के बाद इसका पतन शुरू हो गया था . 


1190 के दशक में ( सम्भवतः 1193 ) तुर्क अफगान जनरल बख्तियार खिलजी ने नालंदा विश्वविद्यालय पर आक्रमण कर इसे जला कर नष्ट कर दिया था  . विश्वविद्यालय का विशाल परिसर और इसका समृद्ध पुस्तकालय तीन महीनों से ज्यादा समय तक जलता रहा था  . कुछ विद्वानों की  मान्यता है कि इसे जलाने का कारण इसका  इस्लामिक शिक्षा के विरुद्ध होना था जबकि कुछ की मान्यता है कि ऐसा बौद्ध धर्म को नष्ट करने के लिए किया गया था  .  


 कुछ इतिहासकारों के अनुसार नालंदा पर यह पहला नहीं बल्कि तीसरा आक्रमण था  . नालंदा पर पहला हमला आरम्भ में 5 वीं सदी में ही हूणों ने किया था और दूसरा  आक्रमण 8 वीं सदी में बंगाल के गौड़ राजा ने किया था  .  किसी अन्य इतिहासकार के अनुसार नालंदा की समृद्धि और विशाल किले  जैसा स्वरूप के कारण ही ईर्ष्यावश खिलजी ने किया था  .  


कुछ वर्ष पूर्व  भारत , ऑस्ट्रेलिया , अन्य एशियाई और आसियान देशों ने मिलकर इसका पुनरुद्धार किया है  .   इसका पहला सत्र 6 सितंबर 2014 में आरम्भ हुआ था  .  

 

द मैन इन द आयरन मास्क - “  द मैन इन द आयरन मास्क"  एक फ़्रांसिसी राजनैतिक कैदी की रहस्यमय  ऐतिहासिक कहानी है  . वह  तत्कालीन फ्रांस के राजा लुई XIV के शासन काल में बंदी था  और बैस्टिल में मारा गया था  . कहा जाता है कि  राजा लुई ने  किसी अज्ञात व्यक्ति को बंदी बना कर बाद में मारने का आदेश दिया था   . उसकी असली पहचान आजतक एक रहस्य है  वह अज्ञात क़ैदी हमेशा एक काला मुखौटा पहने रहता था जिसे लोग लोहे का मास्क कहते थे  . 

उसे 1681 में फ्रांस के पिनेरोलो में बंदी बनाया गया था और 1698 में बैस्टिल लाया गया था  .  उसका चेहरा हमेशा लोहे के मुखौटे से छुपा रहता था  .  1703 में उसे मार दिया गया था  .    

इस रहस्य का पर्दाफाश अभी तक नहीं हो पाया है पर अलग अलग इतिहासकारों की अलग अलग मान्यता रही है  .  एक लोकप्रिय दंतकथा के अनुसार वह क़ैदी राजा लुई का गुप्त  जुड़वाँ भाई था जिसे जन्म के समय से ही सदा छुपा कर रखा गया था और बाद में उसे मार दिया गया  . इसका कारण कदाचित यह रहा होगा कि राजा लुई को   भय था कि कहीं जुड़वाँ भाई उसकी गद्दी के लिए चुनौती न बन जाए  . कुछ इतिहासकारों के अनुसार क़ैदी का नाम यूटाचे दोघर था जो मात्र एक सेवक था  . किसी राजनीतिक षड्यंत्र में शामिल होने के कारण उसे गिरफ्तार कर लिया गया था  . 


Trivia - रोसेटा स्टोन एक रहस्यमय पत्थर था जिसे खोजने के बाद ही मिस्र की प्राचीन भाषा को समझने की मानो कुंजी मिल गयी  . रोसेटा को 1799 में फ़्रांसिसी सेना ने खोजी थी जो बाद में ब्रिटिश सेना के हाथ आ गया था  .