हवेली का रहस्य रिया पटना की एक छोटी सी कॉलोनी में रहती थी। 25 साल की ये लड़की ग्राफिक डिजाइनर थी, लेकिन जिंदगी ने उसे अचानक एक झटका दिया। उसके दादाजी की मौत के बाद, परिवार ने फैसला किया कि पुरानी पैतृक हवेली बेच दी जाए। हवेली गंगा नदी के किनारे, पटना के बाहर एक जंगल जैसे इलाके में थी। दादाजी हमेशा कहते थे, "वहां मत जाना, बेटी। वो जगह श्रापित है।"रिया को पैसों की तंगी थी। बॉयफ्रेंड अजय ने उसे धोखा दिया था – वो किसी और के साथ भाग गया। इसलिए रिया ने सोचा, हवेली को खुद साफ करके बेचेगी। एक रात, वो अकेली हवेली पहुंची। दरवाजा खोलते ही सर्द हवा का झोंका आया, मानो कोई सांस ले रहा हो। अंदर धूल भरी फर्नीचर, टूटे शीशे और दीवारों पर काले दाग।पहली रात ठीक गुजरी। लेकिन दूसरी रात, आधी रात को रिया की नींद खुली। नीचे से किसी औरत की हंसी सुनाई दी। "किकिकिकी..." वो हंसी इतनी ठंडी थी कि कमरे का तापमान गिर गया। रिया ने सोचा, शायद हवा का खेल। लेकिन सुबह फर्श पर पानी के निशान मिले – जैसे किसी ने नहाकर घूम लिया हो।तीसरी रात, वो आईने के सामने खड़ी थी। बाल संवार रही थी। अचानक आईने में उसका चेहरा बदल गया। पीछे एक औरत खड़ी थी – लंबे काले बाल, सफेद साड़ी, आंखें खाली। रिया चीखी और पलटी। कोई नहीं था। दिल धड़क रहा था। "ये क्या था?" उसने खुद से कहा।अगले दिन रिया ने पड़ोस के गांववालों से पूछा। एक बूढ़ा आदमी बोला, "50 साल पहले यहां मालकिन कमला रहती थी। उसके पति रघु ने उसे मार डाला। जलाने से पहले गला दबाया। तब से उसकी आत्मा भटकती है। वो बदला लेती है उन मर्दों से जो औरतों को धोखा देते हैं।"रिया हंस पड़ी। "अंधविश्वास!" लेकिन शाम होते ही फोन बजा। अनजान नंबर। उठाया तो वही हंसी – "किकिकिकी... अजय... अजय..." रिया का खून जम गया। अजय? वो तो भाग गया था। रात को बिस्तर पर लेटी तो कमरे में ठंडी सांस महसूस हुई। कंबल खींचा तो हाथ पर नाखूनों के निशान पड़ गए।चौथी रात सबसे खतरनाक थी। रिया सो नहीं पा रही थी। घड़ी के कांटे 3 बजे रुके। बाहर बारिश हो रही थी। अचानक दरवाजा खटखटाया। "रिया... खोलो..." आवाज कमला जैसी। रिया ने दरवाजा खोला। गलियारे में सफेद साड़ी वाली छाया खड़ी। वो धीरे-धीरे करीब आई। चेहरा पीला, होंठ नीले। "तुम्हारा अजय... मेरा रघु जैसा... उसे सजा मिलेगी। तुम मदद करोगी?"रिया भागी। सीढ़ियां चढ़ते हुए पैर फिसला। नीचे गिर पड़ी। दर्द हुआ, लेकिन उठी। कमरे में छिप गई। अलमारी के अंदर से झांका तो देखा – कमला का भूत बिस्तर पर बैठा, बाल संवार रहा। "तुम्हारी तरह सुंदर... लेकिन धोखेबाज मर्द..." भूत ने आईना उठाया। आईने में रिया का चेहरा कमला बन गया। आंखें लाल।रिया चीखी। भागकर बाहर निकली। बारिश में भीगती हुई गाड़ी की तरफ दौड़ी। लेकिन गाड़ी स्टार्ट नहीं हुई। इंजन में पानी भर गया था। पीछे मुड़कर देखा – हवेली के सारे खिड़कियां खुलीं। हर खिड़की पर कमला का चेहरा। "रह जाओ... हम साथ रहेंगे।"रिया अंदर भागी। दादाजी का पुराना कमरा। वहां एक ताला लगा डायरी मिली। खोली तो पढ़ा – "कमला की मौत का राज। रघु ने नहीं मारा। कमला ने खुदकुशी की क्योंकि रघु ने दूसरी शादी की। लेकिन उसकी आत्मा बदला लेने लगी। वो निर्दोषों को भी मारती।"रात के 3 बज गए। रिया ने मोमबत्ती जलाई। अचानक हवा बुझा दी। अंधेरा। फिर वही हंसी। "तुम्हें पता चल गया? लेकिन देर हो गई। अजय आ रहा है। मैंने बुलाया।" फोन बजा। अजय की आवाज – "रिया, मुझे माफ कर दो। मैं आ रहा हूं हवेली। कुछ अजीब हो रहा है। एक औरत ने बुलाया।"रिया का दिल बैठ गया। बाहर गाड़ी की आवाज। अजय आ गया! दरवाजा खटखटाया। "रिया! खोलो!" रिया ऊपर से चिल्लाई, "भाग जाओ! ये खतरनाक है!" लेकिन दरवाजा अपने आप खुल गया। अंदर आते ही अजय चीखा। सीढ़ियों से लुढ़कता हुआ। रिया नीचे गई। अजय के गले पर नीले निशान। सांस रुक रही। कमला का भूत उसके ऊपर। "ये तेरी सजा!"रिया ने डायरी फाड़ दी। "जाओ! ये झूठ था!" लेकिन भूत हंसा। "झूठ? मैं सच हूं। तू भी मेरी तरह बनेगी।" कमला ने रिया की गर्दन पकड़ी। सांस बंद। रिया की आंखों में अंधेरा। आखिरी बार कमला का चेहरा दिखा – उसका अपना चेहरा।सुबह गांववाले आए। हवेली खाली। रिया और अजय गायब। सिर्फ फर्श पर पानी के निशान और आईने में दो चेहरे – कमला और रिया। हंसी गूंज रही – "किकिकिकी..."अब हवेली बिक्री के लिए है। कोई खरीदने वाला नहीं। रात को हंसी सुनाई देती है। कौन सा चेहरा अगला होगा?