The Cat Who Turned Into a Human - 5 in Hindi Spiritual Stories by Sonam Brijwasi books and stories PDF | बिल्ली जो इंसान बनती थी - 5

Featured Books
Categories
Share

बिल्ली जो इंसान बनती थी - 5


सुबह से ही शानवी का मन भारी था। रात वाले सपने ने उसे अंदर तक हिला दिया था। फिर भी वो खुद को संभालकर ऑफिस चली गई। पूरा दिन…वो बस काम में लगी रही।
खुद को बिज़ी रखने की कोशिश करती रही।
लेकिन किस्मत…आज कुछ और ही तय करके बैठी थी।
दोपहर के वक्त…अचानक उसका बॉस उसके केबिन में आ गया।
और उसकी नजर…बैग के पास बैठे उस सफेद बिल्ले पर पड़ गई।

Boss बोला - 
ये क्या है? ऑफिस में जानवर?

उसकी आवाज़ सख्त थी। शानवी घबरा गई।

शानवी बोली - 
सॉरी सर… वो ये बहुत शांत है… किसी को परेशान नहीं करेगा…।

लेकिन बॉस गुस्से में थे।

वो बोले - 
ये कोई चिड़ियाघर नहीं है! अभी के अभी इसे बाहर ले जाओ!”
“और अगर दोबारा ऐसा किया… तो एक्शन होगा!

सब लोग देखने लगे। शानवी का चेहरा शर्म से झुक गया।
उसने चुपचाप बिल्ले को गोद में उठाया…और केबिन से बाहर चली गई। उसकी आँखें भर आई थीं।

शाम को…वो जल्दी घर आ गई।जैसे ही दरवाज़ा बंद किया…
उसके आँसू निकल पड़े। वो फर्श पर बैठकर फूट-फूट कर रोने लगी।

वो बोली - 
सब कुछ क्यों गलत हो रहा है मेरे साथ…?
पहले वो अजीब सपने… फिर ये सब…

बिल्ला चुपचाप उसके पास आकर बैठ गया। कार्तिकेय।वो उसे रोते हुए देख नहीं पा रहा था।वो उसका हाथ अपने छोटे से पंजे से छूने लगा। शानवी ने उसे सीने से लगा लिया।

शानवी बोली - 
तुम ही तो हो… जो मेरा अपना हो…

और कार्तिकेय के दिल में…एक फैसला धीरे-धीरे जन्म ले रहा था…
> “अब और नहीं…
अब मुझे कुछ करना ही होगा…”

कमरे में ठंड थी। सर्दियों की हल्की-हल्की ठिठुरन हवा में घुली हुई थी। शानवी रोते-रोते थक चुकी थी। वो बिस्तर पर लेट गई।
कुछ ही देर में…वही सफेद बिल्ला आकर उसके सीने पर आकर लेट गया। जैसे रोज़ लेटता था। शानवी ने उसे यूँ ही बाँहों में समेट लिया…और गहरी नींद में चली गई।

⏰ रात के 12 बजे।
कमरे में वही जानी-पहचानी हल्की सी रोशनी फैली…और बिल्ला…फिर से इंसान बन गया। कार्तिकेय। वो एक पल के लिए सन्न रह गया। वो…शानवी के सीने से लगा हुआ था। उसकी बाँहें उसे कसकर पकड़े हुए थीं। वो घबरा गया।

कार्तिकेय बोला - 
ये… ये क्या…

वो धीरे से हटने की कोशिश करने लगा। लेकिन… शानवी की पकड़ बहुत मजबूत थी। वो हिली नहीं। उसकी नींद में भौंहें थोड़ी सिकुड़ीं।

उसके मन में आधी नींद में एक ख्याल आया —
मेरा बिल्ला…आज इतना भारी कैसे लग रहा है…?
और ये…आज गुदगुदा क्यों नहीं है…?

उसने बिना आँखें खोले ही थोड़ा और कसकर पकड़ लिया।

वो बुदबुदाई - 
शायद वहम है…मैं बहुत थकी हुई हूँ…।

और वो फिर से गहरी नींद में डूब गई। कार्तिकेय की साँसें रुकी हुई थीं। वो हिल भी नहीं पा रहा था। उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।

वो बोला - 
अगर इसने आँखें खोल दीं…तो सब खत्म…।

वो बस वहीं…उसकी बाँहों में…बिल्कुल बेबस…पड़ा रहा। और शानवी…अपने सबसे बड़े रहस्य को सीने से लगाए सो रही थी…
बिना ये जाने…कि आज उसने एक इंसान को पकड़ा हुआ है।
कमरे में पूरी तरह सन्नाटा था। ठंड की हवा परदे हिला रही थी।
कार्तिकेय…शानवी की बाँहों में फँसा हुआ…हिल भी नहीं पा रहा था। उसकी साँसें बहुत हल्की थीं। वो डर रहा था…

वो बोला - 
बस ये आँखें न खोले…।

उसी वक्त…शानवी नींद में थोड़ी सी हिली।उसकी उँगलियाँ…
अनजाने में…कार्तिकेय के चेहरे पर चली गईं। उसकी उँगलियाँ…
गालों को छूने लगीं…जबड़े की लाइन…नाक…और फिर…भौंहें…
शानवी के माथे पर बल पड़ गईं।

नींद में ही उसके होंठ हिले —
ये…ये तो…cat नहीं है…।

उसकी उँगलियाँ रुक गईं। उसका दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
वो पूरी तरह जगी नहीं थी…लेकिन उसका दिमाग…खतरे की घंटी बजा रहा था।

वो बोली - 
ये इतना…अलग क्यों लग रहा है…?

कार्तिकेय की साँसें थम सी गईं। वो हिलना चाहता था…भाग जाना चाहता था…लेकिन…उसकी बाँहों में कैद था। और कहीं न कहीं…उसका दिल भी…उसी के पास रहना चाहता था। डर…और चाहत…दोनों के बीच…वो जकड़ा हुआ था। शानवी ने आँखें खोलने की कोशिश की…बस हल्की सी…उसी पल…कार्तिकेय ने पूरी ताकत लगाकर… खुद को उसकी पकड़ से छुड़ा लिया और…जैसे ही घड़ी ने 4 बजने का इशारा किया…वो फिर से…
सफेद बिल्ला बन गया। शानवी की उँगलियाँ…अब उसके नरम से बालों में थीं।

वो बुदबुदाई —
हम्म…सपना था…।

और फिर से सो गई। लेकिन उसका दिल…अब जानता था…
 कुछ तो बहुत गलत… और बहुत खास है। और कार्तिकेय…
कोने में बैठकर…काँप रहा था।

वो बोला - 
आज…बहुत पास आ गया था…।

To be continued.....

क्या शानवी सच जान लेगी?
क्या वो जान पाएगी कि कार्तिकेय इंसान है ना कि cat?
क्या सच जानने के बाद वो उसका साथ देगी ?

अगर आपको कहानी पसंद आ रही हो तो follow जरूर करें। और ऐसी ही और भी कहानी पढ़ते रहिए। और comment करके जरूर बताइए कि कहानी में आपको क्या अच्छा लगा...।
तब तक के लिए धन्यवाद ...🤗🤗🤗🤗