The Cat Who Turned Into a Human - 3 in Hindi Spiritual Stories by Sonam Brijwasi books and stories PDF | बिल्ली जो इंसान बनती थी - 3

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बिल्ली जो इंसान बनती थी - 3




सोमवार की सुबह थी। शानवी को ऑफिस जाना था।
वो एक इंजीनियर थी — समय की पाबंद और अपने काम में सीरियस। उसने हल्के रंग का सूट-सलवार पहना, बाल ठीक किए और तैयार होकर आई। फिर उसकी नजर बिस्तर पर सो रहे उस सफेद बिल्ले पर पड़ी।

शानवी बोली - 
तुम्हें अकेला छोड़ दूँ?

फिर मुस्कुराई।

बोली - 
नहीं… तुम्हें भी अपने साथ ले चलती हूँ।

उसने बिल्ले को गोद में उठाया। वो बिना किसी विरोध के… बस “म्याऊँ” करके चुप हो गया। शानवी ने उसका बैग तैयार किया और उसे अपने साथ ऑफिस ले गई।

उसने सोचा था —
मेरा अपना पर्सनल केबिन है… वहीं रख दूँगी।
वैसे भी ये कोई शरारती बिल्ली नहीं है।

ऑफिस में किसी को कुछ खास शक नहीं हुआ। शानवी सीधे अपने केबिन में चली गई। वहाँ उसने बिल्ले के लिए एक छोटा सा कोना बना दिया। थोड़ा दूध रखा… और एक कपड़ा बिछा दिया।
बिल्ला चुपचाप वहीं बैठ गया।
पर कोई नहीं जानता था…कि वही शांत सा बिल्ला… रात में एक इंसान बन जाता है। और कार्तिकेय…अपने चारों तरफ इस इंसानी दुनिया को बड़े ध्यान से देख रहा था। शानवी अपनी कुर्सी पर बैठकर काम में लग गई। लेकिन उसे ये एहसास नहीं था…कि आज का दिन…कुछ बहुत अजीब होने वाला है।

शानवी अपने लैपटॉप में डूबी हुई थी।कोड की लाइनों में उलझी…
टाइम का पता ही नहीं चला। उसी वक्त…टॉक! टॉक! दरवाज़ा खटका। शानवी कुछ बोल पाती, उससे पहले ही दरवाज़ा खुल गया। उसका सीनियर, रोहित, केबिन में आ गया।

रोहित बोला - 
शानवी, वो प्रोजेक्ट वाली फाइल—

वो बोलते-बोलते रुक गया। उसकी नजर… नीचे फर्श पर बैठे उस सफेद बिल्ले पर पड़ गई।

रोहित बोला - 
तुम ऑफिस में बिल्ली लेके आई हो?

वो हैरान हो गया। शानवी थोड़ा घबरा गई।

शानवी बोली - 
वो… ये बहुत शांत है सर। कोई दिक्कत नहीं करेगी…

रोहित कुछ कहता, उससे पहले…बिल्ला धीरे से उठा। सीधा चलकर…शानवी की टेबल के नीचे चला गया। और… उसने अपने पंजे से केबिन का दरवाज़ा अंदर से हल्का सा बंद कर दिया।
दोनों चौंक गए। रोहित की आँखें फैल गईं।

रोहित बोला - 
ये… ये तो समझदार बिल्ली है…।

शानवी हँसने की कोशिश करने लगी।

शानवी बोली - 
शायद इसे शोर पसंद नहीं…

लेकिन अंदर ही अंदर…उसे कुछ अजीब सा लगा। रोहित फाइल की बात करके चला गया। कमरे में फिर शांति हो गई। शानवी ने बिल्ले को गोद में उठा लिया।

वो मज़ाक में बोली - 
तुमने दरवाज़ा कैसे बंद किया, हाँ?

बिल्ला बस उसे देखता रहा। सीधा…गहरी नजरों से। जैसे… वो सब कुछ समझता हो। उस पल शानवी के दिल में पहली बार एक ख्याल आया…

शानवी बोली - 
ये बिल्ली… सामान्य नहीं है।

और कोने में बैठा कार्तिकेय… अपने मन में बस एक ही बात सोच रहा था —
मुझसे गलती हो गई…।

शानवी फिर से अपने काम में लग गई। स्क्रीन पर कोड, कान में हल्की-सी ऑफिस की आवाजें,और दिल में कहीं न कहीं वही सुबह वाली अजीब बात घूम रही थी। उसका सफेद बिल्ला चुपचाप नहीं बैठा। कभी वो आकर उसके पैरों के चारों तरफ घूमने लगता,
कभी हल्के से उसके पैर से रगड़ खा जाता। और कभी…वो अचानक उसके हाथ के पास आकर उसकी उँगलियाँ चाटने लगता। शानवी चौंककर उसकी तरफ देखती।

शानवी हँसते हुए बोली - 
अरे! क्या कर रहे हो तुम?

बिल्ला बस “म्याऊँ” करके फिर से नीचे उतर गया। कुछ देर बाद फिर वही। कभी उसके कुर्सी के पास, कभी टेबल के नीचे, कभी उसकी गोद में चढ़ने की कोशिश।
ऐसा लग रहा था जैसे…वो उसका ध्यान अपनी तरफ खींचना चाहता हो। शानवी काम करते-करते उसके सिर पर हाथ फेर देती।
पर हर बार जब वो उसकी आँखों में देखती…उसे लगता…जैसे वहाँ कोई इंसानी समझ छुपी हुई है।

एक पल के लिए उसे ख्याल आया —
कहीं ये सच में…?

वो खुद ही अपने ख्याल पर हँस दी।

वो बोली - 
पागल हो गई हूँ मैं…।

लेकिन कोने में बैठा कार्तिकेय…अपने दिल को समझा रहा था —
बस थोड़ा और संभल जाओ…
वरना ये सच जान जाएगी…।

शाम हो चुकी थी। ऑफिस का काम खत्म करके शानवी ने अपना बैग समेटा। फिर अपने सफेद बिल्ले को गोद में उठाया और घर के लिए निकल पड़ी। रास्ते भर बिल्ला शांत रहा। बस उसकी बाँहों में सिर रखकर बैठा रहा। घर पहुँचकर शानवी ने चैन की साँस ली।

वो अंदर गई और कपड़े निकालकर चेंज करने लगी। जैसे ही उसने सूट उतारना शुरू किया…बिल्ले की नजर उस पर पड़ी। एक पल के लिए वो जम सा गया। फिर… वो अचानक पलटा और खुद ही कमरे से बाहर चला गया। शानवी ने हैरानी से उसे देखा।

वो हँसकर बोली - 
अरे? तुम क्यों बाहर जा रहे हो?
बिल्ली को भी शर्म आती है क्या?

वो ये सोचकर मुस्कुरा दी। पर उसे क्या पता था…वो कोई साधारण बिल्ली नहीं थी। वो… एक इंसान था। और कार्तिकेय…

दरवाज़े के बाहर खड़ा, दिल तेज़ धड़कता हुआ सोच रहा था —
अगर मैं रुक गया… तो ये सब समझ जाएगी…।

कमरे के अंदर शानवी बेफिक्र थी…और बाहर…एक इंसान, बिल्ली के रूप में, खुद को छुपाने की पूरी कोशिश कर रहा था।