Billi jo Insaan banti thi - 2 in Hindi Drama by Sonam Brijwasi books and stories PDF | बिल्ली जो इंसान बनती थी - 2

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बिल्ली जो इंसान बनती थी - 2



कमरे में अंधेरा धीरे-धीरे फैल रहा था। शानवी खाना बनाकर टीवी के सामने बैठ गई। उसका बिल्ला… यानी कार्तिकेय…
चुपचाप एक कोने में बैठा उसे देख रहा था। वो घड़ी की तरफ देखता।

बार-बार।
⏰ 10:30… 11:15… 11:50…
उसके दिल की धड़कन तेज़ होती जा रही थी।

कार्तिकेय बोला - 
बस थोड़ा सा और…फिर मैं खुद नहीं रहूँगा…
फिर मैं वो बन जाऊँगा… जो मैं असल में हूँ…।

वो मन ही मन सोच रहा था —
कितना अजीब है…दिन में मैं उसके पैरों के पास घूमता हूँ,
और रात में… उसी के पास बैठकर उसे देख भी नहीं सकता…।

शानवी सोने की तैयारी करने लगी। उसने लाइट बंद की और बिस्तर पर लेट गई। कार्तिकेय भी आकर बिस्तर के पास लेट गया। ⏰ 12 बजने में बस कुछ पल बाकी थे। उसकी साँसें भारी हो गईं।

वो बोला - 
अगर एक दिन ये सच जान गई…
तो क्या मुझे अपनाएगी?
या मुझसे डर जाएगी…?

घड़ी ने 12 बजाए। कमरे में वही हल्की सी रोशनी फैली…
और वो फिर से… इंसान बन गया। कार्तिकेय चुपचाप बैठा रहा।
शानवी उसकी तरफ पीठ करके सो रही थी। वो उसे देखता रहा।
बहुत देर तक। उसका मन हुआ… उसके सिर पर हाथ फेर दे।

बस एक बार कह दे —
मैं यहीं हूँ…

उसने धीरे से हाथ बढ़ाया…बस एक पल…लेकिन फिर…वो खुद को रोक लिया। हाथ हवा में ही रुक गया।

वो बोला - 
नहीं… अभी नहीं…ये सब नहीं जान पाएगी…।

वो उठकर खिड़की के पास चला गया। शानवी करवट बदली..कुछ बुदबुदाई…पर फिर गहरी नींद में चली गई। उसे ज़रा सा भी एहसास नहीं हुआ…कि उसकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा रहस्य…उसी कमरे में, उसी पल…जाग रहा था।

खिड़की के पास खड़ा कार्तिकेय आसमान को देख रहा था।चाँद पूरा था…और उसी चाँद से जुड़ा था उसका दर्दनाक अतीत।

कार्तिकेय बोला - 
सब कुछ कितना अच्छा था…जब मैं सिर्फ इंसान था…।

उसकी आँखों में पुरानी यादें उतर आईं…

🌙 कुछ साल पहले…
कार्तिकेय एक साधारण लड़का नहीं था।
वो एक राजघराने से था — सच में किसी राजकुमार जैसा।
अमीर, पढ़ा-लिखा, और दिल से बहुत नरम। लेकिन उसका दिल एक ऐसी लड़की से लग गया था…जो एक तांत्रिक की बेटी थी।
लड़की उससे सच्चा प्यार करती थी। पर उसका पिता… इंसानों से नफरत करता था। जब उसे उनके प्यार के बारे में पता चला…

तो उसने कार्तिकेय से कहा —
या तो मेरी बेटी को छोड़ दो…या फिर अपनी इंसानियत।

कार्तिकेय नहीं माना।
उस रात…गुस्से में उस तांत्रिक ने एक काला मंत्र किया।

और कार्तिकेय को शाप दे दिया —
दिन में तू एक तुच्छ जानवर रहेगा…और रात में थोड़ी देर के लिए इंसान बनेगा…जब तक कोई तुझे दिल से अपनाकर तेरे असली रूप को स्वीकार न कर ले…।

अगली सुबह…कार्तिकेय बिल्ली बन चुका था।

🌙 वापस वर्तमान में…

कार्तिकेय की आँखों से एक आँसू गिर पड़ा।

कार्तिकेय बोला - 
अब सवाल ये है…क्या शानवी…मुझे उस रूप में भी अपना पाएगी…?

कमरे में शानवी चैन से सो रही थी…और एक शापित राजकुमार…उसी कमरे में, अपनी किस्मत से लड़ रहा था।
कार्तिकेय खिड़की के पास खड़ा था। चाँदनी उसकी आँखों में उतर रही थी…और उसी चाँद के साथ…एक और याद…जो वो भूलना चाहता था…पर कभी भूल नहीं पाया। उसका दिल काँप गया।

कार्तिकेय बोला - 
सिर्फ मुझे ही शाप नहीं मिला था…उसने… अपनी ही बेटी को भी नहीं छोड़ा था…।

उसकी आँखों के सामने वो रात फिर से ज़िंदा हो गई…

🌑 उस रात…

वो तांत्रिक पागल हो चुका था।

जब उसकी बेटी ने साफ-साफ कह दिया था —
मैं कार्तिकेय से प्यार करती हूँ… और उसी की रहूँगी…।

तो उसकी आँखों में खून उतर आया था।

तांत्रिक बोला - 
तूने एक इंसान को चुना है…तो तू भी इंसान नहीं रहेगी…।

उसने अपनी ही बेटी को मंत्रों से बाँध दिया। कार्तिकेय कुछ कर नहीं पाया। वो चीखता रहा… गिड़गिड़ाता रहा…लेकिन वो तांत्रिक…उसे घसीटकर हवन की भट्टी के पास ले गया। लड़की रो रही थी…चिल्ला रही थी…।

लड़की बोली - 
पापा! प्लीज़! मुझे मत मारो!

लेकिन उस आदमी के दिल में अब कुछ बचा ही नहीं था।और…
उसने अपनी ही बेटी को  जलती हुई भट्टी में धकेल दिया।उसकी चीखें…आज भी कार्तिकेय के कानों में गूँजती थीं। उसी आग की रोशनी में…तांत्रिक ने आखिरी मंत्र पढ़ा…और सब खत्म हो गया।

🌑 वर्तमान में…
कार्तिकेय की मुट्ठियाँ काँप रही थीं। उसकी आँखों से आँसू गिर रहे थे।

कार्तिकेय बोला -
मैं उसे बचा नहीं पाया…और उसकी कीमत… आज भी चुका रहा हूँ…।

पीछे बिस्तर पर शानवी सो रही थी। बेफिक्र… मासूम…और कार्तिकेय…एक शापित आत्मा की तरह…डर रहा था कि कहीं
इस कहानी का अंत भी…फिर से आग में न हो।