सुबह की धूप खिड़की से अंदर आ रही थी। शानवी की आँख खुली…लेकिन आज…उसका मन अजीब सा भारी था।
जैसे कोई बात अधूरी रह गई हो। वो कुछ पल छत को देखती रही…फिर करवट बदली। और उसकी नजर…अपने पास सो रहे उस सफेद बिल्ले पर पड़ी। कार्तिकेय। वो अभी भी चैन से सो रहा था। शानवी उसे देखने लगी। बहुत ध्यान से।उसका चेहरा…
उसकी आँखें…उसकी नाक…सब कुछ वही था…लेकिन फिर भी…
उसके दिल में एक आवाज़ आई —
कल रात…जब मैंने छुआ था…ये… ऐसा नहीं लग रहा था…।
उसका दिल तेज़ धड़कने लगा। वो याद करने की कोशिश करने लगी…नींद…आधी होश…और…
👉 किसी सख्त से कंधे का एहसास…
👉 किसी गर्म साँसों का…
वो झटके से बैठ गई।
वो बोली -
नहीं… ये कैसे हो सकता है…?
उसने फिर से बिल्ले को देखा।
वो बोली -
वो छोटा सा… मुलायम सा…पर कल रात…ये इतना भारी क्यों लग रहा था…?”
उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया…और उसके सिर को सहलाया।
नरम…बहुत नरम।
वो बोली -
नहीं…मैं ही थकी हुई थी…
उसने खुद को समझा लिया। लेकिन…उसका दिल…मानने को तैयार नहीं था। कोने में बैठा कार्तिकेय…सब देख रहा था।
और सोच रहा था —
अब ये शक…रुकने वाला नहीं है…।
शानवी ने डर के बावजूद…अपनी आदत नहीं बदली। वो अब भी छुप-छुप कर अपने बिल्ले को ऑफिस ले जाती थी। हाँ… अब वो थोड़ा ज्यादा सावधान रहती थी।
ऑफिस में उसके तीन ही ऐसे दोस्त थे जिन्हें ये बात पता थी —
तनय, मानव और कृतिका।
तीनों को वो सफेद बिल्ला बहुत पसंद था।
कृतिका बोलती -
यार, ये तो बहुत ही cute है!
कृतिका हर बार उसे गोद में उठाने की कोशिश करती।
मानव बोला -
और बहुत समझदार भी…
मानव हँसकर कहता। कार्तिकेय बस चुपचाप सबको देखता रहता। शानवी उसे अपने केबिन में, टेबल के नीचे या कुर्सी के पास ही रखती। सबसे अजीब बात ये थी…जैसे ही किसी के कदमों की आहट होती…बिल्ला तुरंत सतर्क हो जाता।कभी फाइलों के पीछे…कभी कुर्सी के नीचे…कभी अलमारी और दीवार के बीच की छोटी सी जगह में…वो तुरंत छिप जाता।
इतनी जल्दी…इतनी समझदारी से… कि शानवी के दोस्त भी हैरान हो जाते।
तनय बोला -
ये बिल्ली नहीं है… ये तो निंजा है!
तनय मज़ाक करता। सब हँस देते।लेकिन शानवी…बस हल्की सी मुस्कुरा देती।
उसके दिल में फिर वही ख्याल आता —
ये इतना समझदार क्यों है…?
और कोने में छिपा कार्तिकेय…
मन ही मन सोचता —
मुझे हर हाल में…अपने राज़ को छुपाए रखना है…
क्योंकि अब…शानवी बहुत करीब आ चुकी थी। उस दिन शानवी अपने केबिन में अलमारी में कुछ फाइलें ढूँढ रही थी। वो नीचे झुककर एक-एक फोल्डर देख रही थी। उसी वक्त… उसका सफेद बिल्ला चुपचाप उछलकर अलमारी के ऊपर चढ़ गया।
शानवी का ध्यान उस पर नहीं था। अचानक…
धड़ाम!
अलमारी के ऊपर रखी कुछ फाइलें नीचे गिर पड़ीं।
शानवी चौंककर सीधी खड़ी हो गई।
शानवी बोली -
अरे! ये कैसे गिर गईं?
उसी पल…केबिन के बाहर से किसी के कदमों की आवाज़ आई।
वो घबरा गई।
वो बोली -
Oh no…
उसने जल्दी से ऊपर देखा। बिल्ला अलमारी के ऊपर बैठा था।
और ठीक उसी वक्त…दरवाज़ा खुलने लगा।
शानवी ने फटाफट बिल्ले की तरफ देखा और फुसफुसाई —
नीचे आओ! जल्दी!
बिल्ला एक सेकंड भी नहीं रुका। वो फुर्ती से कूदकर सीधा टेबल के नीचे चला गया। दरवाज़े से रोहित झाँकने लगा।
रोहित बोला -
सब ठीक है? कुछ गिरने की आवाज़ आई…
शानवी ने जल्दी से फाइलें उठाते हुए कहा —
हाँ… वो फाइलें हाथ से छूट गईं।
रोहित ने अंदर देखा…कुछ सेकंड तक…फिर चला गया।
दरवाज़ा बंद हुआ। शानवी ने राहत की साँस ली।वो नीचे झुकी…
और बिल्ले को गोद में उठा लिया।
वो धीमे से बोली -
तुम मेरी जान ले लोगे एक दिन…
लेकिन उसके दिल की धड़कन अब भी तेज़ थी। और बिल्ला…
उसकी आँखों में देखकर…कुछ ऐसा लग रहा था… जैसे वो सॉरी कह रहा हो। शानवी ज़मीन पर गिरी हुई फाइलें समेट रही थी।
एक-एक करके उन्हें सही जगह रखने लगी। उसी वक्त…उसका सफेद बिल्ला आकर एक फाइल के ऊपर बैठ गया।
शानवी बोली -
अरे हटो… ये भी रखनी है…
शानवी ने उसे हल्के से हटाना चाहा। लेकिन उसकी नजर…उस फाइल के कवर पर लिखे नाम पर पड़ गई। वो एक पल के लिए रुक गई।
Kartikey Singh Thakur
(Senior Computer Engineer)
शानवी की भौंहें सिकुड़ गईं।
वो बोली -
ये… ये नाम…?
उसने फाइल खोली। अंदर लगी हुई फोटो पर उसकी नजर पड़ते ही…वो सन्न रह गई। एक बहुत हैंडसम सा लड़का।तीखी आँखें…
शांत चेहरा…और कहीं देखा हुआ सा एहसास… उसका दिल अजीब तरह से धड़कने लगा।
वो बोली -
ये… ये कौन है…?
और ये हमारी कंपनी में कब से…?
उसने दिमाग पर ज़ोर डाला।
वो बोली -
ऑफिस में तो इस नाम का कोई सीनियर है ही नहीं…
और न ही… इस शक्ल का कोई…
उसने फिर से फोटो को देखा। अजीब बात ये थी…उस चेहरे को देखते ही…उसे वही सुकून और घबराहट एक साथ महसूस हुई…
जो उसे अपने बिल्ले के पास महसूस होती थी। उसी पल..बिल्ला फाइल के ऊपर बैठा हुआ…उसे बिल्कुल उसी तरह देख रहा था।
शानवी ने धीरे से उसकी तरफ देखा…फिर फोटो की तरफ…
फिर बिल्ले की तरफ…उसका दिल ज़ोर से धड़क उठा।
वो बोली -
नहीं…ये… ये तो पागलपन है…
उसने फाइल बंद कर दी। लेकिन अब…उसके मन में एक बीज पड़ चुका था। एक ऐसा शक…जो अब किसी भी हालत में चुप रहने वाला नहीं था। और कार्तिकेय…वो सब देख चुका थाउसकी आँखों में डर साफ़ था।
वो मन में बोला -
उसे… मिल ही गया…
आपको क्या लगता है -
क्या शानवी कार्तिकेय का राज जान पाएगी या नहीं?
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