{रहे तेरी दुआ मुझ पर - जोदाहवां हिस्सा}
{जादूई ताकत का हकदार और गुलनाज की शैतानी}
💓[फलेशबेक जारी]💓
नूर उस जिन्न के अक्स की बात सुन हैरान नही हुई उसे भी कही ना कही ये मालूम था कि शायद वह भी इस ताकत की हकदार नही है उसे किसी तरह ये मालूम करना था आखिर
वह क्यू नही है इस ताकत की हकदार और अगर वह नही तो और कौन है जो इस ताकत का असली हकदार, येही बात वह उन करामाती जिन्नो के अक्सो से पूछती है .
नूर,, अगर मै इस ताकत की हकदार नही हूँ तो कौन है वह जिसे इस ताकत के लिए चूना गया है ? कौन है वो जो उस शैतान जादूगर जोहरान को खत्म करेगा ? जिसने मेरे अम्मी अब्बा को मारा है, और हमारे कुहेद कबिले के सभी जिन्नो को खत्म कर, आखिर मे कुहेद को भी खत्म कर दिया है .
जिन्न का अक्स,, तुम्हारे लिए इतना जान लेना काफी है कि वह एक इंसानी शरीर के साथ पैदा होगा और उसमे जिन्नो का हिस्सा (अंश) मोजूद होगा जो एक इंसान होते हुए भी एक जिन्न होगा और वो भी कोई आम सा जिन्न नही एक करामाती जिन्न जो कुहेद कबिले को फिर से आबाद करेगा
इस कबिले के दुश्मनो को खत्म करेगा, तुम्हे सिर्फ उसे ढूंढना है और जब वह तुम्हे मिल जायेगा तुम खुद हमसे मिलने आओगी फिर आगे क्या करना है तब हम तुम्हे बतायेंगे, अब से इस ताकत को काबू करना छोड़ दो, और उस गुफा मे जाने की जिद भी तुम्हे उस गुफा सिर्फ वो ही लेकर जायेगा, तो जाओ और ढूंढो उसे,,,,,,,,,
करमाती जिन्नो के अक्स ने नूर ये तो बता दिया था कि वह एक इंसान होगा जिसमे जिन्नो का हिस्सा( अंश) मोजूद होगा, मगर वह कौन होगा और उसे वह कहा मिलेगा इस बात से परदा नही हटाया, बस उसे ढूंढ़ने का हुक्म सुना दिया,नूर फिर उस जगह से अपने कमरे मे आ जाती है, वह पहले से भी कही ज्यादा जख्मी हो चुकी थी उससे भी ज्यादा परेशानी की बात थी कि उसके ज्खम भर नही रहे थे
शायद उसने अपनी ताकत का ज्यादा इस्तेमाल कर लिया था, अब यूही दर्द से करहाते हुए वही सो गई .
इधर सुबह का वक्त हुआ तो जाहिद के अब्बा उसका इन्तेजार कर रहे थे नाश्ते की टेबल पर, और दुकान पर भी जाने का वक्त हो रहा था, मगर वह अपनी तक नही उठा था, वह जानते थे कि कल उसकी तबीयत बिगड़ गई थी वह रात को देर से घर आये थे जाहिद उस वक्त सो चूका था वह उसका हाल भी नही पूछ पाये, उन्हे अपनी बीवी और बेटी गुलनाज से जाहिद के बेहोश होने की खबर मिली, जिससे उन्हे जाहिद की तबीयत की और फिक्र होती है, इसलिए वह कुछ दिनो के लिए उसे दुकान पर ना आने का फैसला करते है और यह खबर गुलनाज को अपने भाई को बताने के लिए कहते है जिससे गुलनाज को ये खबर अपने भाई को सुनाने पर एक और इनाम की उम्मीद दिखाई पड़ती है वह मन ही मन मुस्कुराती है, और अपने अब्बा को कहती है,, जी अब्बा जैसे ही भाई उठते है मे ये खबर उन्हे दे दूंगी .
फिर अब्बा के जाने के बाद गुलनाज अपने भाई के कमरे की ओर जाती है दरवाजे को खटखटाती है मगर दरवाजा खुला ही था जाहिद अभी तक घोड़े बेचकर सो रहा था या यू कहे वह नूर के ख्वाबो मे डूबा हुआ था और सोते हुए भी उसकी मुस्कुराहट बता रही थी की वह नूर का ही ख्वाब देख रहा है, भाई को सोते हुए मुस्कुराते देखकर गुलनाज के चेहरे पर भी मुस्कान आ जाती है, मगर अब उसके मन मे एक खुराफाती ख्याल आता है जिससे वह अपने भाई फिर से परेशान कर सके .
गुलनाज जोर से चिल्लाकर,, भाई भाई भाई जल्दी उठो
जल्दी सुबह के दस बज चूके है, बाहर अब्बा तुम्हारा इन्तेजार कर रहे है वो भी बहुत गुस्से मे, लगता है आज तुम्हारी खैर नही,
बेचारा जाहिद गुलनाज की आवाज सुन अपनी आंखे खोल घड़ी की तरफ देखता है जो वाकेही सुबह के दस बजा रही थी, वह अपना बिस्तर छोड़ जल्दी जल्दी बिना गुलनाज पर ध्यान दिये अपने कपड़े उठा गुसलखाने मे घूस जाता है, और तैयार होते ही बरामदे मे भागता हुआ जाता है, उसके अब्बा हमेशा उसका वही इन्तेजार करते है, मगर वहा कोई नही था, तो वह तो अन्दर की तरफ आता है, फिर वह खाने की टेबल की तरफ जाता है, मगर दोनो ही जगह उसे अब्बा
दिखाई नही देते है, वह सोचता है कि,, लगता है शायद अब्बा मेरा इन्तेजार करते करते दुकान पर चले गए, और वह जरूर मुझसे गुस्सा होंगे, लगता है आज दुकान पर ही तमाशा बनेगा मेरा, बेटा जाहिद कमर कस ले आज तो तुफान आने वाला है तुझ पर अब तो खुदा ही बचाये तुझे तो ठीक वरना अब्बा आज नही छोड़ने वाले, वह यह सब सोचता हुआ अपना सर खुजाये जा रहा था इधर दूर खड़ी गुलनाज अपने भाई को इस हालत मे देख हंस रही थी .
जब जाहिद की अम्मी रसोई से बाहर आयी तो उन्होंने जाहिद को देखा तो उन्होंने जल्दी से उसके माथे पर हाथ रखकर देखा और कहा,, बुखार तो नही है तुम्हे फिर ये और तुम्हारी तबीयत भी ठीक लग रही है फिर ये क्या सोच कर अपना सर खुजाये जा रहे हो सब ठीक तो है ना मेरे बच्चे जाहिद कही सर तो दर्द नही कर रहा, लाओ मै तुम्हारे सर की मालिश कर देती हूँ तुम्हे थोड़ा आराम मिलेगा.
जाहिद,, अम्मी मै ठीक हूँ मेरे सिर मे कोई दर्द वर्द नही है मुझे तो अब्बा की वजह से परेशान हूँ, मुझे आज उठने मे देर हो गई और आपने भी नही उठाया, लगता है अब्बा गुस्से मे ही दुकान पर चले गए और आज दुकान पर ही मेरी खूब खबर ली जायेगी वो सबके सामने, क्या इज्जत रहे जायेगी मेरी दुकान पर काम करने वाले लड़को और ग्राहाको के समाने बताइये आप .
जाहिद की अम्मी ने पहले जाहिद की बात सूनी फिर दूर खड़ी हुई गुलनाज की तरफ नजर दोड़ाई जो अपने भाई की हालत पर हंस रही थी तब उन्हे सारा माजरा समझ आया कि ये जरूर गुलनाज की शरारत है शायद उसने अपने भाई को अब्बा की खबर नही दी जो कुछ दिनो के लिए जाहिद दुकान पर ना आने को कहा था ताकि जाहिद कुछ दिन आराम कर सके मगर गुलनाज ने उसे कोई खबर नही दी उलटा उसे परेशान कर दिया, वह सोचती है,, मेरा प्यारा बच्चा कितना परेशान खड़ा है अपने अब्बा के डर अभी इस गुलनाज की इसकी शरारते दिन बा दिन बड़ती जा रही है .
जाहिद की अम्मी गुस्से से,, गुलानाज इधर आओ जरा .
गुलनाज अपनी अम्मी की तरफ जाती है उसे पता था अब उसकी अम्मी उसकी खबर लेगी, मगर उसका प्लान तो काम कर गया था जो था अपने बड़े भाई को परेशान करना,
वह मन्द मन्द मुस्कुराती हुई अम्मी के पास जाती है .
पास उसकी अम्मी उसका कान पकड़कर मोड़ देती है और कहती है,, क्यू री गुलनाज की बच्ची तेरी शरराते कभी खत्म नही होगी ना तू आये दिन अपने भाई को परेशान करती रहती है देख क्या हालत है उसकी कल से वो बिमार पड़ा उपर से तेरी शरारत उसका जीना मुस्किल कर देती है,
गुलनाज अपनी से माफी मांगती है,, अम्मी माफ कर दो अब नही करूंगी भाई को परेशान मै कसम खाती हूं .
बेचारा जाहिद खड़ा गुलनाज को अम्मी से डांट खाते देख रहा था कि माजरा क्या है फिर वह उनसे पूछता है,, कि आखिर हो क्या रहा है और उसमे गुलनाज का मुझे परेशान करने वाली बात क्या है, तब उसकी अम्मी कहती है,, ये ही बतायेगी कि क्या बात है .
गुलनाज,, वो भाई वो
जाहिद,, वो क्या चल क्या रहा है बताओ गुलनाज ?
गुलनाज,, वो भाई कल आपकी तबीयत खराब थी ना और आप बेहोश भी हो गये थे जब अब्बा को अपके बेहोश होने की खबर लगी तो वह आपके कमरे मे भी गये थे आपको देखने मगर आप सो रहे थे उन्हे आपकी बहुत परवाह हो रही थी इसलिए अब्बा ने आपको कुछ दिन दुकान पर ना आने के लिए कहा है ताकि आप घर पर रहेकर आराम करे ताकि आपकी तबीयत जल्दी ठीक हो जाये .
जाहिद गुलनाज की बात सुनकर,, तू मुझे अब बता रही है जब मुझे जल्दी जल्दी उठाया तब नही बता सकती थी, मै यहा कितना परेशान हो रहा था कही अब्बा मुझसे गुस्सा तो नही हो रहे होंगे और तू मेरे मजे ले रही है तूझे मै अभी बताता हूं बहुत परेशान करने लगी है तू मुझे .
फिर पास रखे सोफे से एक कुशन उठाता और गुलनाज को मारने के उसके पिछे छोड़ता है, गुलनाज अपने कान पकड़र माफी मागती हुई भागने लगती है और इसी तरह दोनो भाई बहन के झगडते है फिर जाहिद उसे माफ कर देता है और अपने कमरे मे आ जाता है फिर वह सोचता है,, आज उसे दुकान पर नही जाना पड़ेगा क्यू ना इसका फायदा उठा नूर के घर जाया जाये और वह अपनी सोच से खुश होता है फिर कुछ वक्त बाद अम्मी को दवा का बोलकर नूर के घर के लिए निकल जाता है और रास्ते से कुछ फल भी लेता जाता है .
कहानी जारी है.......✍️