Mout ki Dastak - 15 in Hindi Horror Stories by kajal jha books and stories PDF | मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 15

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 15

रात का साया पटना से थोड़ी दूर, बिहार के एक छोटे से गांव में, जहां जंगल घना था और नदी का पानी रात में काला हो जाता था, वहां की पुरानी हवेली के बारे में हर कोई डरता था। हवेली का नाम था 'काली कोठी'। लोग कहते थे कि वहां रात को एक औरत की सिसकियां सुनाई देती हैं, और जो भी अंदर घुसता है, वो कभी लौटकर नहीं आता। लेकिन रवि को इन बातों पर यकीन नहीं था। वो पटना का एक युवा इंजीनियर था, जो गांव में अपनी दादी के अंतिम संस्कार के लिए आया था। दादी ने मरते वक्त कहा था, "रवि, काली कोठी में मत जाना। वहां का राज़ तेरी जिंदगी बर्बाद कर देगा।"रवि हंसा था। "दादी, ये सब अंधविश्वास है। मैं तो देखकर आऊंगा।" गांव वाले उसे रोकते रहे, लेकिन रवि की जिद्द ने सबको चुप करा दिया। एक रात, चांदनी रात थी, लेकिन बादल घने थे। रवि ने टॉर्च, मोबाइल और एक लाठी ली और हवेली की ओर चल पड़ा। जंगल का रास्ता सुनसान था। पेड़ों की डालियां हवा में सरसरातीं, मानो कोई फुसफुसा रहा हो। दूर से कुत्तों के भौंकने की आवाजें आ रही थीं। रवि का दिल तेज धड़क रहा था, लेकिन वो खुद को समझाता, "ये सब मन का वहम है।"हवेली का मुख्य द्वार जंग लगे लोहे का था। धक्का मारते ही वो खुल गया, जैसे किसी ने इंतजार किया हो। अंदर अंधेरा घना था। रवि ने टॉर्च जलाई। दीवारें काली थीं, जcobwebs हर तरफ लटक रही थीं। फर्श पर धूल की मोटी परत। वो सीढ़ियों की ओर बढ़ा। अचानक, ऊपर से एक ठंडी हवा का झोंका आया। रवि रुक गया। "कौन है?" उसने पुकारा। जवाब में सिर्फ सन्नाटा। लेकिन फिर... एक हल्की सी सिसकी। "हुंह... हुंह..." रवि का खून जम गया। वो ऊपर चढ़ा। पहली मंजिल पर एक बड़ा सा कमरा। बीच में पुराना पलंग। उस पर सफेद साड़ी बिछी हुई। रवि नजदीक गया। साड़ी पर खून के धब्बे थे। पुराने, सूखे हुए।तभी, कमरे के कोने में एक छाया हिली। रवि ने टॉर्च घुमाई। वहां कोई नहीं था। लेकिन हवा में ठंडक बढ़ गई। "कौन है भूत-प्रेत? दिखाओ!" रवि ने हिम्मत जुटाई। अचानक, आईने में उसकी परछाईं के पीछे एक औरत का चेहरा नजर आया। लंबे बाल, सफेद साड़ी, आंखें खाली। रवि पलटा। कोई नहीं। दिल की धड़कन तेज। वो भागा, लेकिन दरवाजा बंद हो गया। धम-धम की आवाजें आने लगीं। सीढ़ियों से। कोई ऊपर आ रहा था। रवि ने लाठी तान ली।"रवि... रवि..." एक मीठी आवाज आई। रवि चौंक गया। ये आवाज... दादी की? नहीं, ये किसी जवान औरत की थी। कमरे में लाइट फ्लिकर करने लगी, भले ही बिजली न हो। औरत प्रकट हुई। सुंदर, लेकिन चेहरा पीला। "मुझे बचाओ, रवि। वो मुझे मार डालेंगे।" रवि स्तब्ध। "तुम कौन हो? मुझे कैसे जानती हो?" औरत मुस्कुराई। "मैं रानी हूं। इस हवेली की मालकिन। 50 साल पहले, मेरे पति ने मुझे यहां मार डाला। सोने की लालच में। वो मेरी चूड़ियां और हार ले गए। अब वो लौट आए हैं। तुम्हें भी मार देंगे।"रवि को याद आया। दादी की कहानी। गांव में एक जमींदार था, जिसकी बीवी रानी गायब हो गई। लोग कहते थे भूतनी है वो। रवि ने पूछा, "तुम्हारा पति कौन?" रानी ने इशारा किया। कोने में एक तस्वीर। जमींदार का चेहरा... रवि के दादाजी जैसा! रवि का दिमाग घूम गया। "नहीं... ये झूठ है।" लेकिन रानी रोने लगी। "देखो निशान। मेरी गर्दन पर।" उसने साड़ी हटाई। लाल निशान, गले के चारों ओर। ठीक वैसा ही, जैसा दादी ने बताया था।अचानक, दरवाजा खुला। बाहर गांव वाले थे। "रवि, भागो! रात के 12 बज गए।" लेकिन रवि अंदर ही अटका। रानी ने कहा, "मेरा हार ढूंढो। तभी मुक्ति मिलेगी। तहखाने में है।" रवि नीचे भागा। तहखाना अंधेरी गुफा जैसा। चूहों की चीं-चीं। बीच में एक सन्दूक। खोला। सोने का हार। चमकदार। जैसे जिंदा हो। तभी पीछे से हाथ पड़ा। कोई मर्द की आवाज। "वो मेरा है!" रवि पलटा। एक बूढ़ा आदमी, जमींदार जैसा। आंखें लाल। "तू कौन?" रवि चिल्लाया। "मैं तेरा दादा। रानी को मैंने मारा था। अब तुझे मारूंगा। हार दे दे!"लड़ाई शुरू हो गई। बूढ़ा असाधारण ताकतवान। रवि को पटक दिया। हार छीन लिया। लेकिन रानी प्रकट हुई। "अब काफी हुआ!" उसने चिल्लाया। हवा तेज हो गई। बूढ़ा चीखा। उसका शरीर जलने लगा। आग की लपटें। हार रवि के हाथ में आ गया। बूढ़ा राख हो गया। रानी मुस्कुराई। "धन्यवाद। अब मैं मुक्त हूं।" वो गायब हो गई। हवेली हिलने लगी। रवि बाहर भागा। गांव वाले इंतजार कर रहे थे।सुबह हुई। रवि ने सब बताया। हार दिखाया। गांव वाले दंग। वो हार असली था, लाखों का। लेकिन रवि ने नीलाम करवा दिया। गांव के स्कूल के लिए। हवेली अब खंडहर। लेकिन रात को अभी भी सिसकियां सुनाई देती हैं? नहीं। अब शांति है। रवि पटना लौटा। लेकिन कभी-कभी सपने में रानी आती। मुस्कुराती। "शुक्रिया, रवि।"कहानी खत्म? नहीं। एक रात रवि के घर चांदी की चूड़ियां गायब हो गईं। सुबह बिस्तर पर मिलीं। रानी की। और एक नोट: "अगली कहानी तेरी है।"