Love of Old Haveli in Hindi Short Stories by kajal jha books and stories PDF | पुरानी हेवेली का प्रेम

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पुरानी हेवेली का प्रेम

पुरानी हवेली का प्रेम: एक अधूरी दास्तान
पहाड़ों की तलहटी में बसी वह पुरानी हवेली सालों से वीरान पड़ी थी। लोग कहते थे कि उस हवेली की दीवारों में दर्द और चीखें दफन हैं। शहर की भागदौड़ से दूर, राहुल ने जब उस हवेली को खरीदा, तो उसे लगा कि यहाँ उसे शांति मिलेगी। लेकिन उसे क्या पता था कि वह शांति केवल एक तूफान के आने की आहट थी।
रात का वह रहस्यमयी संगीत
पहली ही रात से राहुल को कुछ अजीब महसूस होने लगा। जैसे ही रात का सन्नाटा गहराता, हवेली की ऊपरी मंजिल से एक मीठी और सुरीली आवाज गूंजने लगती। कोई लड़की बहुत ही दर्द भरा प्रेम गीत गा रही थी। वह आवाज इतनी मोहक थी कि राहुल चाहकर भी उसे नजरअंदाज नहीं कर पाता।
कई दिनों तक राहुल ने खुद को रोका, लेकिन एक रात चाँदनी इतनी धुंधली थी और वह आवाज इतनी बेबस, कि उसने हिम्मत जुटाई। हाथ में टॉर्च लेकर वह हवेली के उस हिस्से की ओर बढ़ा जहाँ कोई नहीं जाता था—उत्तर का कमरा।
खून से सने चित्र और अनन्या का दीदार
कमरे का दरवाजा भारी था और खुलते ही एक अजीब सी गंध आई। कमरे के अंदर की दीवारें अजीबोगरीब चित्रों से भरी थीं। वे चित्र सुंदर थे, लेकिन उनमें इस्तेमाल किया गया लाल रंग किसी साधारण पेंट जैसा नहीं था—वे खून से सने प्रतीत होते थे।
अचानक, कमरे का तापमान गिर गया। राहुल ने टॉर्च घुमाई तो सामने एक धुंधली आकृति खड़ी थी। धीरे-धीरे वह आकृति साफ हुई। वह अनन्या थी। रेशमी बाल, पीला चेहरा और आँखों में एक ऐसी उदासी जिसे देख पत्थर का दिल भी पिघल जाए।
"तुम यहाँ क्यों आए राहुल? क्या तुम्हें अपनी जान प्यारी नहीं?" उसकी आवाज में सिसकियाँ थीं।
एक खौफनाक अतीत
अनन्या ने बताया कि 50 साल पहले इसी कमरे में उसके साथ विश्वासघात हुआ था। वह किसी से प्रेम करती थी, लेकिन उसके परिवार ने उसके प्रेमी की हत्या कर दी और उसे भी तड़प-तड़प कर मरने के लिए छोड़ दिया। उसकी आत्मा इसी हवेली में कैद होकर रह गई।
"इतने सालों में मैंने यहाँ कई लोगों को मरते देखा है," अनन्या ने कहा, उसकी आँखों से खून के आंसू टपकने लगे। "लेकिन तुम्हारी मासूमियत ने मेरा दिल जीत लिया। मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ, राहुल। पर मेरा प्यार मौत है। अगर तुम यहाँ रुके, तो मैं चाहकर भी तुम्हें नहीं बचा पाऊँगी।"
प्यार और बलिदान
राहुल डर से कांप रहा था, लेकिन अनन्या की दास्तान सुनकर उसे डर से ज्यादा उसके लिए सहानुभूति महसूस हुई। वे रातें भर बातें करने लगे। राहुल उसे बाहरी दुनिया की बातें बताता और अनन्या उसे पुराने जमाने के प्रेम के किस्से सुनाती।
एक अमावस की रात, अनन्या बहुत कमजोर लग रही थी। उसने कांपती आवाज में कहा, "राहुल, मुझे इस कैद से मुक्ति चाहिए। मेरी आत्मा तब तक आजाद नहीं होगी जब तक कोई स्वेच्छा से मुझे अपना जीवन (रक्त) न दे दे। क्या तुम मुझे मुक्ति दोगे?"
राहुल जानता था कि यह उसकी आखिरी रात हो सकती है। उसने निडर होकर अपना हाथ आगे बढ़ा दिया। जैसे ही अनन्या ने उसे छुआ, एक तेज रोशनी पूरे कमरे में फैल गई। राहुल को लगा जैसे उसके शरीर से सारी ऊर्जा खिंची जा रही हो।
अंत: सन्नाटा और यादें
सुबह जब सूरज की पहली किरण कमरे में दाखिल हुई, तो हवेली बिल्कुल शांत थी। राहुल फर्श पर पड़ा था, कमजोर लेकिन जीवित। दीवार पर बने वे खौफनाक चित्र अब मिट चुके थे। अनन्या जा चुकी थी।
राहुल ने हवेली को नहीं छोड़ा। वह आज भी वहीं रहता है। हवेली अब डरावनी नहीं लगती, लेकिन हर अमावस की रात उसे खिड़की के पास अनन्या की परछाई महसूस होती है। हवेली अब शांत है, पर राहुल की आँखों में वह पुरानी उदासी हमेशा के लिए बस गई है—एक ऐसा प्रेम जो मुकम्मल होकर भी अधूरा रह गया।