आन्या कमरे में थी ।
आन्या ने रेड कलर का लहंगा पहना हुआ था ममता जी उसै तैयार करते हुए नम आंखों से बोली,,,,बैटा हमे माफ तो कर दोगी ना।। आन्या ए सूनकर मासूमियत से बोली,,, आप ने मेरा प्यार समझा मूझे समझा है मां और माफी क्यूं मांग रही है मूझे आपसे कोई भी शिकायत नही है।।।
कूछ देर बाद अभिमान आन्या दोनों ही पाठ पर बैठे हूए थे।। सरस्वती जी ने आन्या के सर पर चूनरी ओढ़ाई । आन्या के आंखें नमः हो गई।।
अभिमान आन्या के चेहरे को देख रहा था उसे यकीन नही हो रहा था आन्या उसकी होने वाली थी।।।
अभिमान आन्या के चेहरे को देखकर उसके माथे को चूम लिया।। आन्या ने अपना चेहरा अभिमान के सिने पर रखकर रोने लगी।। अभिमान का दिल पसीज गया।। अभिमान ने आन्या को उठाया और अपनी गोद में बिठा लिया।। आन्या ने अभिमान को कसकर पकड़ लिया।। अभिमान के चेहरे पर स्माईल आ गई।। आन्या अभिमान के सिने से लगकर भरें गले में बोली,,,,मान वादा कीजिए कभी मूझे अकेला नहीं छोड़ेंगे,मै सब करूंगी बस आप मूझे हमेशा प्यार करेंगे।।
सभी ईस पल को देख कर इमोशनल हो गए थे।।। अभिमान ने प्यार से उसके बालों को सहलाते हुए बोला,,,, शांत हो जाव ना अनू,पता है ना मूझे तूम्हारे आंसू पसंद नहीं है।।।
आन्या अपने आंसू पोंछते हुए भरे गले से बोली,,,,पता नहीं क्यूं मूझे रोना आ रहा है।। ईतना बोलकर ओ अभिमान को देख रही थी।।
अभिमान आन्या के चेहरे को देखकर उसकै गालों पर हाथ रखकर आंसू पोंछते हुए धीरे से बोला,,, शांत हो जाव वर्ना सबके सामने अपने होठ तूम्हारे ईन शहद से भरे होठो को अपने होंठो मे भर लूंगा गा।।आन्या के गाल लाल हो गए।।।
ममता जी बोली,,,बेटा अंगुठी पहनाईए।।। अभिमान ने आन्या के हाथ को अपने हाथ मै लिया उसके हाथों कौ देखने लगा उसके हाथों मै जलने के कटने के निशान थे।।। अभिमान की आंखें हल्की लाल हो गई गूससे से बोला,,, तूम अपना ख्याल नही रख सकती हो ,ए कैसा जला हाथ तूम्हारा ध्यान कहा रहता है,सिलि गर्ल
।।। आन्या ए सूनकर खामोश हो गई।। ममता जी तूकाराम जी थोडे शर्मिंदा हूए क्यूंकि उनके घर मै लड़कीयों को सिर्फ काम करना या यू कहे नौकरानी से बढ़कर नही समझते थे।।।।
सरस्वती जी ने अभिमान के कंधे पर हाथ रखकर शांत भरी आवाज में बोली,,,,मान अंगूठी पहनाईए।।। अभिमान ने आन्या को देखकर सख़्त आवाज में बोला,,,तूम ना,। ईतना बोलकर ओ गेहरी सांस लेकर उसके उंगली से अंगूठी पहनाईं।।
आन्या खुश हो गई।।
आन्या ने अभिमान की उंगली मै अंगूठी पहनाईं।।।राघव ने कूछ फोटो स ली।।।। अभिमान ने जातें समय आन्या के गाल पर हाथ रखकर उसकी आंखों में देखते हुए बोला,,,, प्रोमिस करो ईस पांच दिनो मै जितना तूम्हे अपनी मां के साथ दादी के साथ वक्त बिताना हैं बिता लो उसके बाद मै तूम्हे कभी यहा आने नही दूंगा ।।। आन्या मूंह बनाते हुए बोली,,,, ठीक है एंग्री यंग मैन ।। अभिमान आन्या को अपने सिने से लगाकर बोला,,,एक कीस तो दो।। आन्या ए सूनकर जल्दी से बोली,,,, नहीं।।। अभिमान आन्या की जल्दबाजी देखकर हंसने लगा।।।
अमित जी सरस्वती जी राघव तीनों भी अभिमान को ईतना खूश देखकर शौक थे उन्होंने कभी अभिमान को ईतना खूश नही देखा था।।। अभिमान ने आन्या को उपर उठाकर घूमाने लगा।। आन्या ने अपने हाथों को अभिमान के गले मै डाल कर अपना माथा उसकै माथे से लगा लिया।।।।
आन्या ने अभिमान के सिने से लग गई।। अभिमान आन्या के चेहरे को देखकर प्यार से बोला,,,,हैय रो मत प्लीज मेरे खातिर मूसकूराकर ऐसे जा नहीं पाऊंगा।।। आन्या रोते हुए भी मूसकूराकर बोली,,,, हम्म
ममता जी नमः आंखों से बोली,,, मैंने पहली बार आन्या को ईतना खूश देखा है,आपका बोहोत बोहोत शूक्रीया जी ।।।। तूकाराम जी ने कूछ नही कहां।।
अभिमान तूकाराम जी से हाथ मिलाते हुए बीना भाव के बोला,,, शूक्रीया, हमारा प्यार अपनाने के लिए।।।। ईतना बोलकर ओ ममता जी के पैर छूए तूकाराम जी के पैर छूए।।।
सरस्वती जी ने आन्या के चेहरे को देखकर उसके माथे को चूम कर बोली,,,,, आप ने हमारे मान को ईतनी खूशी दी है, उससे ज्यादा मै आपको दूंगी बच्चा।।।अमित जी ने प्यार से उसके सर पर हाथ रखा।।।आन्या नमः आंखों से अमित जी को देख रही थी।।।उसके हाथ कांप रहे थे।।।
ममता जी ए देखकर रोने लगी।।।ओ चली गई।।कामीनी जी ने सभी को कार तक छोडा।।।।आन्या के चेहरे पर इतनी खूशी थी।।।।
आन्या ने रेड कलर का लहंगा पहना हुआ था ममता जी उसै तैयार करते हुए नम आंखों से बोली,,,,बैटा हमे माफ तो कर दोगी ना।। आन्या ए सूनकर मासूमियत से बोली,,, आप ने मेरा प्यार समझा मूझे समझा है मां और माफी क्यूं मांग रही है मूझे आपसे कोई भी शिकायत नही है।।।
कूछ देर बाद अभिमान आन्या दोनों ही पाठ पर बैठे हूए थे।। सरस्वती जी ने आन्या के सर पर चूनरी ओढ़ाई । आन्या के आंखें नमः हो गई।।
अभिमान आन्या के चेहरे को देख रहा था उसे यकीन नही हो रहा था आन्या उसकी होने वाली थी।।।
अभिमान आन्या के चेहरे को देखकर उसके माथे को चूम लिया।। आन्या ने अपना चेहरा अभिमान के सिने पर रखकर रोने लगी।। अभिमान का दिल पसीज गया।।सभी ईस पल को देख कर इमोशनल हो गए थे।।। अभिमान ने प्यार से उसके बालों को सहलाते हुए बोला,,,, शांत हो जाव ना अनू,पता है ना मूझे तूम्हारे आंसू पसंद नहीं है।।।
आन्या अपने आंसू पोंछते हुए भरे गले से बोली,,,,पता नहीं क्यूं मूझे रोना आ रहा है।। ईतना बोलकर ओ अभिमान को देख रही थी।।
अभिमान आन्या के चेहरे को देखकर उसकै गालों पर हाथ रखकर आंसू पोंछते हुए धीरे से बोला,,, शांत हो जाव वर्ना सबके सामने गोद मै बिठाकर चूप करा दूंगा।।आन्या के गाल लाल हो गए।।।
ममता जी बोली,,,बेटा अंगुठी पहनाईए।।। अभिमान ने आन्या के हाथ को अपने हाथ मै लिया उसके हाथों कौ देखने लगा उसके हाथों मै जलने के कटने के निशान थे।।। अभिमान की आंखें हल्की लाल हो गई गूससे से बोला,,, तूम अपना ख्याल नही रख सकती हो कहां था मैंने तूम्हे ए कैसे जला।।।। आन्या ए सूनकर खामोश हो गई।। ममता जी तूकाराम जी थोडे शर्मिंदा हूए क्यूंकि उनके घर मै लड़कीयों को सिर्फ काम करना या यू कहे नौकरानी से बढ़कर नही समझते थे।।।।
सरस्वती जी ने अभिमान के कंधे पर हाथ रखकर शांत भरी आवाज में बोली,,,,मान अंगूठी पहनाईए।।। अभिमान ने आन्या को देखकर सख़्त आवाज में बोला,,,तूम ना,। ईतना बोलकर ओ गेहरी सांस लेकर उसके उंगली से अंगूठी पहनाईं।।
आन्या खुश हो गई।।
आन्या ने अभिमान की उंगली मै अंगूठी पहनाईं।।।राघव ने कूछ फोटो स ली।।।। अभिमान ने जातें समय आन्या के गाल पर हाथ रखकर उसकी आंखों में देखते हुए बोला,,,, प्रोमिस करो ईस पांच दिनो मै जितना तूम्हे अपनी मां के साथ दादी के साथ वक्त बिताना हैं बिता लो उसके बाद मै तूम्हे कभी यहा आने नही दूंगा ।।। आन्या मूंह बनाते हुए बोली,,,, ठीक है एंग्री यंग मैन ।। अभिमान आन्या को अपने सिने से लगाकर बोला,,,एक कीस तो दो।। आन्या ए सूनकर जल्दी से बोली,,,, नहीं।।। अभिमान आन्या की जल्दबाजी देखकर हंसने लगा।।।
अमित जी सरस्वती जी राघव तीनों भी अभिमान को ईतना खूश देखकर शौक थे उन्होंने कभी अभिमान को ईतना खूश नही देखा था।।। अभिमान ने आन्या को उपर उठाकर घूमाने लगा।। आन्या ने अपने हाथों को अभिमान के गले मै डाल कर अपना माथा उसकै माथे से लगा लिया।।।।
ममता जी नमः आंखों से बोली,,, मैंने पहली बार आन्या को ईतना खूश देखा है,आपका बोहोत बोहोत शूक्रीया जी ।।।। तूकाराम जी ने कूछ नही कहां।।
अभिमान तूकाराम जी से हाथ मिलाते हुए बीना भाव के बोला,,, शूक्रीया, हमारा प्यार अपनाने के लिए।।।। ईतना बोलकर ओ ममता जी के पैर छूए तूकाराम जी के पैर छूए।।।
सरस्वती जी ने आन्या के चेहरे को देखकर उसके माथे को चूम कर बोली,,,,, आप ने हमारे मान को ईतनी खूशी दी है, उससे ज्यादा मै आपको दूंगी बच्चा।।।अमित जी ने प्यार से उसके सर पर हाथ रखा।।।आन्या नमः आंखों से अमित जी को देख रही थी।।।उस
के हाथ कांप रहे थे।।।
ममता जी ए देखकर रोने लगी।।।ओ चली गई।।कामीनी जी ने सभी को कार तक
छोडा।।।।आन्या के चेहरे पर इतनी खूशी थी।।।।
अगर आप ए स्टोरी पढ रहे हैं तो प्लीज़ आप मेरी एक और स्टोरी सून सकतै है पाॅकेट एफ एम पर द बिजनेस क्वीन प्लीज़ सूनना